अमेरिका चुनावः मतदान के वक्त 5 तरह की हैकिंग का डर
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आईटी सिक्योरिटी एक्सपर्टों और अमेरिकी अधिकारियों को भी अब हैकिंग में रूस सरकार का हाथ होने का शक है। हालांकि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने इस बात को खारिज कर दिया है कि वह मंगलवार को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में हस्तक्षेप करने का सामर्थ्य रखते हैं, लेकिन अमेरिका में सुरक्षा अधिकारी इस कवायद में लगे हैं कि किस स्तर पर हैकिंग की आशंका संभव है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने पांच तरह की हैकिंग पर आशंका जताई है -
मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका (संभव लेकिन असर छोड़ने में नाकाम)
समाचार एजेंसियों की मतगणना सूचना में हेराफेरी (खतरा है लेकिन सही परिणाम छुप नहीं सकते)
चुनाव में इंटरनेट कनेक्टिविटी भंग करके (यह बड़ी चिंता का विषय हो सकता है)
वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी (बहुत मुश्किल, लेकिन असंभव नहीं)
बहुत आसान नहीं हैकिंग, लेकिन असंभव भी नहीं
हैकिंग को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसी की चिंता अपनी जगह है लेकिन निर्वाचन विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव में हैकिंग आसान नहीं है। चुनाव प्रक्रिया विशेषज्ञ डेविड बेकर कहते हैं कि निजी ईमेल में या निजी कंपनी के सर्वर को हैक करना चुनाव सिस्टम की हैकिंग से एकदम अलग है।
डेविड बेकर के अनुसार अमेरिका में 50 अलग अलग प्रांत और 10,000 चुनाव अधिकार क्षेत्र हैं, जबकि चुनाव करवाने की जिम्मेदारी शहरों व काउंटी की है। यही नहीं देश के विभिन्न इलाकों में अलग-अलग सिस्टम का उपयोग होता है।
अमेरिका के 80 प्रतिशत मतदाता इलेक्ट्रॉनिक बैलट के स्थान पर पेपर बैलट का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए अमेरिकी चुनाव सिस्टम को हैक करने के लिए साजिश में लाखों लोगों को शामिल करना होगा। हालांकि बेकर मानते हैं कि बहुत से वोटिंग मशीनों की तकनीक आधुनिक नहीं रह गई है और उन्हें बदला जा सकता है।