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क्यों संभाल कर रखे जाते हैं इनके शव?

Sat, 09 Mar 2013 06:50 PM IST
Updated Sat, 09 Mar 2013 06:50 PM IST
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dead body preservation

वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज के निधन के बाद उनके शव पर लेप लगा कर सेना के एक संग्राहलय में रख दिया गया।

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आम लोगों के जहन में ये सवाल जरूर उठता होगा कि शवों को हमेशा के लिए कैसे सुरक्षित रखा जाता है और ऐसा क्यों किया जाता है आखिर?

ह्यूगो चावेज के शव को हो ची मिन, लेनिन और माओ त्से तुंग जैसे दिग्गज राजनेताओं की तरह लेप लगा कर परिरक्षित किया गया है।

लंदन स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स के प्रॉफेसर मारगोट लाइट का कहना है कि ऐसा किसी कारण के लिए ही किया जाता है, ताकि इन राजनेताओं के संघर्ष को लोगों के जहन में जीवित रखा जा सके।

उनका कहना है कि ये इतनी अटपटी हरकत नहीं है जितनी दिखाई देती है, बल्कि इसके पीछे वो देशभक्ति और वो संघर्ष होता है जिसे आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है।

मारगोट लाइट कई बार रूसी कम्यूनिस्ट नेता लेनिन के मकबरे पर जा चुके हैं। उनका कहना है कि वहां का माहौल बिलकुल अलग सा होता है।

उनका कहना है कि 1924 में लेनिन की मौत के बाद उनकी विचारधारा को बनाए रखने और उनके अंतरराष्ट्रीय महत्तव को बल देने के लिए उनके शव को ज्यों का त्यों रखा गया।
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हालांकि 1990 के दशक से रूस में इस बात पर बहस चलती रही कि लेनिन के शव को दफना दिया जाए या उसे परिरक्षित रूप में ही रखा जाए।

'जिंदा' शव
कुछ रुसी नागरिकों का मानना है कि लेनिन के शव को इस रूप में देखना उन्हें घिनौना लगता है। उधर वेनेजुएला के लोगों का मानना है कि ह्यूगो चावेज को अमर रखा जाए।
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लेकिन एक शव को कितने लंबे समय तक संरक्षित रखना संभव है?

यूनिवर्सिटी ऑफ दंडी में जैविक विज्ञान के एक प्रॉफेसर सू ब्लैक का कहना है कि अगर शव की देख-रेख अच्छे से की जाए, तो ऐसा बहुत लंबे समय तक संभव है।

प्रॉफेसर सू कहती हैं कि शव की हालत दस साल बाद कुछ हद तक खराब तो होती ही है, और वो देखने में उतनी अच्छी नहीं लगती। शरीर पर लेप लगाए जाने की प्रक्रिया की अचार डालने की प्रक्रिया से तुलना की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से खाद्य पदार्थों को परिरक्षित किया जाता है, उसी तरह शरीर को परिरक्षित करने के लिए उसके लिए एक जीवाणुहीन वातावरण बनाना पड़ता है।

शरीर में रक्त बैक्टीरिया को निमंत्रण देता है और इससे बचने के लिए शरीर की अहम नसों से खून निकाल लिया जाता है ताकि शव में फंगस न लगे। फिर कुछ रसायनों की मदद से शव को ‘जिंदा’ रखा जाता है।

आसान नहीं ये काम
शव को परिरक्षित रखने के लिए काफी पैसा भी खर्चना पड़ता है। शव का तापमान औऱ और उसके आसपास की नमी को बहुत ध्यान से नियंत्रित रखना पड़ता है।

शवों को परिरक्षित रखने के मामले में रूसी वैज्ञानिक सबसे आगे हैं। उन्होंने सरकार की मदद से एक रिसर्च संस्था बनाई जो इसी विषय पर का करती है कि शवों को कैसे लंबे से लंबे समय के लिए परिरक्षित रखा जाए।


यहां तक कि अपने राजनेताओं के शव को परिरक्षित करने के लिए विश्व के दूसरे देश भी एक्सपर्ट राय लेने के लिए रूस का ही रुख करते हैं।

रूसी वैज्ञानिकों ने लेनिन के शव को परिरक्षित रखने के लिए अलग तरह के नुस्खे इस्तेमाल करते हैं। वे शव को नियमित रूप से नहलाते हैं और इलैक्ट्रिक पंप की मदद से शरीर के भीतर की नमी को निकालते हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि शव की देख रेख करना एक कला है जो अब धुंधली पड़ती जा रही है। ऐसे में ये कहना मुश्किल है कि आने वाले समय में परिरक्षण की परंपरा कितनी आगे जा पाएगी?

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