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यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला, ग्राहकों को राहत
यूपीआई को लेकर सरकार ने सितंबर 2026 में नए शुल्क ढांचे पर स्थिति स्पष्ट की है। नए फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। सरकार के मुताबिक MDR भुगतान प्रणाली के भीतर व्यापारियों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े पक्षों के बीच लागू होने वाला शुल्क है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Person-to-Person यानी P2P UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा, चाहे लेनदेन की राशि कितनी भी हो। इसी तरह ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। सरकार के अनुसार लगभग 96% P2M UPI लेनदेन इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे।
₹2,000 से अधिक के पात्र व्यापारी लेनदेन पर MDR की दर 0.4% होगी। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन में MDR अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा। वहीं रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
छोटे व्यापारियों को भी राहत दी गई है। UPI QR के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स पर अतिरिक्त भुगतान लागत का असर रोकना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह भुगतान इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं जैसे भागीदारों के बीच वितरित किया जाता है।
जहां तक GST का सवाल है, MDR पर GST को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों के बीच सरकारी और NPCI स्तर पर स्पष्टीकरण सामने आया है। GST की अंतिम स्थिति और उससे जुड़े प्रावधानों पर संबंधित संस्थाओं की चर्चा महत्वपूर्ण होगी। इसलिए इसे ग्राहक से सीधे वसूले जाने वाले UPI चार्ज के रूप में नहीं समझना चाहिए। कुल मिलाकर, नए नियम का असर मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतान पर है। आम ग्राहक के P2P भुगतान और ₹2,000 तक के P2M भुगतान मुफ्त रहेंगे। सरकार का कहना है कि ग्राहकों पर MDR का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए और भुगतान व्यवस्था में इस संबंध में निगरानी की जाएगी।
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