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ऐपल पर टैक्स बचाने की तिकड़म लगाने का आरोप
Updated Wed, 22 May 2013 07:46 AM IST
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अमेरिकी सीनेट की एक समिति ने 'ऐपल' पर आरोप लगाया है कि अलग-अलग तरीके अपना कर वह कर की देनदारी से बच रही है।
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समिति ने कहा है कि 'ऐपल' अमेरिकी आयकर विभाग को अरबों डॉलर का कर देने से बचने के लिए दूसरे देशों में कंपनिया खोलने के एक जटिल तंत्र का उपयोग कर रही है।
ऐपल के प्रमुख टिम कुक मंगलवार को समिति के सामने सफाई देंगे। पहले से तैयार एक बयान में ऐपल ने कहा है कि कर की देनदारी से बचने के लिए कोई तिकड़म नहीं लगाई गई।
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समिति ने हालांकि कहा है कि उसे किसी गैर कानूनी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं।
ऐपल के पास 145 अरब डॉलर का धन कोष है। लेकिन समिति का कहना है कि इसमें से 102 अरब डॉलर देश से बाहर रखे हुए हैं।
सबसे बड़े करदाता
ऐपल का कहना है कि वह अमेरिका के बड़े करदाताओं में से एक है। वित्त वर्ष 2012 में उसने छह अरब डॉलर का कर भुगतान किया था।
सीनेट की स्थायी समिति की छानबीन पर बनी उप समिति ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा मुनाफ़े को देश के बाहर भेजने के तरीकों की जांच की।
इसमें पता चला कि कुछ बड़ी अमेरिकी कंपनियां विदेश में हुई कमाई को स्वदेश नहीं भेजना चाहती थीं, क्योंकि उन्हें वहाँ 35 फीसद की दर से कर देना पड़ता।
सबसे अधिक कॉरपोरेट टैक्स वसूलने वाले देशों में एक अमेरिका भी है, वहाँ 35 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स वसूला जाता है।
सीनेट की समिति की रिपोर्ट अप्रैल में आई थी। इसके अध्यक्ष कार्ल लेविन ने कहा,''कर बचाने वाले देशों में अपने मुनाफे को भेजने को लेकर ऐपल संतुष्ट नहीं था।''
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ऐपल ने कर बचाने वाले देशों की तलाश कर वहां उसने अरबों डॉलर की जमापूंजी वाली कंपनियां खोलीं।
ऐपल का इनकार
सीनेट की समिति के सदस्य जॉन मैक्केन ने कहा,''ऐपल दावा करता है कि वह अमेरिका में सबसे अधिक कॉरपोरेट कर देने वालों में से एक है। लेकिन आकार और पैमाने के आधार पर वह अमेरिका में कर देनदारियों से बचने वालों में से भी एक है।''
ऐपल ने कहा है,''कर बचाने के लिए मशहूर देशों में वह अपनी बौद्धिक संपदा को कभी नहीं ले गया और अमेरिका में कर बचाने के लिए उसने उन्हें कभी वापस अमेरिका में नहीं बेचा।''
यह समिति कर बचाने के मामले में माइक्रोसाफ्ट और हेवलेट पैकर्ड (एचपी) से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। समिति ने पिछले साल सितंबर में दो कंपनियों पर अमरीका में कर देनादारियों से बचने के लिए साइनम द्विप का उपयोग करने का आरोप लगाया था।
दूसरे देशों में जाकर कर देनदारियों से बचने वाली 10 बड़ी कंपनियों में से पाँच आईटी क्षेत्र की हैं।