चीनी विरोध के बावजूद ट्रंप ने तिब्बत पर बनाया कानून
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अमेरिका द्वारा चीन के साथ ट्रेड वॉर और कनाडा में हुवावे कंपनी की सीएफओ की गिरफ्तारी पर छेड़ी गई तल्खी अभी शांत भी नहीं हुई है कि उसने चीनी विरोध के बावजूद तिब्बत को लेकर एक ऐसा कानून बना दिया है जिससे दोनों देशों के बीच नई कूटनीतिक जंग शुरू हो जाएगी। अमेरिका ने तिब्बत को लेकर रेसीप्रकल एक्सेस टू तिब्बत एक्ट 2018 नामक एक नया कानून पारित कर दिया है। इसके पारित होने से चीनी आधिपत्य वाले इस इलाके में अमेरिकी अधिकारियों व नागरिकों के प्रवेश का रास्ता खुल गया है। चीन ने इसका कड़ा विरोध किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तिब्बत को लेकर इस विवादित विधेयक पर दस्तखत कर उसे कानून का रूप दे दिया है। चीन शुरू से इसका विरोध करता रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र पर वह अपना अधिकार मानकर अपनी मर्जी से किसी भी देश के राजनयिकों को प्रवेश देता है। इस कानून पर ट्रंप के दस्तखत करने से चीन की परेशानी बढ़ेगी क्योंकि इस कानून से उन चीनी अधिकारियों पर वीजा पाबंदी लगाने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा जो अमेरिकी नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों को तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक गुरू दलाईलामा के गृह क्षेत्र (तिब्बत) में जाने की अनुमति नहीं देते हैं।
यह कानून अमेरिका के राजनयिकों, अधिकारियों, पत्रकारों और अन्य को तिब्बत में जाने का मार्ग प्रशस्त करता है। राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर दस्तखत करने से पहले अमेरिकी सीनेट और प्रतिनिधि सभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है। ट्रंप ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है जबकि चीन इस संबंध में कानून पारित करने को लेकर अमेरिका से सख्त कूटनीतिक प्रतिरोध जता चुका है। चीन ने अमेरिका से इस सिलसिले में कानून नहीं बनाने का अनुरोध किया था। चीन का कहना है कि तिब्बत सदियों से उसका हिस्सा रहा है। चीनी शासन के खिलाफ विफल विद्रोह के बाद दलाईलामा 1959 में भारत पलायन कर गए थे।
तिब्बत की हकीकत छुपाता रहा है चीन
तिब्बत में मानवाधिकारों की हकीकत जानने या वहां के मामलों का विश्लेषण करने वालों के अनुरोध को चीन अब तक नियमित रूप से ठुकराता रहा है। जबकि तिब्बती मूल के अमेरिकियों के मुताबिक वहां पर उनके लिए हालात काफी बदतर हैं। वहां उन्हें उनके पुरखों की जमीन पर जाने या अपने परिजनों से मिलने तक नहीं दिया जाता है। यहां तक कि तिब्बत जाने के इच्छुक सरकारी अधिकारी, पत्रकार या पर्यटक लोग यदि वहां चले भी जाते थे तो उन्हें नियंत्रित आधिकारिक यात्रा पर रहने के लिए बाध्य किया जाता था।
तिब्बत पर विदेशी दखल की इजाजत नहीं देंगे : चीन
बीजिंग। चीन ने अमेरिकी कदम का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि तिब्बत उसका आंतरिक मामला है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि बीजिंग तिब्बत में किसी भी तरह के विदेशी दखल की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने कहा कि इस कानून के अमल में लाने से अमेरिका और चीन के द्विपक्षीय रिश्तों को नुकसान पहुंचेगा।