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भारतीय मूल का होने के कारण राष्ट्रपति नही बन पाएंगे बॉबी जिदंल?

Sat, 27 Jun 2015 01:30 PM IST
Updated Sat, 27 Jun 2015 01:30 PM IST
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bobby jindal's fight with indian origin identity

अमेरिका के लुइज़ियाना प्रांत के गवर्नर पीयूष बॉबी जिंदल एक महत्त्वाकांक्षी नेता हैं। उनकी निगाहें कई सालों से अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर टिकी थीं।

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बुधवार को उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से 2016 के राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए खुद को उम्मीदवार घोषित कर ही डाला। लेकिन उनके न चाहते हुए भी उनका भारतीय मूल उनके इरादों पर पानी फेरता नज़र आता है।
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बॉबी जिंदल के माता-पिता भारत के पंजाब राज्य से अमेरिका में जाकर बस गए थे जहां जिंदल का जन्म 10 जून 1971 को हुआ। वह अपनी भारतीय जड़ों से जितना दूर भागने की कोशिश करते हैं उनके विरोधी उनके भारतीय मूल को उतना ही उजागर करने की कोशिश करते हैं।
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बुधवार की घोषणा के दौरान भी उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "हम लोग इंडियन अमेरिकन, अफ्रीकन अमेरिकन या आयरिश अमेरिकन नहीं हैं बल्कि केवल अमेरिकन हैं"। शायद इसीलिए बुधवार के ऐलान के फ़ौरन बाद ट्विटर पर उनकी ज़बरदस्त खिंचाई शुरू हो गई। हैशटैग #bobbyjindalissowhite पर बेरहमी से लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया। इस काम में भारतीय और भारतीय मूल के अमरीकी आगे थे। बॉबी जिंदल के खिलाफ इस नाराज़गी का ख़ास कारण था भारतीय पहचान से अलग होने की उनकी कोशिश।

अगर वह अपने भारतीय जातीय पृष्ठभूमि को गले लगाते तो इस समय वह भारतीयों के हीरो बन जाते। लेकिन ऐसा न करना उनकी सियासी मजबूरी है। अमेरिका में राजनीति करने के लिए 'अमरीकियत' पर ज़ोर देना ज़रूरी है। अपनी 'केवल अमरीकी' पहचान की बुनियाद पर ही वह अमरीकी हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव्स के लिए चुने गए। इसके बाद 2007 वह इसी बुनियाद पर लुइसियाना प्रांत के गवर्नर चुने गए और इस तरह से अमेरिका के किसी भी प्रान्त के वह भारतीय मूल के पहले गवर्नर बने। इसी बुनियाद पर 2011 में वह इस प्रान्त के एक बार फिर से गवर्नर चुने गए।

लोकप्रियता में कमी

bobby jindal's fight with indian origin identity

अमरीकी सियासत में सफलता के लिए देश भक्ति, परिवार प्रेमी और धार्मिक व्यक्ति होना बहुत ज़रूरी है। प्रांतों के स्तर पर भारतीय मूल के ऐसे कई छोटे नेता हैं जो अपनी जड़ों को ज़ाहिर नहीं करते, अपना नाम और धर्म बदल देते हैं।

अपनी नस्ली हकीकत को दबाकर अमरीकी शहरियात और इसके झंडे की कसमें खाने लगते हैं। बाइबिल से लगाव बढ़ाने लगते हैं। बॉबी जिंदल पहले पियूष जंदल थे और हिन्दू धर्म को मानते थे लेकिन अब वह ईसाई हैं।

उन्हीं की तरह दक्षिण कैरोलाईना की गवर्नर निक्की हैली का असल नाम नम्रता रंधावा था और वह सिख धर्म का पालन करती थीं लेकिन अब वो निक्की हैली हैं और उनका मज़हब ईसाई है। वह भी दूसरी बार अपने पद पर चुनी गई हैं।

रिपब्लिकन पार्टी के 12 और उमीदवार

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अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल की दूसरी और तीसरी पीढ़ियां 'केवल अमरीकी' पहचान को अपना चुकी हैं। इंग्लैंड में भारतीय मूल की तीसरी पीढ़ी अब भी भारतीय मूल से जुडी हैं और इसीलिए भारतीय क्रिकेट टीम को सपोर्ट करती है, अमेरिका में ऐसा नहीं है।

बॉबी जिंदल पर भारतीयों के मज़ाक का असर पड़ सकता है। लेकिन सच तो यह है कि पिछले दो-तीन सालों से उनकी लोकप्रियता में कमी आई है। जिंदल के इलावा रिपब्लिकन पार्टी के 12 और उमीदवार हैं। इन सबके बीच 'प्राइमरी रेस' होगी। यह दौड़ जो जीतेगा वह रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद का उमीदवार होगा। अब तक मिले संकेतों के अनुसार बॉबी जिंदल इस दौड़ में फिलहाल काफी पीछे हैं।

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