अहमद पटेल: कभी मंत्री या मुख्यमंत्री बनने का लालच नहीं रहा, हमेशा बने रहे किंगमेकर
नगर पालिका का चुनाव लड़कर, पंचायत का सभापति बन राजनीति की शुरुआत करने वाले अहमद पटेल 1977 के आम चुनाव में लोकसभा के लिए चुनकर आए। 1980 और 84 में कुल मिलाकर तीन बार लोकसभा सांसद रहे और 1993 से लगातार पांच बार राज्यसभा के लिए चुने गए...
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अहमद पटेल को दी गई शोक संवेदना से उनके व्यक्तित्व से समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके लिखा है कि अहमद पटेल के निधन से दुखी हूं। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई साल बिताए, समाज की सेवा की। उन्हें अपने तेज दिमाग के लिए जाना जाता था। कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका हमेशा याद की जाएगी। प्रधानमंत्री की आखिरी लाइन पर गौर कीजिए। वह लिखते हैं कि अहमद पटेल के बेटे फैजल से बात की और अपनी शोक संवेदना व्यक्त की। अहमद भाई की आत्मा को शांति मिले।
अहमद पटेल को शोक संवेदना देने वालों में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम दूसरे दलों के नेता शामिल हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें अपना सच्चा दोस्त बताया है। अहमद पटेल जीवन भर कांग्रेस संगठन के नेता रहे।
कभी मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बने, बस बनाया
नगर पालिका का चुनाव लड़कर, पंचायत का सभापति बन राजनीति की शुरुआत करने वाले अहमद पटेल ने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1977 के आम चुनाव में लोकसभा के लिए चुनकर आए। 1980 और 84 में कुल मिलाकर तीन बार लोकसभा से सांसद बने। 1993 से लगातार पांच बार राज्यसभा के लिए चुने गए और जीवन भर संगठन के नेता बने रहे। कभी न तो मंत्री बने, न मुख्यमंत्री।
पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव अपने मंत्रिमंडल में लेना चाहते थे, लेकिन अहमद पटेल ने इसे ठुकरा दिया। राजनीति के अपने स्वर्ण काल में किंग मेकर ही बने रहे। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट से लेकर 2009 में कांग्रेस की अधिक सीटें लेकर केंद्र की सत्ता में वापसी और मंत्रिमंडल के गठन में अहमद पटेल की अहम भूमिका रही।
कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी का प्रवेश, उनके लिए संगठन में पद और प्रभाव को बनाए रखने में भी अहमद पटेल की भूमिका रही। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम भी अहमद पटेल के निधन से आहत हैं। एक अन्य केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि दो घोड़ो पर सफलता के साथ सवारी करते भी उन्होंने अहमद पटेल को ही देखा।
मीडिया से प्यार का नाता, दूर का रिश्ता
कभी सोनिया गांधी के पास जाने का रास्ता अहमद पटेल के चेक प्वाइंट से ही होकर गुजरता था। यहां तक कि सोनिया और राहुल गांधी का कॉरिडोर भी कभी अहमद पटेल के सेंट्रल प्वाइंट से गुजरने के बाद अलग होता था। 2005-2014 तक की स्थिति कुछ इसी तरह की थी, लेकिन इसके बाद भी अहमद पटेल तस्वीरों में बमुश्किल नजर आते थे। संसद भवन से लेकर राजनीति के तमाम मोड़ पर फोटोग्राफर, कैमरा मैन से नजरे बचाते रहते थे।
अहमद पटेल ने कभी किसी अपरिचित मीडिया कर्मी को भी इसका अहसास नहीं होने दिया कि वह उसे नहीं जानते। सबसे सामने आने पर स्नेह से मिलना, आत्मीय भाव में रहना उनके स्वभाव में था। लेकिन सारी बातें ऑफ द रिकार्ड होती थीं। साक्षात्कार भी बमुश्किल किसी को दिया हो। उन्हें पर्दे के पीछे रहकर सक्रिय तरीके से कांग्रेस पार्टी को मजबूत आधार देने का प्रयास ही सबसे सही तरीका लगता था।