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दक्षिण चीन सागर में दिखे अमेरिकी युद्धपोत, तनाव के आसार

Sun, 27 May 2018 09:13 PM IST
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Updated Sun, 27 May 2018 09:13 PM IST
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American warship seen in South China Sea, threatens tensions
(फाइल फोटो)
चीन ने दावा किया है कि अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में नेवी के दो युद्धपोत उतारे हैं। माना जा रहा है कि डोनल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया पर बीजिंग से लगातार सहयोग मांगता रहा, लेकिन उसकी आनाकानी के बाद अमेरिका की इस गतिविधि से चीन भड़क सकता है। गौरतलब है कि चीन इस समुद्री क्षेत्र पर अपना दावा जताता रहा है।
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अमेरिका का यह ताजा प्रयास चीन की उस मुहिम का जवाब माना जा रहा है, जिसमें उसने इस सामरिक जल क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान की योजना महीनों पहले बनाई गई थी और यह ऑपरेशन रूटीन का हिस्सा है। यह गतिविधि हाल में अमेरिकी युद्धाभ्यास से चीन को बाहर रखने के ठीक बाद की गई है इसलिए यह समय थोड़ा संवेदनशील है।
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अधिकारियों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि चीन द्वारा अपने पड़ोसी देशों से विवाद वाली जगह पार्सल आइलैंड से 12 नॉटिकल मील की दूरी पर गाइडेड मिसाइल क्रूजर को तैनात किया गया है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन को लेकर पहले से ही तनाव की स्थिति है। ट्रंप की ओर से उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन के साथ वार्ता रद्द किए जाने के बाद से अमेरिका और चीन के संबंधों में तनाव और बढ़ा है। जानकारों का मानना है कि ऐसे में इस बीच अमेरिकी युद्धपोतों की दक्षिण चीन सागर में मौजूदगी तनाव को और बढ़ा सकता है।
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चीन के व्यवहार पर नहीं पड़ेगा असर

आलोचकों का मानना है कि इस ऑपरेशन का चीन के व्यवहार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इसका सांकेतिक महत्व भर है। उनका कहना है कि अमेरिकी सेना की दुनिया भर में मौजूदगी है और उसके ऑपरेशन चलते रहते हैं। यही नहीं उसके सहयोगियों के दावे वाले क्षेत्र में भी उसकी मौजूदगी रही है। 12 मई को सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों में यह पता चला था कि चीन ने जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एंटी-शिप क्रूज मिसाइल वुडी आइलैंड में तैनात की हैं।


और वैश्विक भागीदारी चाहता है अमेरिका

दक्षिण चीन सागर में चीन अपना दावा करता रहा है, जहां से ब्रुनेई, मलयेशिया, फिलिपींस, ताइवान और वियतनाम के व्यावसायिक जहाज गुजरते हैं। इस समुद्री रास्ते से प्रति वर्ष करीब पांच खरब डॉलर का कारोबार होता है। अमेरिका ने कहा है कि वह दक्षिण चीन सागर में जहाजों की आवाजाही की आजादी के लिए और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का पक्षधर है।
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