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किम जोंग को डर गद्दाफी जैसा न हो हाल, ट्रंप का वादा- त्याग दो परमाणु हथियार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 18 May 2018 05:44 PM IST
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बीच 12 जून को होने वाली प्रस्तावित बातचीत अधर में लटकती नजर आ रही है। वजह है उत्तर कोरिया का अपने परमाणु निरस्त्रीकरण कार्यक्रम को ना रोकना। जबकि ट्रंप की जिद्द है कि उत्तर कोरिया हर हाल में ऐसा करे।
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ट्रंप का कहना है कि उत्तर कोरिया को अब सुरक्षा तभी दी जाएगी जब वह परमाणु हथियारों का पूरी तरह से त्याग न कर दे। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अब सिर्फ सुरक्षा तभी मिलेगी जब उत्तर कोरिया अपनी जिद्द को छोड़ देगा। अगर किम जोंग ऐसा करते हैं तो अमेरिका उत्तर कोरिया को बेहतर से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगा।
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किम जोंग को डर गद्दाफी जैसा न हो हाल
दरअसल उत्तर कोरिया ने अपने इस डर के पीछे 'लीबिया मॉलड' का उदाहरण दिया है। मालूम हो कि साल 2003 में अमेरिका ने लीबिया तानाशाह गद्दाफी को परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए मना लिया था। जिसके बाद उन्होंने अपने परमाणु हथियारों का निरस्त्रीकरण कर दिया था। लेकिन साल 2011 आते-आते गद्दाफी का यह दावा उल्टा पड़ा और उसे लीबिया में विद्रोहियों का जबर्दस्त सामना करना पड़ा। जिसका अंजाम यह हुआ कि उसे जनता के बीच मौत के घाट उतार दिया गया। तब वहां अमेरिकी ने दखल देते हुए विद्रोहियों को अपना समर्थन दिया था।
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संयुक्त सैन्य अभ्यास 'मैक्स ठंडर' में कोई बदलाव नहीं
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया की वायुसेना के बीच चलने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास 'मैक्स ठंडर' के कार्यक्रम में कोई बलदाव नहीं किया गया। वहीं पेंटागन के प्रवक्ता डाना वाइट ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह सैन्य अभ्यास योजनाबद्ध, रक्षात्मक और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के लिए है।