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दिखेगा पड़ोस से गुजरता हुआ उल्कापिंड
Updated Fri, 15 Feb 2013 04:41 PM IST
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एक वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक ओलंपिक में इस्तेमाल लाए जाने वाले स्वीमिंग पूल के आकार का एक उल्कापिंड पृथ्वी के बेहद नजदीक से गुजरेगा।
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उल्कापिंड आज पृथ्वी 27700 किलोमीटर की दूरी से निकलेगा। वो पृथ्वी के नजदीक से निकलने वाला अब तक के सबसे बड़े उल्कापिंडों में से एक है।
इस दूरी का अंदाज इस बात से लागाया जा सकता है कि पृथ्वी से मानव द्वारा छोड़े गए कई उपग्रह इससे ज्यादा दूरी पर पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं। खगोलशास्त्रियों का कहना है कि इस उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने का कोई अंदेशा नहीं है।
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कब और कहां
यह उल्कापिंड भारतीय समयानुसार शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि को 12.55 मिनट पर पृथ्वी से सबसे नजदीक के स्थान पर होगा।
पृथ्वी के जिन इलाकों में उस समय अंधेरा होगा और बादल साफ होंगे इसे किसी भी अच्छी दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से देखा जा सकेगा।
यह उल्कापिंड भी पृथ्वी की तरह ही सूर्य की परिक्रमा कर रहा है और लगभग पृथ्वी की तरह ही यह अपनी कक्षा में परिक्रमा पूरी करने में 368 दिन लेता है। बस इसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा से अलग है।
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खगोलशास्त्रियों के हिसाब से यह उल्कापिंड 7.8 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ्तार से सफर कर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पृथ्वी के 'नीचे' से गुजर कर 'ऊपर' सूर्य की तरफ चला जाएगा।
सीधा प्रसारण
यह पूर्वी हिन्द महासागर के ऊपर से गुजरेगा और इसे एशिया ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी यूरोप के इलाकों से सबसे अच्छी तरह देखा जा सकेगा।
पर दुनिया में हर तरफ मौजूद उन लोगों के लिए जिन्हें इसे देखने की बहुत तमन्ना है उनके लिए नासा और भी कई एजेंसियां भारतीय समयानुसार इसका 12.30 से सीधा प्रसारण करेंगे।
'2012 डीए 14' नाम के इस उल्कापिंड को सबसे पहले फरवरी 2012 में स्पेन के ला सागरा से देखा गया था। ब्रिटेन के बेलफास्ट विश्विद्यालय में एलन फित्जसिमोंस का कहना है कि यह कोई खो देने वाली मौका नहीं है।
वो कहते हैं कि जब कोई उल्कापिंड पृथ्वी के इतने नजदीक से गुजरता है तो उनका अध्यन करने के कई मौके होते हैं। यह इतना चमकदार होगा कि इसे पढ़ना आसान होगा।