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कनाडा: अमेरिका समेत कई साथी देशों ने ट्रूडो का नहीं दिया साथ, दावा- कोई भी भारत को नाराज नहीं करना चाहता

Wed, 20 Sep 2023 03:24 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओटावा Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 20 Sep 2023 03:24 PM IST
सार

संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने भारत और कनाडा के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि पहले मामले की जांच जरूरी है।

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Allies divided over support for Canada's allegations against India over killing of Sikh separatist leader
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो - फोटो : social media

विस्तार

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में कथित तौर पर भारत के शामिल होने के आरोप पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच, कनाडाई मीडिया से खबर आ रही है कि ओटावा के फाईव आईज ने किसी का भी पक्ष लेने से मना कर दिया है। हालांकि, इनका कहना है कि दावों की गहन जांच होनी चाहिए। 

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गौरतलब है, कनाडा एक फाइव आईज नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। इन्हीं पांचों से मिलकर एक खुफिया गठबंधन बना है।

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कनाडाई मीडिया के अनुसार, कनाडा के सहयोगियों ने ओटावा और नई दिल्ली के बीच बढ़ते विवाद में पड़ने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखाई। बल्कि इन देशों का कहना है कि इस मामले की अभी और गहनता से जांच की जानी चाहिए। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया सभी ने बयान जारी कर आरोपों की जांच की मांग की है। दावा यह भी किया जा रहा है कि कोई भी भारत को नाराज नहीं करना चाहता है।

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रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता एडमिरल जोह किर्बी के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से ये गंभीर आरोप हैं और उनका मानना है कि यह निर्धारित करने के लिए कि पीएम ट्रूडो के आरोप कितने सही हैं, इसके लिए गहन जांच की जरूरत है। इसके साथ ही, किर्बी ने भारत से उस जांच में भाग लेने और सहयोग करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि पता लगाना महत्वपूर्ण है कि वास्तव में क्या हुआ था।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, वहां के विदेश मंत्री पेनी वोंग ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में रिपोर्ट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘ये चिंताजनक रिपोर्ट हैं और जांच अभी भी चल रही है। हम इन घटनाक्रमों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।’

कनाडाई मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया कि कनाडा के सहयोगी ब्रिटेन ने इस मामले में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की। हालांकि वहां के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने भारत का कोई उल्लेख किए बिना सोशल मीडिया पर कहा, 'सभी देशों को संप्रभुता और कानून के शासन का सम्मान करना चाहिए। हम कनाडा की संसद में उठाए गए गंभीर आरोपों के बारे में अपने कनाडाई सहयोगियों के साथ नियमित संपर्क में हैं। यह महत्वपूर्ण है कि कनाडा जांच कर अपराधियों को न्याय के दायरे में लाए।

ओटावा की मीडिया के मुताबिक, ट्रूडो जहां भारत से इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह कर रहे हैं, वहीं लिबरल पार्टी के सदस्यों का यह भी कहना है कि वे उस देश के साथ सामान्य संबंध बनाए रखने की उम्मीद करते हैं, जिसे ओटावा ने हिंद-प्रशांत में एक प्रमुख भागीदार के रूप में चुना है। 

कनाडा ने भारतीय राजनयिक को किया निष्कासित

गौरतलब है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को आरोप लगाए कि निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ हो सकता है। ट्रूडो ने कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों के पास यह मानने के कारण है कि भारत सरकार के एजेंटों ने ही निज्जर की हत्या की है। कनाडाई एजेंसियां निज्जर की हत्या में भारत की साजिश की संभावनाओं की जांच कर रही हैं। ट्रूडो ने यह भी जानकारी दी कि कनाडा से भारत के एक राजनयिक को निष्कासित कर दिया गया है। 

भारत ने किया ट्रूडो पर पलटवार

कनाडा के इन बयानों के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने विरोध जताते हुए कनाडा के उच्चायुक्त को तलब किया। साथ ही उन्हें कनाडा के एक वरिष्ठ उच्चायुक्त को निष्कासित किए जाने की जानकारी दी। निष्कासित राजनयिक को पांच दिन के अंदर भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। भारत ने कनाडा के आरोपों को बेतुका बताते हुए उसे खालिस्तानी गतिविधियों को रोक पाने में असफल करार दिया था। साथ ही मामले में राजनीति का आरोप लगाया था।

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