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रिपोर्ट में खुलासा : दुनिया के सभी अमीर-गरीब देशों पर पड़ रही जलवायु परिवर्तन की मार

Fri, 06 Dec 2019 05:42 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 06 Dec 2019 05:42 AM IST
सार

  • फ्रांस में हुईं हजारों मौतें, फिलीपींस पर भी दिख चुका है असर
  • भारत भी कर चुका है भीषण बाढ़ और दो तूफानों का सामना
  • पर्यावरण थिंकटैंक जर्मनवॉच द्वारा जारी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

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All the rich and poor countries of the world are affected by climate change
जलवायु परिवर्तन - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

जलवायु परिवर्तन धीरे-धीरे दुनिया भर के अमीर और गरीब देशों को भी अपनी चपेट में लेता जा रहा है। इससे होने वाली आपदा से कोई अछूता नहीं रहा है। लेकिन जापान, फिलीपींस, फ्रांस उन शीर्ष देशों में रहे हैं जहां पिछले साल प्रतिकूल मौसम से सबसे अधिक नुकसान हुआ। पर्यावरण थिंकटैक शोधकर्ताओं ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया है कि मैडागास्कर और भारत नुकसान के मामले में इन देशों से ठीक पीछे हैं।

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पर्यावरण थिंकटैंक जर्मनवॉच की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, जापान ने पिछले साल बारिश के बाद बाढ़, दो बार गर्मी और गत 25 साल में सबसे विनाशकारी तूफान का सामना किया। इसकी वजह से पूरे देश में सैकड़ों लोगों की मौत हुई, हजारों लोग बेघर हुए और करीब 35 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। अद्यतन वैश्विक जलवायु खतरा सूचकांक के मुताबिक श्रेणी-5 का मैंगहट तूफान साल का सबसे शक्तिशाली चक्रवाती तूफान रहा जो सितंबर महीने में उत्तरी फिलीपींस से होकर गुजरा।

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फिलीपींस में तूफान से 2.5 लाख लोग विस्थापित

इस तूफान की वजह से करीब ढाई लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा और प्राण घातक भूस्खलन की घटनाएं हुई। जर्मनी को गत वर्ष सबसे अधिक गर्मी की तपिश और सूखे का सामना करना पड़ा और औसत तापमान के करीब तीन डिग्री सेल्सियस से अधिक होने के कारण चार महीनों में 1,250 लोगों की असामयिक मौत हुई और पांच अरब डॉलर का नुकसान हुआ। भारत ने भी 2018 में लू की मार और 100 साल की सबसे भीषण बाढ़ और दो तूफान का सामना किया। इससे कुल 38 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।

जलवायु परिवर्तन से फ्रांस में हजारों की मौत

साल 2018 में मौसम के कारण आई आपदा से साबित हुआ कि सबसे विकसित अर्थव्यवस्था भी प्रकृति की दया पर निर्भर है। जर्मनवॉच की शोधकर्ता लौरा स्किफर ने कहा, ‘विज्ञान ने साबित किया है कि जलवायु परिवर्तन और बार-बार बहने वाली गर्म हवाओं में गहरा संबंध है।’ उन्होंने कहा, ‘यूरोप में सौ साल पहले के मुकाबले गर्म हवाओं के चलने की आशंका 100 गुना तक बढ़ गई है।’ साल 2003 में तपिश की वजह से पश्चिमी यूरोप में खासतौर पर फ्रांस में करीब 70,000 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि गत 20 साल में सबसे गरीब क्षेत्रों पर मौसम की सबसे अधिक मार पड़ी है। 

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