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बॉस्टन धमाकों की वजह पर सस्पेंस
Updated Tue, 23 Apr 2013 09:16 PM IST
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अमेरिका में बॉस्टन मैराथन धमाकों के संदिग्ध ज़ोख़र सारनाएफ़ के खिलाफ़ आरोप तय कर दिए गए हैं लेकिन इनमें इस बात का ज़िक्र नहीं है कि धमाके करने के पीछे उनकी क्या संभावित वजह रही होगी।
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संघीय अभियोजन पक्ष ने ज़ोख़र पर विनाशकारी हथियार इस्तेमाल करने और संपत्ति नष्ट करने का आरोप लगाया है जिस वजह से मौतें हुईं।
ज़ोख़र सारनाएफ़ के खिलाफ दायर हुई 10 पन्ने की आपराधिक शिकायत में हमले की विस्तृत जानकारी है लेकिन वजह के बारे में कुछ नहीं बताया गया है।
आपराधिक शिकायत में ये पता करने की कोशिश की गई है कि धमाकों के दौरान दोनों संदिग्ध कहाँ थे और इसके बाद जानकारियों के तार जोड़े गए हैं जब तीन दिन बाद उन्हें पकड़ लिया गया।
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अनाम रहने के शर्त पर दो अमेरिकी अधिकारियों ने एपी को बताया है कि दोनों भाई धर्म से प्रभावित थे। दोनों भाई मुसलमान हैं और वे मूलतः चेचन्या के हैं। अमेरिका में वे एक दशक से रह रहे हैं।
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'कट्टर इसलाम'
एपी के सूत्रों के मुताबिक ऐसा नहीं लगता कि उनका संबंध किसी इसलामिक चरमपंथी गुट था। थोड़ी-बहुत मिली जानकारी के मुताबिक बड़ा भाई तामरलेन कट्टर इसलाम के प्रति आकर्षित थे जबकि छोटे भाई के बारे में ऐसे कोई सुबूत एफ़बीआई ने तामरलेन से 2011 में रूसी सरकार के आग्रह पर पूछताछ भी की थी। ऐसी चिंता जताई गई थी कि वो कट्टर इसलाम को मानते हैं। लेकिन शायद बाद में उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया।
रेडियो लिबर्टी की जाँच के मुताबिक इस बात के सुबूत मिले हैं जिससे लगता है कि तामरलेन ने दागेस्तान में अकेले दो महीने बिताए। हालांकि शुरू में कहा जा रहा था कि वे पूरे समय अपने पिता के साथ थे। दागेस्तान चेचन्या के पास मुस्लिम बहुल रूसी गणराज्य है।
तामरलेन और उनके भाई ज़ोख़र दोनों बॉस्टन धमाकों में संदिग्ध माने जा रहे हैं। लेकिन पुलिस अभियान में पिछले शुक्रवार तामरलेन की मौत हो गई थी जबकि ज़ोख़र को बाद में पकड़ लिया गया।
ज़ोख़र को पकड़ने के अभियान के दौरान उनके गले पर गोली लगी थी। बावजूद इसके वे सुनवाई के दौरान एक बार बात कर पाए।
19 साल के ज़ोख़र से जब पूछा गया कि क्या वे वकील रखने में सक्षम हैं तो उन्होंने ना में जवाब दिया। अस्पताल में हुई पूछताछ के दौरान उन्होंने बाकी सवालों के जवाब सिर हिलाकर ही दिए। अगली सुनवाई मई के अंत में होनी है।
पिछले सोमवार को बॉस्टन मैराथन धमाकों में तीन लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज़्यादा घायल हुए थे। तीन लोगों की हालत अब भी नाज़ुक बनी हुई है।