{"_id":"5909b76b4f1c1b0b394413e8","slug":"uma-bharti-birthday-special-story","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हमेशा के लिए ‘रहस्य’ बनकर रह गई उमा भारती की वो ‘शादी वाली बात’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमेशा के लिए ‘रहस्य’ बनकर रह गई उमा भारती की वो ‘शादी वाली बात’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 05 May 2017 08:22 AM IST
विज्ञापन
उमा भारती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उमा भारती की ‘शादी वाली बात’ आज भी रहस्य बनकर रह गई है। ऐसा कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी के उस सिद्धांतकार, विचारक और उमा भारती ने देश व समाज के लिए शादी नहीं की। सवाल ये उठता है कि इन दोनों के प्रेम की बलि से देश और समाज को अब तक क्या लाभ हुआ है? 29 बरसों तक आईबी की सेवा करने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर एम.के. धर ने अपनी किताब ‘ओपन सीक्रेट्स’ में लिखा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विवाह की इजाजत न मिलने के कारण गोविंदाचार्य और उमा भारती को गहरा धक्का लगा, जिससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इन प्रेमियों ने कोई त्याग नहीं किया, बल्कि राजनैतिक महत्वकांक्षाओं के चलते विवाह नहीं कर पाये।
विज्ञापन
पत्नी को बताया कि वह गोविंद से शादी करना चाहती हैं
उमा भारती
अपनी किताब में एम. के. धर लिखते हैं कि उमा भारती ने कई बार उनकी पत्नी को बताया था कि वह गोविंद से शादी करना चाहती हैं और संघ के शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी मिलने के बाद वह संन्यासिन का बाना त्याग देंगी। उन्होंने यह भी लिखा है कि संघ के इस फैसले से उमा भारती मन ही मन दुखी हुईं और गोविंदाचार्य ने मुझे और मेरी पत्नी से कहा कि हम लोग उमा भारती को इस सदमे से बाहर निकालें, लेकिन उमा का दर्द इतना बड़ा था कि वह हमारे समझाने से भी उबर नहीं सकीं। एम. के. धर अपनी किताब में लिखते हैं कि गोविंदाचार्य और उमा भारती अक्सर साथ ही उनके घर पर आते थे। उमा भारती गाड़ी चलाकर गोविंदाचार्य को साथ लाती थीं और हम सब लोग साथ में खाना खाते थे, गपशप भी करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मीडिया के कलेजे को ठंडक पड़ गई होगी
उमा भारती
इसके अलावा 30 जून 2008 को उमा भारती ने भोपाल के रविन्द्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में खुद कहा था कि गोविंदाचार्य उनसे शादी करना चाहते थे। इस शादी का प्रस्ताव स्वयं लालकृष्ण आडवाणी लेकर आए थे , लेकिन उनके बड़े भाई स्वामी प्रसाद लोधी ने गोविंदाचार्य को नापसंद कर दिया था। मंचासीन गोविंदाचार्य के सामने उमा भारती ने कहा था कि इस सभागार में मेरे लिए एक अद्भुत संयोग बन गया है। मेरे जीवन को जिन-जिन लोगों ने संवारा है , वे सब इस सभागार में मौजूद हैं। गोविंदाचार्य से मेरे संबंध रहे हैं। मुझे उनसे मिलने के लिए केदारनाथ जाने की जरूरत नहीं है। मैं उनसे दिल्ली में भी मिलती हूं। वह भोपाल में भी मुझसे मिलते हैं। मेरे यहां आ सकते है, साथ ही यह भी जोड़ा था कि आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कलेजे को ठंडक पड़ गई होगी। उन्होंने आगे कहा था ‘ मैं बताती हूं कि गोविंदजी से मेरी कैसे मुलाकात हुई।
दिल्ली में हुई थी गोविंदाचार्य से मुलाकात
उमा भारती और गोविंदाचार्य
