{"_id":"e7b987d0-2895-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"barack-obama-wins-presidential-election","type":"story","status":"publish","title_hn":"बराक ओबामा की जीत, रोमनी ने मानी हार","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
बराक ओबामा की जीत, रोमनी ने मानी हार
बीबीसी हिंदी
Updated Wed, 07 Nov 2012 03:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव में अधिकांश प्रांतों से नतीजे आ गए हैं और डेमोकैट उम्मीदवार राष्ट्रपति ओबामा ने अपने प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के मिट रोमनी पर जीत हासिल कर ली है। ओबामा ने ट्विटर साइट पर जीत का दावा किया है।
विज्ञापन
अमेरिका के राष्ट्रपति ने जीत के लिए जरूरी इलैक्टोरल कॉलेज के 270 वोट हासिल कर लिए हैं। जिस प्रांत में किसी भी उम्मीदवार को ज्यादा मत मिलते हैं, उस पूरे प्रांत के इलेक्टोरल वोट उसी उम्मीदवार की झोली में चले जाते हैं।
विज्ञापन
जैसे ही अमेरिकी मीडिया ने ओहायो प्रांत के इलेक्टोरल वोट ओबामा के पक्ष में जाने की घोषणा की, वैसे ही उन्होंने 270 इलैक्टोरल कॉलेज वोट का आंकड़ा पार कर लिया।
विज्ञापन
रिपब्लिकन मिट रोमनी ने बॉस्टन में पार्टी की सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ओबामा को बधाई दी है और अपनी हार स्वीकार की है।
उनका कहना था, "देश गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। दोनों पार्टियों को मतभेद भुलाकर साथ काम करने की जरूरत है। शिक्षकों, हमारे बच्चों के माता-पिता, रोजगार पैदा करने वालों, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों और सरकारी अफसरों को खुद को अपने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश के हित में काम करना होगा। मैं चाहते था कि मैं अमेरिका को नई दिशा दूं लेकिन लोगों ने दूसरे नेता को चुना है। भगवान उन्हें आशीर्वाद दें।"
ओबामा ने जीत के बाद अभी औपचारिक घोषणा नहीं दिया है। ओबामा की जीत अर्थव्यवस्था के बारे में असंतुष्ट जनता और रिपब्लिकन उम्मीदवार मिट रोमनी के प्रचार के लिए एकत्र खासे फंड के बीच हुई है।
फिलहाल ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि ओबामा कुल कितने मतों से जीते हैं। लाखों की संख्या में अमेरिकी मतदाताओं ने देश का नया राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान किया।
'आऊटसोर्सिंग पर बहस, चीन रहे सतर्क'
वरिष्ठ भारतीय पत्रकार इंदर मल्होत्रा ने बीबीसी को बताया, "भारत के लिए कोई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव नहीं होंगे। लेकिन ओबामा ने लगातार आऊटसोर्सिंग की बात कही है जिससे भारत में चिंता जरूर होगी।।मेरे हिसाब से राष्ट्रपति की सबके बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था ही बनी रहेगी।"
अमेरिका के डेलावेयर विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉक्टर मुक़्तदर खान ने बीबीसी को बताया, "जहां तक आऊटसोर्सिंग का सवाल है तो भारत को जहां अमेरिका बीपीओ आऊटसोर्सिंग करता है, वहीँ चीन को वह मैन्यूफैक्चरिंग आऊटसोर्स करता है। इस दिशा में पिछले दो साल में ओबामा ने काफी काम किया है और यदि ओबामा के सत्ता में लौटने से आऊटसोर्सिंग पर बहस भारत से ज्यादा चीन पर असर करेगी।"