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USA Abortion Ban: अमेरिका में गर्भपात को लेकर सेक्स स्ट्राइक पर महिलाएं, जानें अबॉर्शन को लेकर कहां कैसे कानून?

Tue, 28 Jun 2022 05:49 PM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Tue, 28 Jun 2022 05:49 PM IST
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सार
अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैन्सी पेलोसिक ने इस फैसले को महिलाओं के चेहरे पर तमाचा बताया है। उन्होंने कहा कि आज रिपब्लिकन-नियंत्रित सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के अपने प्रजनन स्वास्थ्य निर्णय लेने के अधिकार को छीनने का काम किया है। 
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Abortion ban in United States Depends on states explaned
अमेरिका में गर्भपात पर बवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात से जुड़ें 50 साल पुराने 'रो बनाम वेड' फैसले को पलट दिया है। 1973 का फैसला अमेरिका की महिलाओं को गर्भपात कराने का संवैधानिक अधिकार देता था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ अमेरिका उन देशों में शामिल हो गया है जहां गर्भपात को लेकर कड़े कानून हैं। 

हालांकि, कोर्ट ने यह छूट दी है कि अलग-अलग राज्य चाहें तो गर्भपात को लेकर अपना अलग कानून बना सकते है। इस बीच देश में कोर्ट के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। वहीं, अगर दुनिया की बात करें तो गर्भपात किसी भी देश में न तो पूरी तरह प्रतिबंधित है न ही पूरी तरह से इसकी इजाजत है। अलग-अलग देशों में इसे लेकर अलग-अलग कानून हैं। भारत में भी पिछले साल ही इसे लेकर कानून में बदलाव हुआ है। 

ऐसे में आइए जानते हैं कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया है? रो बनाम वेड फैसला क्या था? पुराने आदेश को कोर्ट ने क्यों पलटा? क्या अब अमेरिका में कोई महिला गर्भपात नहीं करा सकेगी? फैसले का विरोध करने वालों का क्या कहना है? फैसले के समर्थकों का क्या कहना है? राजनीतिक दलों का इसे लेकर क्या रुख है? 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया है?
पिछले हफ्ते शुक्रवार को अमेरिका सुप्रीम कोर्ट ने सख्त गर्भपात कानून के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने पांच दशक पुराने उस रो बनाम वेड फैसले को पलट दिया है, जिसमें महिलाओं को गर्भपात का कानूनी अधिकार मिला था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान गर्भपात का अधिकार प्रदान नहीं करता है। 

us women demonstrating against supreme court order
us women demonstrating against supreme court order - फोटो : social media

रो बनाम वेड फैसला क्या था?
ये बात 1969 की है। उस वक्त दो बच्चों की मां नॉर्मा मैककॉर्वी अपना अबॉर्शन कराना चाहती थीं। टेक्सास में रहने वालीं नॉर्मा को उस वक्त का कानून इसकी इजाजत नहीं देता था। इसे लेकर मैककॉर्वी ने फेडरल कोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया कि टेक्सस का गर्भपात कानून असंवैधानिक है। मामले में बचाव पक्ष के तौर पर उस वक्त के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी जनरल हेनरी वेड थे। वहीं, आदालती कार्यवाही में मैककॉर्वी को जेन रो नाम दिया गया। इसी वजह से इस मामले को रो बनाम वेड मामले के नाम से जाना जाता है। इसी मामले में कोर्ट ने महिलाओं को गर्भपात का कानूनी अधिकार दिया था।  

पुराने आदेश को कोर्ट ने क्यों पलटा? 
कोर्ट ने यह फैसला 6-3 के बहुमत से सुनाया है। फैसले का विरोध करने वाले जजों ने लिखा कि ये न्यायालय के लिए दुखद है। उससे भी ज्यादा दुखद उन लाखों महिलाओं के लिए है जिन्होंने आज अपना एक मौलिक संवैधानिक अधिकार खो दिया है। फैसले का समर्थन करने वाले जजों ने कहा कि रो शुरू से ही गलत थीं। उनके तर्क बहुत कमजोर थे। उस फैसले की वजह से काफी नुकसान हो चुका है। इसलिए इसे बदलना जरूरी है।   

क्या अब अमेरिका में कोई महिला गर्भपात नहीं करा सकेगी?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भी अमेरिका में गर्भपात पूरी तरह से गैर कानूनी नहीं होगा। राज्यों अपनी मर्जी के हिसाब से गर्भपात को कानूनी या गैरकानूनी का दर्जा दे सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि जिन राज्यों में रिपब्लिकन सरकारें हैं वहां गर्भपात को अवैध घोषित किया जा सकता है। इनमें अलबामा, जॉर्जिया, इंडियाना समेत 24 राज्य शामिल हैं।

कुछ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन भी कर रहे हैं।
कुछ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन भी कर रहे हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

