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अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन पर नए प्रतिबंध लगाए

Fri, 15 Jan 2021 02:01 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 15 Jan 2021 02:01 AM IST
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America imposes new restrictions on China over South China Sea
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर बृहस्पतिवार को उसपर नए प्रतिबंध लगा दिए।

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ये प्रतिबंध आगामी राष्ट्रपति जो बाइडन की चीन के साथ कूटनीति को और मुश्किल कर सकते हैं। उन्हें 20 जनवरी को पदभार संभालना है जिसमें अब एक हफ्ते से भी कम समय है। ट्रंप प्रशासन ने अपने शासन के अंतिम दिनों में चीन के कई अधिकारियों और उनके परिवारों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं।
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विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि हम तब तक कार्रवाई करना जारी रखेंगे जब तक बीजिंग दक्षिण चीन सागर में आक्रामक व्यवहार करना बंद नहीं करता है।

चीन की तेल कंपनी को किया ब्लैकलिस्ट
प्रशासन ने यह भी कहा कि वह चीन की सरकारी तेल कंपनी चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉरपोरेशन को उन कंपनियों की सूची में शामिल कर रहा है जिसके साथ अमेरिकी नागरिक कारोबार नहीं कर सकते। चीन की तेल कंपनी, चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड को दक्षिण चीन सागर में अपने पड़ोसियों को डराने में चीन की मदद करने के लिए अपने आर्थिक ब्लैकलिस्ट में जोड़ा है। बयान में आगे कहा गया है कि दोनों कंपनियों ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को धमकी दी है।
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दक्षिण सागर में ब्रिटेन फ्रांस और जर्मनी के साथ चीन को चित करेंगे अमेरिका-जापान
अमेरिका और जापान ने चीन को चित करने के लिए दुनिया के चार शक्तिशाली देशों से हाथ मिलाया है। समुद्र में  चीन की दादागीरी को खत्म करने के लिए अमेरिका और जापान ने ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली को दक्षिण चीन सागर में आमंत्रित किया है।


यूरोपीय देश 2021 में हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर गंभीर रुख अपनाने वाले हैं। यह क्षेत्र आने वाले समय में इन देशों की सामरिक रणनीति में प्राथमिकता पर होगा। ब्रिटेन विमानवाहक युद्धपोत क्वीन एलिजाबेथ और उसके स्ट्राइक ग्रुप को पूर्वी एशिया में तैनात करेगा। जबकि फ्रांस जापान के पास अपना नौसैनिक युद्धपोत भेजने जा रहा है, जबकि जर्मनी एक फ्रिगेट भेजेगा।

वहीं जर्मनी भी चीन के बढ़ते विस्तारवाद पर लगाम लगाने के लिए हिंद महासागर और आसपास के इलाके में अपनी नौसेना को तैनात करने की योजना बना रहा है।

जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की उत्तराधिकारी समझी जाने वाली विदेश मंत्री अन्नाग्रेट क्रांप ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि दुनिया की भलाई के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में जर्मनी को इस क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ानी होगी।

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