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भारतीय को एच-1बी वीजा देने से इनकार, अमेरिकी सरकार पर मुकदमा
Sat, 18 May 2019 05:01 AM IST
Avdhesh Kumar
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sat, 18 May 2019 05:01 AM IST
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अमेरिका की एक आईटी कंपनी ने एक उच्च शिक्षित भारतीय पेशेवर को एच-1बी वीजा देने से इनकार करने पर अमेरिकी सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। कैलिफोर्निया के सिलिकन वैली स्थित कंपनी ने अमेरिकी सरकार के इस फैसले को मनमाना और अधिकारों का दुरुपयोग बताया।
जेट्रा सॉल्यूशंस नाम की कंपनी ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने प्रहर्ष चंद्र साईं वेंकट अनीसेट्टी को अनुचित तरीके से एच-1बी वीजा देने से मना किया। वेंकट को कंपनी में बिजनेस सिस्टम एनालिस्ट के रूप में नियुक्त किया गया था। दरअसल, सरकार ने वेंकट की तरफ से कंपनी के एच-1बी वीजा आवेदन को इस आधार पर खारिज किया कि उन्हें जिस नौकरी की पेशकश की गई थी वह इस वीजा के लिए पात्र नहीं है।
क्योंकि यह वीजा विशेष योग्यता के कार्यों के लिए मिलता है। कंपनी ने जिला अदालत से यूएससीआईएस के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया और कहा कि वीजा आवेदन को खारिज करने के पर्याप्त आधार नहीं दिए गए हैं। इसलिए यह एक मनमाना और बिना सोचा समझा निर्णय है। यह अधिकारों का दुरुपयोग है।
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वेंकट एच-4 वीजा पर रह रहे अमेरिका
वेंकट के पास इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग) में स्नातक की डिग्री और टेक्सास विश्वविद्यालय से सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन में एमएससी की डिग्री है। उनके पास वर्तमान में पत्नी के जरिए वैध एच-4 वीजा है। जबकि उनकी पत्नी के पास एच -1 बी वीजा है।
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जेट्रा सॉल्यूशंस नाम की कंपनी ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने प्रहर्ष चंद्र साईं वेंकट अनीसेट्टी को अनुचित तरीके से एच-1बी वीजा देने से मना किया। वेंकट को कंपनी में बिजनेस सिस्टम एनालिस्ट के रूप में नियुक्त किया गया था। दरअसल, सरकार ने वेंकट की तरफ से कंपनी के एच-1बी वीजा आवेदन को इस आधार पर खारिज किया कि उन्हें जिस नौकरी की पेशकश की गई थी वह इस वीजा के लिए पात्र नहीं है।
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क्योंकि यह वीजा विशेष योग्यता के कार्यों के लिए मिलता है। कंपनी ने जिला अदालत से यूएससीआईएस के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया और कहा कि वीजा आवेदन को खारिज करने के पर्याप्त आधार नहीं दिए गए हैं। इसलिए यह एक मनमाना और बिना सोचा समझा निर्णय है। यह अधिकारों का दुरुपयोग है।
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वेंकट एच-4 वीजा पर रह रहे अमेरिका
वेंकट के पास इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग) में स्नातक की डिग्री और टेक्सास विश्वविद्यालय से सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन में एमएससी की डिग्री है। उनके पास वर्तमान में पत्नी के जरिए वैध एच-4 वीजा है। जबकि उनकी पत्नी के पास एच -1 बी वीजा है।
ट्रंप ने ग्रीन कार्ड की जगह बिल्ड अमेरिका वीजा लाने का प्रस्ताव रखा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने योग्यता एवं अंक आधारित नई आव्रजन नीति पेश कर दी है। इस नीति के तहत मौजूदा ग्रीन कार्ड की जगह ‘बिल्ड अमेरिका’ वीजा लाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस नीति के तहत युवा और उच्च शिक्षित कर्मियों के लिए वीजा आरक्षण 12 फीसदी से बढ़कर 57 हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम से हजारों भारतीय पेशेवरों को लाभ होने की उम्मीद है।
ट्रंप ने कहा, वर्तमान आव्रजन नीति देशभर की शानदार प्रतिभाओं को बरकरार रखने में नाकाम रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि वह योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली का प्रस्ताव रख रहे हैं। इसके तहत स्थायी कानूनी आवास आयु, ज्ञान, रोजगार के अवसर के आधार पर उन लोगों को दिया जाएगा जो नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी समझते हो।
ट्रंप ने कहा, वर्तमान आव्रजन नीति देशभर की शानदार प्रतिभाओं को बरकरार रखने में नाकाम रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि वह योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली का प्रस्ताव रख रहे हैं। इसके तहत स्थायी कानूनी आवास आयु, ज्ञान, रोजगार के अवसर के आधार पर उन लोगों को दिया जाएगा जो नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी समझते हो।
दूरदर्शी नहीं ट्रंप की नई आव्रजन नीति : कमला हैरिस
भारतीय मूल की पहली अमेरिकी सीनेटर कमला हैरिस ने कहा कि ट्रंप की नई आव्रजन नीति दूरदर्शी प्रतीत नहीं होती। लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान एशियाई अमेरिकियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, हमारे देश की संस्कृति की यह खूबसूरती रही है कि जब आप दरवाजे तक आते हैं तो आप सभी बराबर होते हैं। ऐसे में ट्रंप की यह नीति बराबर रखने की जगह अप्रवासियों को पदक्रम के जरिये बांटने वाली साबित होगी, जिससे यह दूरदर्शी नहीं है।
बता दें कि ट्रंप की इस आव्रजन नीति को फिलहाल कांग्रेस की मंजूरी मिलना कठिन लग रहा है क्योंकि डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के सांसद इस मामले पर बंटे हुए हैं। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। ऐसे में इस नीति को मंजूरी मिलना आसान नहीं होगा।
बता दें कि ट्रंप की इस आव्रजन नीति को फिलहाल कांग्रेस की मंजूरी मिलना कठिन लग रहा है क्योंकि डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के सांसद इस मामले पर बंटे हुए हैं। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। ऐसे में इस नीति को मंजूरी मिलना आसान नहीं होगा।