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UAE: गंगा का पवित्र जल और राजस्थान का बलुआ पत्थर, अबु धाबी के हिंदू मंदिर के लिए भारतीय राज्यों ने दिया योगदान
Tue, 13 Feb 2024 01:05 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अबु धाबी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अबु धाबी
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 13 Feb 2024 01:05 PM IST
सार
मंदिर का निर्माण बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा किया गया है। यह मंदिर कुल 27 एकड़ में जमीन पर बना है। मंदिर के सामने वाले हिस्से पर बलुआ पत्थर की पृष्ठभूमि पर उत्कृष्ट संगमरमर की नक्काशी है।
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अबु धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी की 14 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबु धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे। इस मंदिर के निर्माण के लिए भारत के कई क्षेत्रों से योगदान दिया गया है। यूएई के पहले हिंदू मंदिर के लिए भारत से गंगा और यमुना का पवित्र जल, राजस्थान का गुलाबी बलुआ पत्थर और लकड़ी के फर्नीचर का उपयोग किया गया है।
मंदिर के निर्माण में भारत के विभिन्न राज्यों का योगदान
मंदिर के दोनों किनारों पर गंगा और यमुना के पवित्र जल का छिड़काव किया जाएगा। भारत से एक बड़े कंटेनर में इस पवित्र जल को लाया गया है। मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर के किनारे पर एक घाट बनाया गया है, जहां गंगा का पानी बहेगा। मंदिर के प्रमुख वॉलंटियर विशाल पटेल ने कहा, 'इसे वाराणसी के घाट जैसा बनाने का विचार था, जहां पर्यटक बैठकर ध्यान कर सकते हैं। जब पर्यटक इसके अंदर जाएंगे, तो उन्हें पानी की दो धाराएं दिखेंगी। ये धाराएं भारत की गंगा और यमुना को प्रदर्शित करेंगी।'
इस मंदिर का निर्माण बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा किया गया है। यह मंदिर कुल 27 एकड़ में जमीन पर बना है। मंदिर के सामने वाले हिस्से पर बलुआ पत्थर की पृष्ठभूमि पर उत्कृष्ट संगमरमर की नक्काशी है। इसे राजस्थान और गुजरात के कुशल कारीगरों द्वारा 25,000 से अधिक पत्थर के टुकड़ों से तैयार किया गया है। मंदिर के लिए उत्तरी राजस्थान से बड़े पैमाने पर गुलाबी बलुआ पत्थर को अबु धाबी में भेजा गया था। करीब 700 कंटेनरों में दो लाख क्यूबिक फीट का पवित्र पत्थर अबु धाबी लाया गया। मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि पत्थरों को जिस लकड़ी के ट्रंक में लाया गया था, उसका इस्तेमाल मंदिर के लिए फर्नीचर बनाने के लिए किया जाएगा।
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पीएम मोदी करेंगे भारतीय प्रवासियों को संबोधित
मंदिर का निर्माण 2019 में शुरू हुआ था और मंदिर के लिए जमीन यूएई सरकार ने दी थी। पीएम मोदी आज यूएई के लिए रवाना हो चुके हैं। 2015 से यह पीएम मोदी का यूएई का सातवां दौरा है और पिछले आठ महीनों में यह उनका तीसरा दौरा है। मंदिर के उद्घाटन से एक दिन पहले अबु धाबी के जायद स्पोर्ट्स सिटी में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से भी मुलाकात करेंगे।
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मंदिर के निर्माण में भारत के विभिन्न राज्यों का योगदान
मंदिर के दोनों किनारों पर गंगा और यमुना के पवित्र जल का छिड़काव किया जाएगा। भारत से एक बड़े कंटेनर में इस पवित्र जल को लाया गया है। मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर के किनारे पर एक घाट बनाया गया है, जहां गंगा का पानी बहेगा। मंदिर के प्रमुख वॉलंटियर विशाल पटेल ने कहा, 'इसे वाराणसी के घाट जैसा बनाने का विचार था, जहां पर्यटक बैठकर ध्यान कर सकते हैं। जब पर्यटक इसके अंदर जाएंगे, तो उन्हें पानी की दो धाराएं दिखेंगी। ये धाराएं भारत की गंगा और यमुना को प्रदर्शित करेंगी।'
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इस मंदिर का निर्माण बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा किया गया है। यह मंदिर कुल 27 एकड़ में जमीन पर बना है। मंदिर के सामने वाले हिस्से पर बलुआ पत्थर की पृष्ठभूमि पर उत्कृष्ट संगमरमर की नक्काशी है। इसे राजस्थान और गुजरात के कुशल कारीगरों द्वारा 25,000 से अधिक पत्थर के टुकड़ों से तैयार किया गया है। मंदिर के लिए उत्तरी राजस्थान से बड़े पैमाने पर गुलाबी बलुआ पत्थर को अबु धाबी में भेजा गया था। करीब 700 कंटेनरों में दो लाख क्यूबिक फीट का पवित्र पत्थर अबु धाबी लाया गया। मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि पत्थरों को जिस लकड़ी के ट्रंक में लाया गया था, उसका इस्तेमाल मंदिर के लिए फर्नीचर बनाने के लिए किया जाएगा।
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पीएम मोदी करेंगे भारतीय प्रवासियों को संबोधित
मंदिर का निर्माण 2019 में शुरू हुआ था और मंदिर के लिए जमीन यूएई सरकार ने दी थी। पीएम मोदी आज यूएई के लिए रवाना हो चुके हैं। 2015 से यह पीएम मोदी का यूएई का सातवां दौरा है और पिछले आठ महीनों में यह उनका तीसरा दौरा है। मंदिर के उद्घाटन से एक दिन पहले अबु धाबी के जायद स्पोर्ट्स सिटी में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से भी मुलाकात करेंगे।