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Hiroshima People Missing: जापान परमाणु हमले के 80 साल बाद भी अपनों की तलाश, निनोशिमा में अवशेष तलाश रहे लोग
Mon, 04 Aug 2025 08:50 AM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, निनोशिमा (जापान)।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, निनोशिमा (जापान)।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 04 Aug 2025 08:50 AM IST
सार
अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर आठ दशक पहले परमाणु बम गिराए थे। इस हमले के आठ दशक बीतने के बाद भी यहां के लोगों को अपनों की तलाश है। एक खबर के मुताबिक हमले के 80 साल बीतने के बाद भी निनोशिमा द्वीप पर लोग अपनों के अवशेष तलाश रहे हैं। जानिए क्या है ये अनोखा घटनाक्रम
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जापान में परमाणु हमले के आठ दशक बाद भी लापता लोगों की तलाश (सांकेतिक)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
जापान पर परमाणु हमले के 80 साल बीत चुके हैं। दर्दनाक परमाणु हमले के आठ दशकों के बाद भी यहां रहने वाले लोग अपनों की तलाश कर रहे हैं। एक खबर के मुताबिक हिरोशिमा के करीब बसे निनोशिमा द्वीप पर लोग अपनों के अवशेष की तलाश कर रहे हैं। बता दें कि 6 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर दुनिया में पहली बार परमाणु बम गिराए थे। इस हमले के 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी लोगों की उम्मीदें जिंदा हैं। यहां रहने वाले लोग अपने परिजनों के अवशेषों की तलाश कर रहे हैं।
अपनों के अवशेषों की तलाश कर रहे पीड़ित लोग
जापान के निनोशिमा द्वीप पर रहने वाले लोग हजारों की संख्या में मारे गए थे। अब पीड़ित परिवार अपनों के अवशेषों की तलाश कर रहे हैं। हिरोशिमा से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित निनोशिमा द्वीप 1945 में हुए परमाणु हमले में घायल हुए लोगों की मदद के लिए एक अस्थायी केंद्र की तरह बन गया था। अमेरिका के हमले में जख्मी हुए और जान गंवाने वाले लोगों के शवों को भी निनोशिमा में ही रखा जा रहा था। इस राहत और बचाव कार्य का जिम्मा जापान की नौसेना की टुकड़ी संभाल रही थी।
हताहतों की शिनाख्त मुश्किल, बुरी तरह झुलसे शरीर
खबरों के मुताबिक परमाणु हमला इतना घातक था कि हताहतों की शिनाख्त बहुत मुश्किल थी। जापान की सेना में आत्मघाती मिशनों के लिए प्रशिक्षित किए गए नाविकों ने पीड़ितों के शवों को निनोशिमा लाने में मदद की। पीड़ितों की स्थिति विचलित करने वाली और बेहद भयावह थी। लोगों के शरीर पर जो कपड़े थे वे जल चुके थे, शरीर झुलसने के कारण मांस लटक रहे थे।
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बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने में असफलता, निनोशिमा में दफनाए गए शव
आज से 80 साल पहले चिकित्सा सुविधाओं का अभाव था। इस कारण हमले के करीब तीन हफ्ते बाद यानी 25 अगस्त तक चंद लोगों की ही जान बचाई जा सकी। मृतकों को जल्दबाजी में निनोशिमा में ही अलग-अलग जगहों पर दफना दिया गया।
2018 से अब तक लगभग 100 हड्डियों के टुकड़े खोजने में सफलता
हिरोशिमा परमाणु हमले के 80 साल बीतने के बाद अब 2025 में रोचक जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हिरोशिमा विश्वविद्यालय के शोधकर्ता रेबुन काओ बीते सात साल से मृतकों के अवशेषों की तलाश में खुदाई कर रहे हैं। रेबुन काओ 2018 से अब तक लगभग 100 हड्डियों के टुकड़े खोज चुके हैं, जिनमें एक शिशु का जबड़ा भी शामिल है। निनोशिमा में लापता लोगों के अवशेषों की खोज कर रहे काओ पीड़ितों की पीड़ा महसूस करते हुए उनके सम्मान में फूल चढ़ाकर प्रार्थना भी करते हैं।
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अपनों के अवशेषों की तलाश कर रहे पीड़ित लोग
जापान के निनोशिमा द्वीप पर रहने वाले लोग हजारों की संख्या में मारे गए थे। अब पीड़ित परिवार अपनों के अवशेषों की तलाश कर रहे हैं। हिरोशिमा से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित निनोशिमा द्वीप 1945 में हुए परमाणु हमले में घायल हुए लोगों की मदद के लिए एक अस्थायी केंद्र की तरह बन गया था। अमेरिका के हमले में जख्मी हुए और जान गंवाने वाले लोगों के शवों को भी निनोशिमा में ही रखा जा रहा था। इस राहत और बचाव कार्य का जिम्मा जापान की नौसेना की टुकड़ी संभाल रही थी।
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हताहतों की शिनाख्त मुश्किल, बुरी तरह झुलसे शरीर
खबरों के मुताबिक परमाणु हमला इतना घातक था कि हताहतों की शिनाख्त बहुत मुश्किल थी। जापान की सेना में आत्मघाती मिशनों के लिए प्रशिक्षित किए गए नाविकों ने पीड़ितों के शवों को निनोशिमा लाने में मदद की। पीड़ितों की स्थिति विचलित करने वाली और बेहद भयावह थी। लोगों के शरीर पर जो कपड़े थे वे जल चुके थे, शरीर झुलसने के कारण मांस लटक रहे थे।
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बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने में असफलता, निनोशिमा में दफनाए गए शव
आज से 80 साल पहले चिकित्सा सुविधाओं का अभाव था। इस कारण हमले के करीब तीन हफ्ते बाद यानी 25 अगस्त तक चंद लोगों की ही जान बचाई जा सकी। मृतकों को जल्दबाजी में निनोशिमा में ही अलग-अलग जगहों पर दफना दिया गया।
2018 से अब तक लगभग 100 हड्डियों के टुकड़े खोजने में सफलता
हिरोशिमा परमाणु हमले के 80 साल बीतने के बाद अब 2025 में रोचक जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हिरोशिमा विश्वविद्यालय के शोधकर्ता रेबुन काओ बीते सात साल से मृतकों के अवशेषों की तलाश में खुदाई कर रहे हैं। रेबुन काओ 2018 से अब तक लगभग 100 हड्डियों के टुकड़े खोज चुके हैं, जिनमें एक शिशु का जबड़ा भी शामिल है। निनोशिमा में लापता लोगों के अवशेषों की खोज कर रहे काओ पीड़ितों की पीड़ा महसूस करते हुए उनके सम्मान में फूल चढ़ाकर प्रार्थना भी करते हैं।