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सीरिया पर अमेरिका, ब्रिटेन में तनाव?
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 30 Aug 2013 08:52 PM IST
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ब्रिटेन की संसद ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के विरोध में मतदान किया है। इससे अमेरिका में ओबामा प्रशासन सकते में है। ब्रिटेन लगभग हर अंतर्राष्ट्रीय फैसले में अमेरिका का साथ देता है।
सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा का साथ न दे पाने पर ब्रिटेन और अमेरिका के रिश्तों में खटास आ सकती है।
मतदान से पहले ओबामा प्रशासन को पूरा विश्वास था कि प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सामने संसद में चुनौतियाँ आ सकती है और ब्रिटेन किसी भी कार्रवाई में इतनी जल्दी साथ नहीं देगा।
लेकिन अब यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि आमतौर पर अमेरिका का कहना आसानी से मान लेने वाला ब्रिटेन सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप में भाग नहीं लेगा।
एक वरिष्ठ अमेरिका प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि वे ब्रिटेन से परामर्श जारी रखेंगे। अमेरिका ब्रिटेन को अपने करीबी सहयोगियों और दोस्तों में से एक मानता है।
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लेकिन अमेरिका अधिकारी ने यह भी कहा, "राष्ट्रपति ओबामा का फ़ैसला अमेरिका के हित में होगा। उनका मानना है कि इस समय अमेरिका के सबसे जरूरी हित दाँव पर हैं और जिन देशों ने रासायनिक हथियारों के प्रयोग के अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़े हैं उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने की जरुरत है।
'शर्मिंदा ब्रितानी अधिकारी'
उन्होंने कहा, "दूसरे शब्दों में अमरीका इस फ़ैसले पर अकेला ही आगे बढ़ सकता है।"
ब्रिटेन के इस कदम से राष्ट्रपति बराक ओबामा का अपनी जनता को समझाने के प्रयास पर भी फ़र्क पड़ेगा। आखिरी जनमत संग्रह में केवल नौ प्रतिशत लोगों ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के लिए समर्थन किया था
अमरीकी प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, "राष्ट्रपति ओबामा ने हमेशा ज़्यादा से ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय समर्थन चाहा हैं।"
उन्होंने बताया,"मेरा मानना है कि अब फ्रांस, तुर्की और अन्य देशों की भूमिका पर नए सिरे से गौर किया जाएगा।"
साथ ही एक अमरीकी प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी से कहा,"मेरा ख़्याल है कि वाशिंगटन में बहुत से ब्रितानी अधिकारी शर्मिंदा होंगे और अपने अमरीकी समकक्षों को यह दोबारा भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे होंगे कि यह केवल एक वाकया है और इससे हमारे खास रिश्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।"
अगर ब्रिटेन साथ में बना नहीं रह सकता है तो इससे अमरीका में कोई पूछ सकता है कि दोनो देशों के बीच रिश्तों में "खास क्या है"?
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सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा का साथ न दे पाने पर ब्रिटेन और अमेरिका के रिश्तों में खटास आ सकती है।
मतदान से पहले ओबामा प्रशासन को पूरा विश्वास था कि प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सामने संसद में चुनौतियाँ आ सकती है और ब्रिटेन किसी भी कार्रवाई में इतनी जल्दी साथ नहीं देगा।
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लेकिन अब यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि आमतौर पर अमेरिका का कहना आसानी से मान लेने वाला ब्रिटेन सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप में भाग नहीं लेगा।
एक वरिष्ठ अमेरिका प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि वे ब्रिटेन से परामर्श जारी रखेंगे। अमेरिका ब्रिटेन को अपने करीबी सहयोगियों और दोस्तों में से एक मानता है।
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लेकिन अमेरिका अधिकारी ने यह भी कहा, "राष्ट्रपति ओबामा का फ़ैसला अमेरिका के हित में होगा। उनका मानना है कि इस समय अमेरिका के सबसे जरूरी हित दाँव पर हैं और जिन देशों ने रासायनिक हथियारों के प्रयोग के अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़े हैं उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने की जरुरत है।
'शर्मिंदा ब्रितानी अधिकारी'
उन्होंने कहा, "दूसरे शब्दों में अमरीका इस फ़ैसले पर अकेला ही आगे बढ़ सकता है।"
ब्रिटेन के इस कदम से राष्ट्रपति बराक ओबामा का अपनी जनता को समझाने के प्रयास पर भी फ़र्क पड़ेगा। आखिरी जनमत संग्रह में केवल नौ प्रतिशत लोगों ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के लिए समर्थन किया था
अमरीकी प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, "राष्ट्रपति ओबामा ने हमेशा ज़्यादा से ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय समर्थन चाहा हैं।"
उन्होंने बताया,"मेरा मानना है कि अब फ्रांस, तुर्की और अन्य देशों की भूमिका पर नए सिरे से गौर किया जाएगा।"
साथ ही एक अमरीकी प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी से कहा,"मेरा ख़्याल है कि वाशिंगटन में बहुत से ब्रितानी अधिकारी शर्मिंदा होंगे और अपने अमरीकी समकक्षों को यह दोबारा भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे होंगे कि यह केवल एक वाकया है और इससे हमारे खास रिश्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।"
अगर ब्रिटेन साथ में बना नहीं रह सकता है तो इससे अमरीका में कोई पूछ सकता है कि दोनो देशों के बीच रिश्तों में "खास क्या है"?