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अमेरिका का वादा- हर वैश्विक संस्था में दिलाएगा भारत को जगह
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 29 Jun 2016 06:29 PM IST
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अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता एलिजाबेथ टूडो
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भारत और अमेरिका में लगातार बढ़ती दोस्ती के बीच अमेरिका ने कहा है कि वह भारत को विश्व की सभी अहम संस्थाओं में सदस्यता दिलावाने में मदद करेगा। अमेरिका एनएसजी में भी भारत को शामिल कराने की रचनात्मक कोशिश जारी रखेगा।
भारत और अमेरिका के बीच इस बढ़ती दोस्ती से पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रहा है। अभी हाल ही में चीन ने भारत को एमटीसीआर में करने पर अपनी खीझ निकालते हुए भारतीयों को मतलबी और पाखंडी बताया था। एमटीसीआर में चीन को अभी सदस्यता नहीं मिली है।
मिसाइल टेक्नालॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में भारत के प्रवेश का स्वागत करते हुए अमेरिका ने कहा था कि भारत ने परमाणु अप्रसार के मामले में अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। सोमवार को भारत औपचारिक रुप से एमटीसीआर का सदस्य बना था। एमटीसीआर एक वैश्विक संस्था है जो मिसाइलों, पूर्ण रॉकेट सिस्टम, मानव रहित हवाई वाहन और संबंधित टेक्नोलॉजी के प्रसार पर रोक लगाता है।
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भारत और अमेरिका के बीच इस बढ़ती दोस्ती से पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रहा है। अभी हाल ही में चीन ने भारत को एमटीसीआर में करने पर अपनी खीझ निकालते हुए भारतीयों को मतलबी और पाखंडी बताया था। एमटीसीआर में चीन को अभी सदस्यता नहीं मिली है।
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मिसाइल टेक्नालॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में भारत के प्रवेश का स्वागत करते हुए अमेरिका ने कहा था कि भारत ने परमाणु अप्रसार के मामले में अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। सोमवार को भारत औपचारिक रुप से एमटीसीआर का सदस्य बना था। एमटीसीआर एक वैश्विक संस्था है जो मिसाइलों, पूर्ण रॉकेट सिस्टम, मानव रहित हवाई वाहन और संबंधित टेक्नोलॉजी के प्रसार पर रोक लगाता है।
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तो इसलिए चीन ने रोकी थी एनएसजी में भारत की राह
अमेरिका सहित अन्य ताकतवर देश अगर चीन की मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में शामिल करने की शर्त मान लेते तो भारत का परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने का सपना पूरा हो जाता।
दरअसल भारत को एनएसजी की सदस्यता के लिए चले कूटनीतिक दांवपेंच के बीच चीन ने शर्त रखी थी कि वह एमटीसीआर में शामिल करने की शर्त पर ही एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध नहीं करेगा। शर्त ठुकराए जाने पर सियोल में हुई एनएसजी की बैठक में चीन ने भारत की राह रोकने के लिए पहले पाकिस्तान को भी सदस्यता देने और बाद में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों के दावे पर विचार न करने का प्रस्ताव रखा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक चीन ने अमेरिका सहित कई अन्य देशों के सामने भारत को एनएसजी की सदस्यता दिए जाने के बदले खुद को एमटीसीआर में शामिल करने की शर्त रख दी। इसके लिए अमेरिका राजी नहीं हुआ। इसके बाद ही चीन ने भारत को एनएसजी से दूर करने के लिए सारी कूटनीतिक ताकत झोंक दी।
दरअसल भारत को एनएसजी की सदस्यता के लिए चले कूटनीतिक दांवपेंच के बीच चीन ने शर्त रखी थी कि वह एमटीसीआर में शामिल करने की शर्त पर ही एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध नहीं करेगा। शर्त ठुकराए जाने पर सियोल में हुई एनएसजी की बैठक में चीन ने भारत की राह रोकने के लिए पहले पाकिस्तान को भी सदस्यता देने और बाद में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों के दावे पर विचार न करने का प्रस्ताव रखा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक चीन ने अमेरिका सहित कई अन्य देशों के सामने भारत को एनएसजी की सदस्यता दिए जाने के बदले खुद को एमटीसीआर में शामिल करने की शर्त रख दी। इसके लिए अमेरिका राजी नहीं हुआ। इसके बाद ही चीन ने भारत को एनएसजी से दूर करने के लिए सारी कूटनीतिक ताकत झोंक दी।
एनएसजी के लिए अमेरिका जारी रखेगा भारत का समर्थन
बहरहाल अब भारत की सदस्यता के दावे पर इस साल दिसंबर महीने में एनएसजी के सदस्य देशों की विशेष बैठक बुलाने की रणनीति तय की गई है। इस बैठक में भारत के दावे के अलावा एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों को एनएसजी में शामिल किए जाने के लिए नई रूपरेखा तय करने पर विचार विमर्श हो सकता है।
अमेरिका के विदेश विभाग की प्रवक्ता एलिजाबेथ टूडो ने कहा, 'अमेरिका एशिया-पैसफिक इकनाॅमिक कोआॅपरेशन (एपीईसी)' के हित में भारत का हमेशा स्वागत करेगा। हमलोग मजबूती के साथ
बेश्विक संस्थाओं में भारत का समर्थन जारी रखेंगे। 6 साल पहले राष्ट्रपति ओबामा ने पहली बार भारत एनएसजी में शामिल करने पर समर्थन की बात कही थी। अमेरिका तभी से भारत को इसमें जगह दिलाने की कोशिश कर रहा है। भारत का रिकार्ड अच्छा है और वह इसमें शामिल होने के लिए योग्य है।
Published by- Vikrant Singh
अमेरिका के विदेश विभाग की प्रवक्ता एलिजाबेथ टूडो ने कहा, 'अमेरिका एशिया-पैसफिक इकनाॅमिक कोआॅपरेशन (एपीईसी)' के हित में भारत का हमेशा स्वागत करेगा। हमलोग मजबूती के साथ
बेश्विक संस्थाओं में भारत का समर्थन जारी रखेंगे। 6 साल पहले राष्ट्रपति ओबामा ने पहली बार भारत एनएसजी में शामिल करने पर समर्थन की बात कही थी। अमेरिका तभी से भारत को इसमें जगह दिलाने की कोशिश कर रहा है। भारत का रिकार्ड अच्छा है और वह इसमें शामिल होने के लिए योग्य है।
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