विरोध प्रदर्शन करने वालों का क्या कहना है?
फैसले का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि कोर्ट का ये फैसला देश की महिलाओं को दोयम दर्जे के नागरिक में बदल देगा। कहा जा रहा है कि इस फैसले का असर अमेरिका की करीब 3.6 करोड़ महिलाओं पर पड़ेगा। फैसले के विरोध में महिलाओं ने सेक्स हड़ताल करने का एलान किया है। गर्भपात को कानूनी वैधता बहाल करने की मांग कर रही महिलाएं पुरुषों से संबंध नहीं बनाने का आह्वान कर रही हैं। महिलाएं अपने इस आंदोलन में पुरुषों से भी सहयोग मांग रही हैं। 

विरोध करने वाले सोशल मीडिया पर #SexStrike और #abstinence ट्रेंड कर रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि हम गर्भावस्था का खतरा नहीं उठा सकती हैं, इसलिए हम किसी भी पुरुष के साथ यौन संबंध नहीं रखेंगे। पति के साथ भी संबंध नहीं बनाएंगे। जब तक हम गर्भवती नहीं होना चाहेंगी, तब तक यौन संबंध नहीं बनाएंगी। 

विरोध सड़कों पर भी हो रहा है। एरिजोना कैपिटल के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। प्रदर्शनकारियों ने सीनेट भवन के शीशे के दरवाजों से धक्कामुक्की शुरू की तो कई सांसद हमले की आशंका से इमारत के तहखाने में जाकर छिप गए।

फैसले के समर्थकों का क्या कहना है?
कोर्ट के फैसले के खिलाफ बढ़ते विरोध के बाद इसके समर्थन  में भी लोग उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर "WE WILL ADOPT YOUR BABY नाम के कैंपने चलाया जा रहा है। कोर्ट के फैसले का समर्थन करने वाले ‘गर्भपात नहीं कराएं, हम आपके बच्चे को गोद ले लेंगे’ के बैनर के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। 

हालांकि, इन समर्थकों को फैसले का विरोध करने वाले यह कहकर जवाब दे रहे हैं कि अमेरिका के अनाथायलों में चार लाख से ज्यादा बच्चे हैं। अगर आप को बच्चे गोद ले सकते हैं तो उन बच्चों को क्यों नहीं गोद ले लेते। 

स्पीकर नैंसी पेलोसी।
स्पीकर नैंसी पेलोसी। - फोटो : सोशल मीडिया

राजनीतिक दलों का इसे लेकर क्या रुख है?
अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैन्सी पेलोसिक ने इस फैसले को महिलाओं के चेहरे पर तमाचा बताया है। उन्होंने कहा कि आज रिपब्लिकन-नियंत्रित सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के अपने प्रजनन स्वास्थ्य निर्णय लेने के अधिकार को छीनने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से अमेरिका की आज की महिलाओं को उनकी मां से कम आजादी मिलेगी। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी रिपब्लिकन स्वास्थ्य स्वतंत्रता का अपराधिकरण करने के अपने धर्मयुद्ध में आगे बढ़ रहे हैं।  

भारत में गर्भपात को लेकर क्या कानून है?
1971 का मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 20 हफ्ते तक की गर्भवती महिला को गर्भपात कराने की इजाजत देता है। 2021 में हुए बदलाव के बाद ये सीमा कुछ विशेष परिस्थितियों में 24 हफ्ते कर दी। हालांकि, ऐसा बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं किया जा सकता है। अगर गर्भ 24 हफ्ते से ज्यादा का है तो पहले एबॉर्शन की अनुमति नहीं थी, पर नए कानून के तहत मेडिकल बोर्ड की रजामंदी पर ऐसा किया जा सकता।

अलग-अलग देशों में गर्भपात को लेकर अलग-अलग कानून।
अलग-अलग देशों में गर्भपात को लेकर अलग-अलग कानून। - फोटो : सोशल मीडिया

दुनिया में कितने देशों में बैन है गर्भपात?
सेंटर फॉर रिप्रोडक्टिव राइट्स के मुताबिक दुनियाभर 24 देशों में गर्भपात कराना गैरकानूनी है। इन देशों में मां बनने के योग्य करीब नौ करोड़ महिलाएं रहती हैं। जिन देशों में गर्भपात पर प्रतिबंध है उनमें सेनेगल, मॉरिटेनिया, मिस्र, लाओस, फिलीपींस, अल सल्वाडोर, होंडुरस, पोलैंड और माल्टा जैसे देश शामिल हैं। 

वहीं, करीब 50 देश ऐसे हैं जहां कई सख्त शर्तों के साथ गर्भपात की अनुमित होती है। लीबिया, इंडोनेशिया, ईरान, वेनेजुएला, नाइजीरिया जैसे देश गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को खतरा होने पर गर्भपात की अनुमति देते हैं। कई देश ऐसे हैं जहां दुष्कर्म, अनाचार या भ्रूण  के विकृत होने की स्थिति में गर्भपात की अनुमति मिलती है।  

किन देशों में आसान है गर्भपात कराना?
यूरोप के ज्यादातर देशों में गर्भधारण के 12-14 हफ्ते तक गर्भपात की अनुमति है। हालांकि, कई देशों में अलग-अलग तरह के अपवाद की स्थित में तय सीमा के बाद भी गर्भपात की अनुमति मिलती है। जैसे- ब्रिटेन में भूण विकृत होने की स्थिति में जन्म से पहले कभी भी गर्भपात की इजाजत है।  

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