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ईरान का परमाणु कार्यक्रम टलाः ओबामा
Updated Sun, 24 Nov 2013 12:57 PM IST
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अमेरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि एक समझौते के तहत पहली बार ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोक दिया गया है।
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दुनिया के छह शक्तिशाली देशों और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर हुए इस समझौते का ब्योरा देते हुए ओबामा ने कहा ईरान पर लगे प्रतिबंधों में आंशिक रियायत के एवज में ईरान संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करेगा और अपने परमाणु संयंत्रों को निगरानी के लिए खोलेगा।
पिछले पांच दिनों की वार्ता के बाद इन देशों के विदेश मंत्रियों ने भी इस ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े इस समझौते की पुष्टि की है।
समझौते के बाद जेनेवा में बातचीत के बाद ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ ने कहा कि ईरान के पास यूरेनियम संवर्धित करने का अधिकार है जिसे ख़त्म नहीं किया जा सकता और वह ऐसा करना जारी रखेगा।
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लेकिन अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि इस समझौते में यह बात नहीं है कि ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है।
अमेरिका के व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि शुरुआती छह महीने में ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को सीमित किया जाएगा।
इस बयान के मुताबिक समझौते में यह बात भी शामिल है कि ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता, संवर्धित यूरेनियम के भंडार, इसके सेंट्रीफ्यूज़ की संख्या और अराक रिएक्टर में प्लूटोनियम तैयार करने की क्षमता से जुड़ी गहरी चिंताओं को दूर किया जाएगा।
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अमेरिका का कहना है कि ईरान को जो रियायतें दी जाएगी उससे ज़्यादा पारदर्शिता आएगी और इसके परमाणु कार्यक्रमों की भी निगरानी हो सकेगी।
समझौते का स्वागत
दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने जेनेवा में हुए समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि इस सकारात्मक क़दम से नए रास्ते दिखने लगे हैं।
इस वार्ता का मकसद छह महीने तक के लिए अंतरिम सहमति बनाना था ताकि सभी पक्षों को समग्र निपटारे की बातचीत के लिए वक्त मिल सके।
रूस, अमेरिका, फ़्रांस, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी की यह मांग थी कि तेहरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रमों को बंद करे ताकि इसके बदले उस पर लगे प्रतिबंधों में रियायत दी जा सके।
हालांकि पहले ईरान ने कहा था कि वह किसी भी समझौते में अपने यूरेनियम 'संवर्धन के अधिकार' को नहीं छोड़ेगा।
ईरान के विदेश मंत्री जावेद जारिफ़ ने ट्विटर पर यह घोषणा की है, "हमने समझौता कर लिया।" फ्रांस के विदेश मंत्री लौरा फेबियस ने भी इस समझौते की पुष्टि की है।
इस वार्ता की अगुवाई करने वाली यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख कैथरीन एस्टन के प्रवक्ता ने उनका हवाला देते हुए कहा, "ई3+3 और ईरान के बीच समझौता हो चुका है।"
शनिवार शाम ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा था कि मसौदे के 98 फीसदी पर सहमति बन चुकी है लेकिन तेहरान किसी भी समझौते में अपने संवर्धन के अधिकार का उल्लेख चाहता है।
नए सिरे से प्रतिबंध
ईरानी वार्ताकारों ने कहा था कि दोनों पक्षों ने प्रगति की है। वहीं दूसरी ओर कुछ अमेरिकी नीति निर्माताओं ने कहा था कि अगर वार्ता असफल होती है तो ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
ईरान हमेशा से कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है लेकिन कुछ वैश्विक शक्तियों को संदेह है कि वह परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करना चाह रहा है।
वार्ताकार बुधवार से ही किसी ऐसे नतीजे तक पहुंचने के लिए बातचीत कर रहे थे जो ईरान के साथ ही पी5+1 को स्वीकार हो। पी5+1 में अमेरिका, रूस, चीन, फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल हैं।
अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी और ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग भी इस वार्ता में शामिल होने के लिए जिनेवा पहुंचे।
फ्रांस का रुख
अन्य पश्चिमी देशों के मुकाबले फ़्रांस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख अपनाया था और फ्रांस ने लगातार अपने साथी वार्ताकारों को ज़्यादा समझौता नहीं करने के लिए कहा।
कैथरीन ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जाफरी से संक्षिप्त मुलाकात की थी और इस मुलाकात को ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने "जटिल और मुश्किल" बताया है।