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700 अरब डॉलर के रक्षा बजट पर भी चीन-रूस से जंग हार सकता है अमेरिका
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
Updated Thu, 15 Nov 2018 10:29 AM IST
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अमेरिकी सेना
- फोटो : american army
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पूंजीवाद और आधुनिक हथियारों के बल पर पूरी दुनिया में 700 अरब डॉलर का सबसे बड़ा रक्षा बजट रखने वाला अमेरिका इन दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य संकटों का सामना कर रहा है। यह मानना है अमेरिका के ही संसदीय पैनल का, जिसने चेतावनी दी है कि अमेरिका आगामी दिनों में रूस या चीन के खिलाफ होने वाली जंग को हार भी सकता है। पैनल के मुताबिक अमेरिकी सैन्य ताकत में गिरावट हो रही है क्योंकि न सिर्फ सैन्य सुविधाओं में कटौती हो रही है बल्कि अमेरिकी सेना के बजट में भी कटौती की जा रही है।
अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ ने राष्ट्रीय रक्षा रणनीति आयोग को यह जिम्मेदारी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (एनडीएस) का अध्ययन करे। इसी रिपोर्ट के तहत अमेरिका के संसदीय पैनल ने यह चेतावनी जारी की है। संसदीय पैनल में अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी और सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के दर्जनों पूर्व अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि चीन और रूस के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिऐ योजना बनाने और उनके संचालन के लिए कौशल की जरूरत है लेकिन अमेरिका इसमें कमजोर पड़ रहा है।
बता दें कि ट्रंप की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति मॉस्को और बीजिंग के साथ ताकत पाने की नई होड़ का प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में संसदीय पैनल ने पाया कि एक तरफ जहां अमेरिकी सेना बजट में कटौती का सामना कर रही है और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं में कमी आ रही है, वहीं दूसरी तरफ चीन और रूस जैसे देश अमेरिकी ताकत के साथ संतुलन कायम करने के लिए अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं। पैनल ने सवाल उठाया कि अमेरिका उसके शत्रुओं से मिल रही चुनौतियों से कैसे निपटेगा क्योंकि जंग का जोखिम बढ़ गया है जबकि एशिया व यूरोप के भीतर अमेरिकी प्रभाव कम हुआ है।
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सैन्य श्रेष्ठता व राष्ट्रीय सुरक्षा खतरनाक हद तक खराब हुई
पैनल का कहना है कि अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरनाक स्तर तक खराब हुई है। यही दोनों विशेषताएं अब तक दुनिया में अमेरिकी ताकत का लोहा मनवाती रही हैं। पैनल ने पाया कि इस सदी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर अमेरिका का ध्यान केन्द्रित होने से वह युद्ध के अन्य क्षेत्रों जैसे मिसाइल रक्षा, साइबर और अंतरिक्ष अभियान सहित अन्य क्षेत्रों में पिछड़ रहा है।
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अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ ने राष्ट्रीय रक्षा रणनीति आयोग को यह जिम्मेदारी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (एनडीएस) का अध्ययन करे। इसी रिपोर्ट के तहत अमेरिका के संसदीय पैनल ने यह चेतावनी जारी की है। संसदीय पैनल में अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी और सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के दर्जनों पूर्व अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि चीन और रूस के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिऐ योजना बनाने और उनके संचालन के लिए कौशल की जरूरत है लेकिन अमेरिका इसमें कमजोर पड़ रहा है।
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बता दें कि ट्रंप की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति मॉस्को और बीजिंग के साथ ताकत पाने की नई होड़ का प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में संसदीय पैनल ने पाया कि एक तरफ जहां अमेरिकी सेना बजट में कटौती का सामना कर रही है और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं में कमी आ रही है, वहीं दूसरी तरफ चीन और रूस जैसे देश अमेरिकी ताकत के साथ संतुलन कायम करने के लिए अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं। पैनल ने सवाल उठाया कि अमेरिका उसके शत्रुओं से मिल रही चुनौतियों से कैसे निपटेगा क्योंकि जंग का जोखिम बढ़ गया है जबकि एशिया व यूरोप के भीतर अमेरिकी प्रभाव कम हुआ है।
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सैन्य श्रेष्ठता व राष्ट्रीय सुरक्षा खतरनाक हद तक खराब हुई
पैनल का कहना है कि अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरनाक स्तर तक खराब हुई है। यही दोनों विशेषताएं अब तक दुनिया में अमेरिकी ताकत का लोहा मनवाती रही हैं। पैनल ने पाया कि इस सदी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर अमेरिका का ध्यान केन्द्रित होने से वह युद्ध के अन्य क्षेत्रों जैसे मिसाइल रक्षा, साइबर और अंतरिक्ष अभियान सहित अन्य क्षेत्रों में पिछड़ रहा है।