एनएसजी में भारत की सदस्यता के लिए सहयोग करता रहेगा अमेरिका
अमेरिका ने कहा है कि वह भारत की एनएसजी सदस्यता के लिए नई दिल्ली और अन्य देशों के साथ रचनात्मक सहयोग करता रहेगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता एलिजाबेथ थुडेउ ने कहा, ‘हम आने वाले महीनों में भारत को समूह की सदस्यता के लिए भारत और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के सदस्यों के साथ सहयोग कर रहे हैं और करते रहेंगे और इस दिशा में रचनात्मक कार्य जारी रखेंगे।’
हालांकि उन्होंने इस मसले पर अमेरिका की चीन के साथ होने वाली बातचीत के बारे में किए गए सवाल का जवाब नहीं दिया। चीन ही एक मात्र ऐसा प्रमुख देश है, जो एनएसजी में सदस्यता के लिए भारत का विरोध कर रहा है।
अमेरिका ने चार बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत की पूर्ण सदस्यता के लिए अपना समर्थन दिया है। हमें पूरा भरोसा है कि भारत एनएसजी के लिए तैयार है।
अमेरिकी मदद से मिलेगी एनएसजी में एंट्री?
अमेरिका लगातार एनएसजी में भारत को शामिल किए जाने का समर्थन कर रहा है। चीन के कड़े विरोध के बावजूद अमेरिकी विदेश मंत्रालय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के सहयोगी देशों से यह अपील कर चुका है कि भारत की सदस्यता पर गौर किया जाना चाहिए।
मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान दोनों देशों के संयुक्त बयान में इसे लेकर प्रतिबद्घता भी जताई गई थी। अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन कैरी ने एनएसजी सदस्यों को भारत का समर्थन करने के लिए खत लिखा था।
चीन यह कहते हुए भारत का विरोध कर रहा है कि उसने परमाणु अप्रसार संधि में हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए उसके लिए नियम नहीं बदले जा सकते। चीन का कहना है कि अगर भारत को एनएसजी में जगह दी जा सकती है तो पाकिस्तान को भी इसका हिस्सा बनाना चाहिए।