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अमेरिकी समाचार पत्र ने लापता पत्रकार जमाल खशोगी का ‘अंतिम कॉलम’ प्रकाशित किया
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 18 Oct 2018 02:45 PM IST
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जमाल खशोगी
- फोटो : ANI
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संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित अखबार वाशिंगटन पोस्ट के वरिष्ठ पत्रकार जमाल खशोगी को लापता हुए दो सप्ताह हो गए हैं और ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने उनका एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें खशोगी ने अरब जगत में स्वतंत्र प्रेस के महत्व पर चर्चा की है। इसे खशोगी का अंतिम लेख माना जा रहा है।
कॉलम में खशोगी ने लिखा, ‘‘ अरब जगत एक प्रकार से अपनी ही बनाई लोहे की दीवार का सामना कर रहा है जो किसी बाहरी ने नहीं बल्कि सत्ता की लालसा रखने वाली आंतरिक ताकतों ने बनाई है।’’
वह आगे लिखते हैं, ‘‘ अरब जगत को पुराने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के नए संस्करण की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को वैश्विक घटनाक्रमों की जानकारी मिल सके। हमें अरब की आवाजों को मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।’’
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खशोगी के कॉलम के साथ उनकी फोटो लगाई गई है और उसकी प्रस्तावना में पोस्ट की ग्लोबल ओपीनियन्स एडिटर कारेन अतिया ने लिखा कि समाचार पत्र ने इस लेख को इस उम्मीद पर रोक कर रखा था कि वह लौट आएंगे।
अतिया ने लिखा है, ‘‘अब मुझे यह स्वीकार करना होगा: यह अब कभी नहीं होगा। उनका यह अंतिम लेख है जो मैं पोस्ट के लिए संपादित करूंगी।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘यह कॉलम अरब जगत में आजादी के लिए उनके जुनून और प्रतिबद्धता को पूरी तरह से दर्शाता है। एक ऐसी आजादी, जिसके लिए स्पष्ट रूप से उन्होंने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी।’’
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कॉलम में खशोगी ने लिखा, ‘‘ अरब जगत एक प्रकार से अपनी ही बनाई लोहे की दीवार का सामना कर रहा है जो किसी बाहरी ने नहीं बल्कि सत्ता की लालसा रखने वाली आंतरिक ताकतों ने बनाई है।’’
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वह आगे लिखते हैं, ‘‘ अरब जगत को पुराने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के नए संस्करण की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को वैश्विक घटनाक्रमों की जानकारी मिल सके। हमें अरब की आवाजों को मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।’’
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खशोगी के कॉलम के साथ उनकी फोटो लगाई गई है और उसकी प्रस्तावना में पोस्ट की ग्लोबल ओपीनियन्स एडिटर कारेन अतिया ने लिखा कि समाचार पत्र ने इस लेख को इस उम्मीद पर रोक कर रखा था कि वह लौट आएंगे।
अतिया ने लिखा है, ‘‘अब मुझे यह स्वीकार करना होगा: यह अब कभी नहीं होगा। उनका यह अंतिम लेख है जो मैं पोस्ट के लिए संपादित करूंगी।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘यह कॉलम अरब जगत में आजादी के लिए उनके जुनून और प्रतिबद्धता को पूरी तरह से दर्शाता है। एक ऐसी आजादी, जिसके लिए स्पष्ट रूप से उन्होंने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी।’’