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भारत को 89 एंटीशिप 'हारपून' मिसाइल देगा अमेरिका
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Sep 2016 03:41 PM IST
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प्रतीकात्मक चित्र
- फोटो : Reuters
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अमेरिकी रक्षा विभाग ने भारत को युद्धपोत भेदी, हारपून मिसाइलों की आपूर्ति करने के लिए बोइंग से 81 मिलियन डॉलर(लगभग 500 करोड़ रुपए) से अधिक की राशि का करार किया है।
इस करार के मुताबिक, विदेश सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के लिए बोइंग को 89 हारपून मिसाइलों, संबंधित कंटेनरों और उपकरणों की 22 खेप के लिए 81 मिलियन डॉलर से अधिक का करार किया गया है।
ये मिसाइलें अमेरिका में कई स्थानों पर बनाई जाएंगी। इनमें से अधिकतर की मैन्यूफैक्चरिंग सेंट चार्ल्स, मिसूरी में होगा। मैन्यूफैक्चरिंग की कुछ प्रक्रिया ब्रिटेन में भी की जाएगी। मिसाइलों के जून 2018 में तैयार हो जाने की उम्मीद है।
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इस करार के मुताबिक, विदेश सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के लिए बोइंग को 89 हारपून मिसाइलों, संबंधित कंटेनरों और उपकरणों की 22 खेप के लिए 81 मिलियन डॉलर से अधिक का करार किया गया है।
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ये मिसाइलें अमेरिका में कई स्थानों पर बनाई जाएंगी। इनमें से अधिकतर की मैन्यूफैक्चरिंग सेंट चार्ल्स, मिसूरी में होगा। मैन्यूफैक्चरिंग की कुछ प्रक्रिया ब्रिटेन में भी की जाएगी। मिसाइलों के जून 2018 में तैयार हो जाने की उम्मीद है।
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जाने हारपून मिसाइल से जुड़ी खास बातें
अमेरिका की सबसे बड़ी रक्षा उत्पादक कंपनी बोईंग द्वारा विकसित किया गया हारपून मिसाइल 124 किलोमीटर तक का इलाका अपनी जद में रख सकता है जो ज़मीन पर भी अपने लक्ष्य के विरुद्ध इस तरह के मिशन को अंजाम दे सकता है।
हारपून मिसाइल का वजन लगभग 1000 किलो तक का होता है जो 864 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करता है। भारतीय नौसेना ने इस सबसोनिक मिसाइल का परीक्षण पिछले ही वर्ष बंगाल की खाड़ी में किया था जिसे अमेरिका के बोईंग पी 8I टोही विमान द्वारा दागा गया था।
हारपून मिसाइलें 'ओवर-द-होरिजोन' सुविधा से युक्त है। 'ओवर-द-होरिजोन' सुविधा एक रडार से लैस सुविधा होती है जिसकी मदद से मिसाइलें सैकड़ो किलोमीटर दुर निशाने पर भी सटीक हमला करती हैं।
हारपून मिसाइलें सेना के तीनों अंगो के काम आ सकती है। इस मिसाइल का प्रक्षेपण लड़ाकू विमान, युद्धपोत, सबमरीन कहीं से भी किया जा सकता है।
हारपून मिसाइल 'हाई सबसोनिक' श्रेणी की मिसाइल हैं। इसकी रफ्तार 850 किलो मीटर प्रतिघंटा है।
पड़ोसी देशों से संभावित खतरों को देखते हुए भारत अपनी शिशुमार-श्रेणी की पंडुब्बियों को भी हारपून मिसाइलों से लैस करना चाहता है जो हर मौसम व परिस्थितियों में काम कर सके।
हारपून मिसाइल का वजन लगभग 1000 किलो तक का होता है जो 864 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करता है। भारतीय नौसेना ने इस सबसोनिक मिसाइल का परीक्षण पिछले ही वर्ष बंगाल की खाड़ी में किया था जिसे अमेरिका के बोईंग पी 8I टोही विमान द्वारा दागा गया था।
हारपून मिसाइलें 'ओवर-द-होरिजोन' सुविधा से युक्त है। 'ओवर-द-होरिजोन' सुविधा एक रडार से लैस सुविधा होती है जिसकी मदद से मिसाइलें सैकड़ो किलोमीटर दुर निशाने पर भी सटीक हमला करती हैं।
हारपून मिसाइलें सेना के तीनों अंगो के काम आ सकती है। इस मिसाइल का प्रक्षेपण लड़ाकू विमान, युद्धपोत, सबमरीन कहीं से भी किया जा सकता है।
हारपून मिसाइल 'हाई सबसोनिक' श्रेणी की मिसाइल हैं। इसकी रफ्तार 850 किलो मीटर प्रतिघंटा है।
पड़ोसी देशों से संभावित खतरों को देखते हुए भारत अपनी शिशुमार-श्रेणी की पंडुब्बियों को भी हारपून मिसाइलों से लैस करना चाहता है जो हर मौसम व परिस्थितियों में काम कर सके।