किताब में लिखा है कि उमा ने कहा था कि ‘राजीव गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में 1991 में गोविंद जी से मेरी मुलाकात हुई। बाद में एक दिन आडवाणी जी ने कहा कि गोविंदाचार्य तुमसे विवाह करना चाहते हैं। मैंने यह बात अपने बड़े भाई स्वामी प्रसाद को बताई। उन्होंने कहा कि मैं उसे देखना चाहूंगा। मैं गोविंद जी को लेकर गई। उन्होंने गोविंद जी को देखा तो निराश हुए। इन्हें देखकर कोई भी निराश ही होगा , जो इन्हें जानता न हो। उन्होंने कहा कि तुम्हें यही व्यक्ति मिला। मैंने कहा कि वह बहुत बुद्धिमान हैं। फिर मैंने कहा कि मैं संन्यास लूंगी , यही पक्का निर्णय है। ‘
चिमटा और कमंडल के साथ दिल्ली पहुंचीं
उमा भारती
उमा ने आगे बताया था ‘ मैं अपने गुरुदेव के पास गई। उन्होंने कहा कि मैं 1986 में ही तुम्हारी कुंडली देख चुका हूं और मुझे पता था कि तुम संन्यास लोगी। जब 17 नवंबर 1992 को मैं संन्यास लेकर चिमटा और कमंडल के साथ दिल्ली पहुंची, तो मेरा स्वागत करने के लिए परिवारों के साथ गोविंदाचार्य भी मौजूद थे। उन्होंने मेरे पांव छुए और कहा कि मैं आज से तुम्हें अपना गुरु मानता हूं। उस दिन के बाद से ही गोविंद जी के प्रति मेरे पहले के भाव समाप्त हो गए। ‘ इसके अलावा कहा था कि ‘ डेढ़ साल पहले मुझे पता चला कि गोविंद जी के पास न तो रहने को घर है और न गाड़ी। मुझे बहुत दुख हुआ। मैंने उनसे कहा आप मेरे घर रहिए। आपने मुझे गुरु माना है। यह बात मैंने संगठन को भी बता दी थी। मेरे कहने पर ही गोविंदाचार्य बनारस गए थे। वहां उन्होंने 6 माह तक गहन चिंतन किया।
पूर्व के सभी संबंध खत्म हो गए
उमा भारती
लेखक के अनुसार उमा ने कहा कि ‘इसीलिए मैं कहती हूं कि मुझे गोविंदाचार्य से मिलने केदारनाथ जाने की जरूरत नहीं है। मैं संन्यास लेते वक्त खुद का पिंडदान और तर्पण कर चुकी हूं। पूर्व के सभी संबंध खत्म हो गए। गुरुदेव ने कहा परिवार से संबंध मत रखना। वैसे कोई तो सेवा करेगा , इसलिए परिवार के लोग सेवा कर सकते हैं , लेकिन तुम उन से मोह मत पालना। मेरे बड़े भाई को 1996 से ही ‘ आंय-बांय ‘ बोलने की आदत पड़ी है। वह भावनात्मक रूप से असंतुलित हो गए हैं , लेकिन दिल से बहुत सीधे और भोले हैं। मेरा चिमटा आज भी श्यामला हिल में गड़ा है। जब तक मैं न चाहूं उसे कोई नहीं उखाड़ सकता। ‘
जब उमा ने कही अपने दिल की बात
उमा भारती
इसी तरह 24 मई 2013 को अंग्रेजी पत्रिका द वीक को दिए इंटरव्यू में उमा भारती ने कहा था कि वह पूर्व विचारक गोविंदाचार्य से प्यार करती थीं। इस इंटरव्यू में उमा भारती ने स्वीकार किया था, ‘हां, मैं उन (गोविंदाचार्य) से प्यार करती थी। मैं उनसे शादी भी करना चाहती थी। मैं उनका हर जगह पीछा करती थी और मुझे लगता था कि वह भी मुझसे प्यार करते हैं। हालांकि, उन्होंने मुझे कभी इस बारे में नहीं बताया। लेकिन गोविंदाचार्य ने अपनी भावनाएं बीजेपी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी और संघ के सरसंघचालक रहे भाऊराव देवरस के सामने जाहिर की थीं। इस बारे में भाऊराव ने मुझसे बात की थी और कहा था कि जनता और देश के लिए मुझे शादी नहीं करनी चाहिए। इसलिए मैंने शादी करने का खयाल ही दिल से निकाल दिया।’
उमा को प्रपोज किया था
गोविंदाचार्य
नागपुर में एक अखबार को दिए गए एक इंटरव्यू में गोविंदाचार्य ने माना था कि उन्होंने उमा भारती को शादी के लिए प्रपोज किया था। गोविंदाचार्य ने इस बारे में कहा था, ‘जब आरएसएस के कुछ साथियों ने ऐसे रिश्ते पर हामी भरी तो मैंने उमा भारती को प्रपोज किया था।’ हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात का पछतावा है कि उमा से उनका रिश्ता मूर्त रूप नहीं ले पाया, तो गोविंदाचार्य ने कुछ भी कहने से मना कर दिया था।