अमेरिका: दम घुटने से हुई थी जॉर्ज फ्लॉयड की मौत, ऑटोप्सी रिपोर्ट में किया गया दावा
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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जूझ रहे अमेरिका में अफ्रीकी मूल के जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों की आंच व्हाइट हाउस तक जा पहुंची है। वहीं जॉर्ज की ऑटोप्सी रिपोर्ट के मुताबिक वह किसी भी बीमारी से पीड़ित नहीं थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जॉर्ज की मौत गर्दन और पीठ पर पड़े दबाव के बाद दम घुटने की वजह से हुई है।
जॉर्ज के परिवार के वकील की ओर से यह दावा किया गया है। ऑटोप्सी रिपोर्ट बनाने वाले एक डॉक्टर ने उन्हें बताया कि फ्लॉयड के मस्तिष्क में रक्त की कमी हो गई थी और गर्दन और पीठ पर दबाव के चलते उसे सांस लेने में मुश्किल हो रही थी। बता दें कि यह रिपोर्ट उस आधिकारिक रिपोर्ट से अलग है जो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के दौरान बनाई गई थी।
पहले की रिपोर्ट में जॉर्ज की मौत की वजह उसका नशीली दवाओं का सेवन करना और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित होना बताया गया था। इसके साथ ही दम घुटने जैसी बात के समर्थन में इस रिपोर्ट में कुछ भी नहीं कहा गया था।
व्हाइट हाउस तक पहुंचे प्रदर्शनकारी
बता दें कि अफ्रीकी मूल के जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों की आंच सोमवार को व्हाइट हाउस तक जा पहुंची। व्हाइट हाउस से कुछ मीटर की दूरी पर मौजूद 200 साल पुराने सेंट जॉन चर्च में आग लगा दी गई। सुरक्षा के तहत राष्ट्रपति ट्रंप को कुछ समय के लिए एक भूमिगत बंकर में छिपाना पड़ गया। हिंसा के चलते अमेरिका के वाशिंगटन डीसी समेत 40 शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा।
अमेरिका में अश्वेत की हत्या के बाद से लगातार छठे दिन विरोध प्रदर्शन जारी रहे। बीते रविवार की रात प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बाहर एकत्रित हो गए थे, उन्होंने पुलिस पर पथराव भी किया। उधर, भारतीय समयानुसार शनिवार देर शाम व्हाइट हाउस के सामने प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कम से कम एक घंटे से कम समय के लिए भूमिगत बंकर में ले जाना पड़ा था।
इस बीच, देश में बढ़ती हिंसा और प्रदर्शनों के चलते करीब 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया, लेकिन लोगों ने इसकी अनदेखी की और सड़कों पर उतरे। इस कारण न्यूयॉर्क, शिकागो, फिलाडेल्फिया और लॉस एंजिलिस जैसे शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधा संघर्ष हुआ। शेर्लोट शहर में 15 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
कई जगहों पर हुई लूट
लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े और काली मिर्च की गोलियों का भी इस्तेमाल करना पड़ा। जबकि प्रदर्शनकारी रुकने का नाम नहीं ले रहे। कई शहरों में दुकानों को लूटा गया और पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी गई। हालातों से निपटने के लिए रिजर्व मिलिट्री द नेशनल गार्ड के पांच हजार जवान वाशिंगटन के अलावा 15 राज्यों में लगाए गए।
हजारों को लिया हिरासत में
वाशिंगटन डीसी में जहां 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, वहीं करीब 17 शहरों से करीब 1,400 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया। जबकि विरोध प्रदर्शन के दौरान 11 पुलिस अधिकारियों के घायल होने की सूचना थी। लगातार बढ़ते हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए देश के 40 बड़े शहरों में पुलिस ने कर्फ्यू का एलान किया गया।
ट्रंप के ट्वीट की आलोचना भी हुई
थाने को आग लगाए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट किया था कि जब लूटिंग शुरू होती है तो शूटिंग भी होती है। उनके इस ट्वीट की काफी आलोचना भी हुई, जिसके बाद ट्विटर ने इसे हाइड करते हुए कहा कि इस ट्वीट में हिंसा की प्रशंसा की गई है और इस तरह यह ट्विटर के नियमों का उल्लंघन है। हालांकि ट्विटर ने ट्रंप के इस ट्वीट को डिलीट नहीं किया।
1886 में बना चर्च आग के हवाले
अमेरिका के मिनेपोलिस शहर में अफ्रीकी मूल के अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हिंसा की आंच 1886 में व्हाइट हाउस के पास बने सेंट जॉन्स चर्च तक भी पहुंची। नाराज प्रदर्शनकारियों ने इस चर्च को आग के हवाले कर दिया। इसे चर्च ऑफ प्रेसिडेंट्स भी कहा जाता है क्योंकि व्हाइट हाउस में रहने वाले राष्ट्रपति यहां आते रहते हैं। चर्च में आग से पहले तोड़फोड़ भी की गई।
हैरान रह गई ट्रंप की टीम
प्रदर्शनकारियों की भीड़ जब व्हाइट हाउस के बाहर आई तब इस भीड़ को पीछे हटाने में सीक्रेट सर्विस और यूनाइटेड स्टेट्स पार्क पुलिस को काफी मशक्कत करना पड़ी। ट्रंप की सुरक्षा में लगी टीम भी हैरान थी कि इतनी बड़ी तादाद में यहां प्रदर्शनकारी कैसे एकत्रित हो गए। ट्रंप को कुछ देर बंकर में ले जाया गया लेकिन यह पता नहीं चला कि मेलानिया और बैरन ट्रंप को भी बंकर में ले जाया गया अथवा नहीं।