फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Air pollution is affecting the nature of teenagers, increasing stress level

वायु प्रदूषण किशोरों के स्वभाव को भी कर रहा प्रभावित, बढ़ा रहा स्ट्रेस लेवल

Sun, 01 Sep 2019 12:35 PM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च टीम
अमर उजाला रिसर्च टीम Published by: देव कश्यप Updated Sun, 01 Sep 2019 12:35 PM IST
विज्ञापन
सार
  • स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार बढ़ा रहा स्ट्रेस लेवल, चिंता और बना रहा अवसादी-आक्रामक।
  • वे जगहें जहां पीएम 2.5 का स्तर अधिक है, इनमें रह रहे किशोरों में नकारात्मक मानसिक स्थितियां अधिक मिली।
  • विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 10 से 13 शहर तक शामिल।
loader
Air pollution is affecting the nature of teenagers, increasing stress level
युवाओं के लिए खतरा बन रहा वायु प्रदूषण - फोटो : PTI

विस्तार

क्या आपने महसूस किया कि नई पीढ़ी के युवा और खासतौर से किशोर आसानी से और ज्यादा संख्या में निराश होते जा रहे हैं, रिश्तों को बनाए रखने में दिक्कतें पेश आ रही हैं, या वे स्वयं को उपेक्षित अथवा ज्यादा आक्रामक पा रहे हैं? ऐसा वायु प्रदूषण की वजह से भी हो सकता है। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा अमेरिकी साइकोसोमैटिक सोसाइटी के जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है।



इसके अनुसार प्रदूषण का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं हो रहा बल्कि यह किशोरों में चिंताजनक मानसिक स्थितियां पैदा का रहा है। अध्ययनकर्ता जोनस जी मिलर के अनुसार पहले से तनाव से गुजर रहे किशोरों को प्रदूषण स्थितियां और बिगाड़ रहा है। अध्ययन के दौरान किशोरों को शारीरिक व मानसिक परीक्षण से गुजारा गया, उनके हृदय की गति और त्वचा की इलेक्ट्रोडर्मल गतिविधि को मापा गया। उनके रहन-सहन और स्वभाव को लेकर कई प्रश्न भी किए गए। जिन जगहों पर वे रह रहे हैं, वहां के पीएम 2.5 प्रदूषक तत्व के स्तर का रिकॉर्ड अध्ययन में शामिल किया गया।

सामने आया असर

- वे जगहें जहां पीएम 2.5 का स्तर अधिक है, इनमें रह रहे किशोरों में नकारात्मक मानसिक स्थितियां अधिक मिली।
- उनमें चिंता और अवसाद के लक्षण अधिक थे।
- सामाजिक व्यवहार और स्वभाव के मामले में भी वे अधिक असंतुलित मिले।

नाकारात्मक असर

निष्कर्ष में कहा गया कि किशोरों के बढ़ते हुए शरीर और सेहत पर वायु प्रदूषण नकारात्मक असर डाल रहा है। इसकी वजह से उनकी शारीरिक के साथ-साथ मानसिक वृद्धि को भी नुकसान हो रहा है।

और सिफारिशें

- पीएम 2.5 प्रदूषण से किशोरों को बचाने के लिए विशेष जोर दिया जाना चाहिए।
- पहले से अवसाद से गुजर रहे इस उम्र के किशोरों को प्रदूषित स्थानों से दूर रखने का प्रयास किया जाना चाहिए।
- किशोरों के स्वास्थ्य और शिक्षण से संबधित नीतियां बनाते समय प्रदूषण से जुड़े तथ्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

भारत के लिए चेतावनी

एक ओर जहां भारत किशोरों और युवाओं की संख्या के मामले में विश्व का सबसे बड़ा देश माना जा रहा है, वहीं समय-समय पर जारी वायु प्रदूषण के आंकड़ों के अनुसार विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में हमारे 10 से 13 शहर तक शामिल होते हैं। हमारी नई पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर यह वायु प्रदूषण नकारात्मक प्रभाव दिखा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed