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बड़ा खुलासा: सबसे पहले खत्म हो सकती है मानव जाति

Sun, 21 Jun 2015 09:28 AM IST
Updated Sun, 21 Jun 2015 09:28 AM IST
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earth extinction phase

धरती पर जीवन ख़ात्मे के एक नए दौर में है, अमरीका के तीन विश्वविद्यालयों के अध्ययन में ये बात कही गई है। अध्ययन में कहा गया है कि सबसे पहले ख़त्म होने वाली प्रजातियों में मानव हो सकते हैं। स्टेनफ़र्ड, प्रिंसटन और बर्कले विश्वविद्यालयों के अध्ययन में ये भी कहा गया है कि रीढ़ की हड्डी वाले जानवरों के लुप्त होने की दर सामान्य से 114 गुना तेज़ है। इसी तरह के निष्कर्ष बीते साल ड्यूक विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में सामने आए थे।

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'400 प्रजातियां लुप्त'
ताज़ा अध्ययन साइंस एडवांसेज़ जर्नल में छपा है। शोधकर्ताओं में से एक का कहना है, "हम अब लुप्त होने के छठे बड़े दौर में प्रवेश कर रहे हैं।" बड़े पैमाने पर प्रजातियों के लुप्त होने की आख़िरी ऐसी घटना साढ़े छह करोड़ साल पहले घटी थी। तब डायनोसॉर धरती से लुप्त हो गए थे।
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रीढ़ की हड्डी वाले जंतुओं की 400 प्रजातियां लुप्त

earth extinction phase

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि मधुमक्खियों से परागण तीन पीढ़ियों में ख़त्म हो सकता है। प्रमुख शोधकर्ता गेरार्डो सेबालोस का कहना है, "अगर ऐसा ही चलता रहा तो धरती पर जीवन फिर से आने में कई लाख साल लग जाएंगे और इंसानों के भी शुरुआती दौर में ही लुप्त होने की संभावना है।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1900 से अब तक रीढ़ की हड्डी वाले जंतुओं की 400 प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतना बड़ा नुकसान आम तौर पर 10,000 सालों में देखा जाता है।

स्टेनफ़र्ड विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर पॉल एर्लिच कहते हैं, "हम जिस शाखा पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं।" इंटरनेशनल यूनियन फ़ॉर कंज़र्वेशन ऑफ़ नेचर का कहना है कि हर साल कम से कम 50 जानवर ख़त्म होने के क़रीब आ जाते हैं।

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