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अमेरिका में बंदूक रखने पर गरम हुई बहस

Sat, 22 Dec 2012 08:38 AM IST
बीबीसी हिंदी/सलीम रिज़वी
बीबीसी हिंदी/सलीम रिज़वी Updated Sat, 22 Dec 2012 08:38 AM IST
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debate in usa on gun possession

अमेरिका की राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन यानी एनआरए का कहना है कि स्कूलों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए बंदूकधारी सुरक्षा गार्डों की ज़रूरत है न कि बंदूंकों पर लगाम लगाने की।

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पिछले हफ़्ते कनैक्टिकट के स्कूल में गोलीबारी कांड के बाद राष्ट्रीय राइफ़ल एसोसिएशन ने पहली बार विस्तार से बंदूकें रखने के हक़ में बयान दिया है।

राष्ट्रीय राइफ़ल एसोसिएशन के सीइओ वेन लापिएर का कहना था, "सिर्फ़ एक ही चीज़ है जो बुरे बंदूकधारियों को रोक सकती है और वह है अच्छे बंदूकधारी।"

राइफ़ल एसोसिएशन के मुखिया ने कहा कि अगर कनैक्टिकट के स्कूल में प्रिंसिपल के पास बंदूक होती तो उन्हें हमलावर से निहत्थे निपटकर अपनी जान न देनी पड़ती। सैंडी हुक स्कूल में एक बंदूकधारी ने 20 बच्चों समेत कुल 26 लोगों को गोलियों से भून डाला था।
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लेकिन एनआरए का मानना है कि बंदूकों पर प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए। बल्कि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षा के लिए बंदूकें रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। और इसके लिए संस्था ने अमेरिका भर के स्कूलों में हथियारों से लैस सुरक्षा गार्डों की तैनाती करने में मदद की भी पेशकश की है।
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लेकिन वॉशिंग्टन में प्रेस कांफ़्रेंस के दौरान राइफ़ल एसोसिएशन के अधिकारियों ने पत्रकारों के किसी सवाल के जवाब नहीं दिए।

विरोध
वेन लापिएर के बयान के दौरान दो लोगों ने एऩआरए के खिलाफ़ नारे लगाए और उन्होंने बैनर भी थामे हुए थे जिन पर संस्था के खिलाफ़ नारे लिखे थे।

राइफ़ल एसोसिएशन के वेन लापिएर का कहना था कि अमेरिका में राष्ट्रपति को सुरक्षा प्रदान करने के लिए और पुलिस द्वारा लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तो बंदूकों को अच्छा माना जाता है लेकिन जब आम शहरी बंदूकें रखने की बात करते हैं तो बंदूकें बुरी हो जाती हैं।

राइफ़ल एसोसिएशन के सीइओ ने मीडिया, वीडियो गेम्ज़ और हॉलीवुड की फ़िल्मों- इन सभी को हिंसा को कथित प्रोत्साहन देने के लिए लताड़ा लेकिन बंदूक से संबंधित कानून को सख़्त बनाने का विरोध किया।

लेकिन सुरक्षा गार्डों को हथियारों से लैस करके स्कूलों में तैनात करने के एनआरए के इस प्रस्ताव की जमकर आलोचना हो रही है।

बंदूकों पर पाबंदी की मांग करने वाले लोगों का कहना है कि यह मुमकिन ही नहीं है कि हर स्कूल औऱ उस जगह पर सुरक्षा गार्ड खड़े कर दिए जाएं जहां गोलीबारी की घटना हो।

शर्मनाक बयान
कनेक्टिकट के सेनेटर रिचर्ड ब्लूमिंथाल ने एनआरए के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "स्कूल में कत्लेआम के जवाब में एनआरए का यह दुखद और शर्मनाक हद तक नाकाफ़ी बयान है। अगर यह संस्था सिर्फ़ यही कहती है कि स्कूलों में हथियारबंद सुरक्षा गार्ड तैनात किया जाना ही एक हल है तो इससे बहस में कोई मदद नहीं मिलती है।"

अमेरिका में एनआरए के 40 लाख से अधिक सदस्य हैं जिनमें से बहुत से लोग बंदूकों के रखने संबंधी कानून में किसी भी किस्म की पाबंदी का घोर विरोध करते हैं।

बहुत से रिपब्लिकन और डेमोक्रेट राजनीतिज्ञ भी इस संस्था के सदस्य हैं जिनमें कई सेनेटर और सांसद शामिल हैं। अब देश में यह बहस चल रही है कि क्या बंदूकों पर कानून और सख़्त बनाए जाने चाहिए।

उधर शुक्रवार को ही अमेरिकी राषट्रपति बराक ओबामा ने एक विडियो बयान जारी कर बंदूकों पर पाबंदी लगाने की बात फिर दोहराई है।

बराक ओबामा ने कहा, "राष्ट्रपति‎ की हैसियत से मेरे पास जितने भी अधिकार हैं मैं बंदूकों के बारे में सख़्त कानून लाने में प्रयोग करूंगा। अगर हम अपने बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कुछ कर सकते हैं तो हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम ज़रूर करें।"

उन्होंने कहा कि बहुत से अमेरिकी बंदूकों पर सख़्त कानून बनाने की हिमायत कर रहे हैं। और बहुत से बंदूक रखने वाले भी चाहते हैं कि ऐसे कदम उठाए जाएं कि कनेक्टिकट जैसे हादसे फिर न हों।


कैलीफ़ोर्निया की सेनेटर डाइन फ़ाइनस्टाइन अगले साल जनवरी में एक बिल भी पेश करने वाली हैं जिसके मंज़ूर होने पर अमेरिका में हमला करने वाले हथियारों पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा।

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