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अफगानिस्तान को फिर से आतंकवादियों का अड्डा नहीं बनने देंगे : अमेरिका
Tue, 29 Jan 2019 09:30 PM IST
आसिम खान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 29 Jan 2019 09:30 PM IST
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अमेरिका की प्राथमिकता अफगानिस्तान में युद्ध खत्म करने और यह सुनिश्चित करने की है कि गृह युद्ध से बर्बाद हुआ यह देश कभी आतंकवादियों का अड्डा न बने। अमेरिका की तालिबान के साथ वार्ता के बीच व्हाइट हाउस ने यह बयान दिया। इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह खबर दी थी कि अफगानिस्तान में शांति के लिए अमेरिका और तालिबान सैद्धांतिक रूप से समझौते पर पहुंच चुके हैं।
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व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि तालिबान के साथ बातचीत जारी है। ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता युद्ध खत्म करने के साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि आतंकी संगठन वहां दोबारा अपनी जड़े न जमा पाएं। इस बीच, अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक शैनेहन ने कहा कि तालिबान के साथ हुई अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जालमय खलीलजाद की बातचीत उत्साहजनक रही। उन्होंने कहा कि पेंटागन को अफगानिस्तान से पूरी तरह सैनिकों की वापसी के लिए नहीं कहा गया है।
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इससे पहले, खलीलजाद ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा था कि हम तालिबान के साथ शांति वार्ता को लेकर सैद्धांतिक समझौते पर पहुंच चुके हैं, जिनमें कुछ बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। इनमें तालिबान विद्रोहियों को गारंटी देनी होगी कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करें। अफगान सरकार के साथ तालिबान की बातचीत और सीजफायर के बाद ही अफगानिस्तान से पूरी तरह अमेरिकी सेना की वापसी की जाएगी।
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नाटो ने किया स्वागत
नाटो के महासचिव स्टोलनबर्ग ने पेंटागन से कहा कि नाटो अफगानिस्तान में अमेरिका के साथ है। उन्होंने कहा कि हम तालिबान के साथ बातचीत का स्वागत करते हैं। हम भी चाहते हैं कि इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अफगानिस्तान फिर से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह न बने। तालिबान को यह संदेश देना होगा कि वे युद्ध के मैदान पर नहीं जीतेंगे, इसलिए बातचीत ही एकमात्र विकल्प है।