ट्रंप के बचाव में उतरीं पत्नी मेलनिया, कहा- होस्ट ने उकसाया था गंदी बातों के लिए
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महिलाओं के यौन शोषण और महिलाओं के खिलाफ टिप्पणियों वाले पुराने वीडियो सामने आने के बाद निशाने पर आये डोनाल्ड टंप की पत्नी मेलनिया ट्रंप उनके बचाव में आ गई हैं। मेलनिया ने कहा है कि उन्हें शो के होस्ट ने गंदी बातों के लिए उकसाया था और वो ‘ब्वायज टॉक’ कर रहे थे। मेलनिया ने अमेरिका के चैनल सीएनएन को इंटरव्यू में कहा, ‘मुझे अपने पति पर पूरा भरोसा है।’
गौरतलब है कि एक अमेरिकी अखबार ने 2005 का एक वीडिया टेप सार्वजनिक किया था, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप महिलाओं के बारे में अश्लील टिप्पणियां कर रहे हैं। मेलानिया ने चैनल से कहा कि उन्होंने अपने पति को ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते पहले नहीं देखा था।
मेलानिया ने कहा कि उनके पति ऐसे ही बात कर रहे थे जैसे किशोर लड़के आपस में करते हैं। वे ‘ब्वॉयज टॉक’ कर रहे थे। मेलानिया ने दावा किया कि उनके पति ने वीडियो टेप में सामने आए बयान के लिए उनसे माफी मांगी थी।
मेलानिया ने कहा, ‘मैंने उनकी माफी स्वीकार कर ली। मुझे उम्मीद है कि अमेरिकी जनता भी उन्हें माफ कर देगी। और ये बहुत बहुत पहले की बात है। मैं जिस आदमी को जानती हूं वो वैसा नहीं है।’ मेलनिया ने महिलाओं के आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही इस तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं। ये सब राजनीतिक से प्रेरित है।
ट्रंप के अभियान में सिख व्यक्ति को बताया मुस्लिम समर्थक
अमेरिका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के विज्ञापन अभियान में एक सिख व्यक्ति को मुस्लिम व्यक्ति के तौर पर पेश किया गया। दरअसल, ट्रंप के समर्थन में बांटे गये पर्चों में गुरिंदर सिंह खालसा नाम के सिख व्यक्ति को ट्रंप का मुस्लिम समर्थक बता कर प्रचार किया गया। बाद में खुलासा होने पर सिख व्यक्ति ने कहा कि वे मुस्लिम नहीं है और न ही ट्रंप का समर्थक हैँ। इस अभियान से ट्रंप के प्रचार अभियान को धक्का लगा है।
पर्चे में दावा किया गया था-‘खालसा मुस्लिम हैं और ट्रंप के समर्थक हैं।’ एक टीवी को खालसा ने कहा कि वे मुस्लिम नहीं है। किसी ने उससे उसकी तस्वीार लगाने के लिए पूछा नहीं गया। चुनाव प्रचार से उसका कोई लेना देना नहीं है। खालसा भारतीय मूल के हैं और अमेरिका में रह रहे हैं।
वे सिख पॉलिटीकल एक्शन कमेटी के संस्थापक भी हैं जो अमेरिका में सिखों के अधिकारों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सिखों को कट्टरपंथी इस्लामिक समझे जाने की भूल की जाती है और कई बार नफरत के चलते वे निशाना भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था यह बताना चाहती है कि सिख कौन हैं। वे क्यों दाढ़ी रखते हैं और क्यों पगड़ी पहनते हैं।