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श्रीलंका के खिलाफ़ संयुक्त राष्ट्र में आज अमेरिकी प्रस्ताव
बीबीसी
Updated Thu, 21 Mar 2013 03:49 PM IST
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श्रीलंका में लगभग तीन दशक तक चले गृह युद्ध के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में आज प्रस्ताव ला रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र ने पिछले साल अमेरिका के उस प्रस्ताव को स्वीकार किया था जिसमें मांग की गई थी कि श्रीलंका इस बात को सुनिश्चित करे कि तमिल विद्रोहियों के खिलाफ़ युद्ध के अंतिम वर्षों में युद्ध अपराधों के लिए ज़िम्मेदार सैन्य बलों के खिलाफ़ कार्यवाई हो।
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अमेरिका मानता है कि श्रीलंका इन सैन्यबलों के खिलाफ़ कार्यवाई करने में असफल रहा है।
श्रीलंका सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच युद्ध का अंतिम चरण काफी विवादों में रहा है और दोनों पक्षों ने युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं।
वहां 26 साल तक चले युद्ध में लगभग एक लाख लोग मारे गए थे। लेकिन युद्ध के आख़िरी दिनों में मारे गए हज़ारों नागरिकों की संख्या के बारे में अभी तक दावे के साथ कुछ भी नही कहा जा सकता है।
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संयुक्त राष्ट्र की एक जांच रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि लगभग 40 हज़ार लोग युद्ध के अंतिम पांच महीनों में मारे गए थे। लेकिन कई दूसरी रिपोर्टों के अनुसार ये संख्या ज़्यादा भी हो सकती है।
श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं की रिपोर्टों को खारिज कर चुका है।
भारत की प्रतिक्रिया
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय सरकार ने संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
बुधवार को एक पत्रकार सम्मेलन में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि भारत, अमेरिकी प्रस्ताव पर संशोधन पेश करेगा जिससे तमिलों के कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर उस देश को एक 'दृढ़ संदेश' मिले। उन्होंने कहा कि ये संशोधन तय किए जा चुके हैं।
चिदंबरम ने कहा, "भारत का हमेशा ये रुख रहा है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को इस मुद्दे पर कड़ा प्रस्ताव लाना चाहिए जिससे श्रीलंका को एक दृढ़ संदेश मिले और जिससे श्रीलंकाई सरकार एक स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच करने के लिए मजबूर हो।"
लेकिन ये संशोधन क्या होंगे, इस बारे में और अधिक जानकारी नहीं दी गई। इस मुद्दे की छाप पिछले कुछ दिनों में भारत की राष्ट्रीय राजनीति पर भी रही है।
केंद्र में यूपीए सरकार में शामिल डीएमके लगातार मांग कर रहा था कि श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ़ पेश होने वाले प्रस्ताव को और कड़ा किया जाए और श्रीलंकाई तमिलों के खिलाफ हुए युद्ध अपराधों की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की जाए।
आखिरकार मंगलवार को डीएमके ने इस मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापिस ले लिया और उसके मंत्रियों ने अपने इस्तीफ़े सौंप दिए। बुधवार को भारतीय संसद में श्रीलंका के खिलाफ़ प्रस्ताव पारित करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा ख़त्म हो गई।
'राजनीति से प्रेरित प्रस्ताव'
इस बीच श्रीलंका ने संयुक्त राष्ट्र में लाए जाने वाले अमेरिकी प्रस्ताव की निंदा करते हुए उसे "एकतरफ़ा और राजनीति से प्रेरित" करार दिया है।
श्रीलंका के विदेश मंत्री जीएल पेएरिस ने सदस्य देशों को अपने आधिकारिक जवाब में बताया, "श्रीलंका की स्थिति पर असंगत ध्यान आकर्षित कर, उसका अपमान करने वाले और उसे बदनाम करने वाले प्रस्ताव लाना, वहां मौजूदा समझौते और सामंजस्य की प्रक्रिया के लिए प्रतिकूल है।"
पेयरिस ने ये भी कहा, "जिस तरह श्रीलंकाई सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग का पिछले प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, वो इस प्रस्ताव को भी खारिज करती है। जब ये प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में लाया जाएगा, तब श्रीलंका इस पर वोट करवाने का निवेदन करेगा।"