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3.45 लाख करोड़: अमेरिकी जासूसों का 'काला बजट'

Sun, 01 Sep 2013 01:59 PM IST
Updated Sun, 01 Sep 2013 01:59 PM IST
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america cia nsa spying

अमेरिका से भागे हुए सुरक्षा विशेषज्ञ एडवर्ड स्नोडेन के द्वारा सामने लाए गए कागज़ात से पता चलता है कि अमेरिकी में 3.45 लाख करोड़ रुपयों का बेहिसाब बजट केवल जासूसी के लिए रखा गया है।

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अमेरिकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट को स्नोडेन द्वारा दी गई फ़ाइलों से पता लगता है कि 52।6 अरब डॉलर केवल वित्तीय वर्ष 2013 का बजट है।

यह रकम अमेरिका की 16 अलग-अलग गुप्तचर संस्थाएं मिल कर खर्च करती हैं। इस बजट में सबसे बड़ा हिस्सा सीआईए का है जो करीब 96 हज़ार करोड़ रुपयों के बराबर रकम अकेले खर्च करती है।
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अख़बार के अनुसार इन 16 में से दो एजेंसियां बहुत बड़े पैमाने पर विदेशी कंप्यूटर नेटवर्क्स में घुसपैठ करती हैं।

'टॉप सीक्रेट'

अमेरिका कभी यह नहीं बताता है कि उसने किस संस्था को किस काम के लिए कितने पैसे दिए।

अख़बार ने विस्तार से चार्ट छाप मद वार संस्थाओं का बजट बताया है। अख़बार ने यह ज़रूर कहा है कि उसने अमेरिकीके 'तौर तरीकों' से जुड़े कुछ दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किए हैं।
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अख़बार के मुताबिक़ सीआईए का बजट साल 2004 से अब तक 50 फ़ीसदी बढ़ा है।

अख़बार ने दावा किया है कि अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेन्सी या एनएसए ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 10।8 अरब डॉलर या 70 हज़ार करोड़ रुपयों से ज़्यादा की मांग की है।

एनएसए अमेरिका की इलेक्ट्रॉनिक जासूसी करने वाली संस्था है।

सीआईए तकरीबन पांच अरब डॉलर या 32 हज़ार करोड़ रुपयों से ज़्यादा मानवीय जासूसी पर खर्च करती है। इसमें से करीब 440 करोड़ रुपए तो केवल दुनिया भर में फैले अपने जासूसों को फर्ज़ी पहचान देने में खर्च किए जाते हैं।

निगाह दोस्तों पर भी

दस्तावेजों में बारबार इस बात का ज़िक्र आता है कि चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के आलावा इसरायल को भी अमेरिकी उस प्राथमिकता सूची में रखता है जिनकी जासूसी की जाती है।

अख़बार के अनुसार इन दस्तावेजों में ईरान, रूस और चीन पर जासूसी को भी बेहद कठिन काम बताया है लेकिन सबसे ज़्यादा मुश्किल उत्तरी कोरिया के मामले में पेश आई है। अमरीकी संस्थाओं को उत्तरी कोरिया के परमाणु कार्यक्रम या उसके नेता किम जोंग उन के बारे में कुछ ख़ास नहीं पता लग सका है।

अख़बार के अनुसार अमरीकी खुफिया एजेंसिया पाकिस्तान को जासूसी के लिए एक "कठिन टार्गेट" बताती हैं।

इसरायल अमेरिका का पुराना साथी है, हालांकि इसरायल भी अमेरिका की जासूसी कर रहा है।

अमेरिकी अख़बार का कहना है कि यह सभी एजेंसियां मिल कर दसियों लाख निशानों की जासूसी करती हैं और सैकड़ों घातक हमले भी करती हैं।

पांच मुख्य ध्येय

इन संस्थाओं के पांच मुख्य ध्येय हैं: आतंकवाद से लड़ना, परमाणु और गैर परंपरागत हथियारों से विस्तार को रोकना, अमेरिकी नेताओं को पूरी दुनिया घटने वाली बड़ी घटनाओं की जानकारी देना, विदेशी जासूसों से देश की रक्षा करना और दूसरे देशों की जासूसी करना।


एनएसए ने अब तक इस रिपोर्ट के केवल उस एक पक्ष का खंडन किया है जिसमे कहा गया है कि अख़बारों में स्नोडेन द्वारा अमेरिकी भंडाफोड़ के पहले एनएसए 4000 आतंरिक सुरक्षा में चूक के मामलों की जांच करने का मन बना रहा था।

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