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जमीनी कम, जबानी ज्यादा थी सपा की तैयारी
टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Tue, 08 Mar 2016 01:29 AM IST
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एमएलसी चुनाव में सीपी चंद ने जेपी यादव को हरा दिया था।
- फोटो : rajesh kumar
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स्थानीय निकाय एमएलसी चुनाव में बार-बार उम्मीदवार बदलकर भी जीत की बड़ी उम्मीद बांधे जिले के सपा पदाधिकारी जहां हार के कारणों पर मंथन कर रहे हैं वहीं सामने आए परिणाम ने यह साबित कर दिया कि संगठन पदाधिकारियों से लेकर मंत्री तक के सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों का जयप्रकाश यादव (जेपी) के समर्थन में जुटने के दावों का असर इस चुनाव के मतदाताओं तक नहीं पहुंच सका।
हार-जीत के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। जेपी और सीपी के सीधे मुकाबले में वोटों की गिनती के समय किसी भी ब्लाक में सपा को बढ़त नहीं मिल सकी। एमएलसी चुनाव में गोरखपुर-महराजगंज सीट पर उम्मीदवार उतारने को लेकर गैर सपाई प्रमुख विपक्षी दल शुरुआत से लड़खड़ाए रहे तो विपक्ष से चुनौती न होने के बावजूद सपा के लिए यह चुनाव अंतिम वक्त तक चुनौतीपूर्ण बना रहा।
अलबत्ता चुनौतियों की वजह सपा की नीतियां और सपा के अपने ही बने। प्रदेश नेतृत्व जहां उम्मीदवार को लेकर स्थिर नहीं रह सका, वहीं बार-बार हिलती-ढुलती सपा की उम्मीदवार से मतदाता भी पहले कदम से अंत तक सपा के प्रति एक राय पर कायम नहीं रह सके। सपा पदाधिकारियों की भी बात की जाए तो चुनाव की हवा अपनी तरफ करने के लिए जरूरी होमवर्क से ज्यादा दिलचस्पी लखनऊ और वहां बैठे वरिष्ठ नेताओं की नजर में उम्मीदवारी के दोनों दावेदारों की स्थिति जानने में लगाई। मतदाताओं तक पहुंचने के जमीनी काम से अधिक तरजीह चुनाव तैयारी के नाम पर बैठक और समीक्षा को दी गई। इनमें से ज्यादातर बैठकों का अंत इस भरोसे के साथ होता रहा कि जीत तो सत्ताधारी सपा की ही होगी।
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दूसरी तरफ अंतिम तौर पर सपा की तरफ से जयप्रकाश यादव को उम्मीदवार बताने और घोषणा के कुछ वक्त बाद सीपी चंद को पार्टी से बाहर करने के एलान का मतदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। इस स्थिति को भांपकर सीपी चंद के समर्थकों ने जहां एक तरफ निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में सपा के खाते से अपना नाम होने का प्रचार करके सपा समर्पित मतदाताओं को रिझाया, वहीं दूसरे दलों के प्रभाव वाले मतदाताओं के आगे सत्ता की मनमानी की चर्चा करते हुए उम्मीदवारी बदले जाने के सपाई एलान को भी मनमानी की मिसाल की तरह रखा।
इस बीच गैर सपाई दलों के जनप्रतिनिधि भी सपा को जीत से रोकने के नाम पर सीपी चंद के पक्ष में लामबंद होते चले गए। जातीय समीकरण भी बदले। नतीजे में जमीनी कोशिशों से ज्यादा जबानी चर्चाओं तक सीमित सपा नेताओं की जेपी की जीत की योजना भी जबान और चर्चा तक सीमित रह गई। मतगणना का परिदृश्य और जीत का प्रमाण सीपी चंद के हक में आया।
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हार-जीत के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। जेपी और सीपी के सीधे मुकाबले में वोटों की गिनती के समय किसी भी ब्लाक में सपा को बढ़त नहीं मिल सकी। एमएलसी चुनाव में गोरखपुर-महराजगंज सीट पर उम्मीदवार उतारने को लेकर गैर सपाई प्रमुख विपक्षी दल शुरुआत से लड़खड़ाए रहे तो विपक्ष से चुनौती न होने के बावजूद सपा के लिए यह चुनाव अंतिम वक्त तक चुनौतीपूर्ण बना रहा।
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अलबत्ता चुनौतियों की वजह सपा की नीतियां और सपा के अपने ही बने। प्रदेश नेतृत्व जहां उम्मीदवार को लेकर स्थिर नहीं रह सका, वहीं बार-बार हिलती-ढुलती सपा की उम्मीदवार से मतदाता भी पहले कदम से अंत तक सपा के प्रति एक राय पर कायम नहीं रह सके। सपा पदाधिकारियों की भी बात की जाए तो चुनाव की हवा अपनी तरफ करने के लिए जरूरी होमवर्क से ज्यादा दिलचस्पी लखनऊ और वहां बैठे वरिष्ठ नेताओं की नजर में उम्मीदवारी के दोनों दावेदारों की स्थिति जानने में लगाई। मतदाताओं तक पहुंचने के जमीनी काम से अधिक तरजीह चुनाव तैयारी के नाम पर बैठक और समीक्षा को दी गई। इनमें से ज्यादातर बैठकों का अंत इस भरोसे के साथ होता रहा कि जीत तो सत्ताधारी सपा की ही होगी।
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दूसरी तरफ अंतिम तौर पर सपा की तरफ से जयप्रकाश यादव को उम्मीदवार बताने और घोषणा के कुछ वक्त बाद सीपी चंद को पार्टी से बाहर करने के एलान का मतदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। इस स्थिति को भांपकर सीपी चंद के समर्थकों ने जहां एक तरफ निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में सपा के खाते से अपना नाम होने का प्रचार करके सपा समर्पित मतदाताओं को रिझाया, वहीं दूसरे दलों के प्रभाव वाले मतदाताओं के आगे सत्ता की मनमानी की चर्चा करते हुए उम्मीदवारी बदले जाने के सपाई एलान को भी मनमानी की मिसाल की तरह रखा।
इस बीच गैर सपाई दलों के जनप्रतिनिधि भी सपा को जीत से रोकने के नाम पर सीपी चंद के पक्ष में लामबंद होते चले गए। जातीय समीकरण भी बदले। नतीजे में जमीनी कोशिशों से ज्यादा जबानी चर्चाओं तक सीमित सपा नेताओं की जेपी की जीत की योजना भी जबान और चर्चा तक सीमित रह गई। मतगणना का परिदृश्य और जीत का प्रमाण सीपी चंद के हक में आया।