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14 साल वनवास के बाद भाटी को मिली जीत
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहरॉ
Updated Mon, 07 Mar 2016 12:41 AM IST
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चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विधान परिषद सदस्य के चुनाव में नरेंद्र सिंह भाटी की जीत से उनका 14 साल से चला आ रहा वनवास खत्म हो गया। वर्ष 2002 से वह चुनाव लड़ते रहे, लेकिन जीत उनसे दूर रही।
एक बार तो ऐसा लगा कि कहीं राजनीतिक करियर समाप्त ही न हो जाए, लेकिन वह इस बार सपा नेतृत्व की परीक्षा में खरे उतरे। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उन्हें बधाई भी दी है।
गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर को मिलाकर एक विधान परिषद सीट पर 6 मार्च को हुई मतगणना में सपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह भाटी की जीत कई मायने खास रही। उनका मुकाबला सीधे भाजपा प्रत्याशी संजय शर्मा से था, चूंकि नरेंद्र को समय पर प्रत्याशी घोषित कर दिया था, उसका लाभ उन्हें प्रचार करने में मिला।
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शुरू से ही उन्होंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों में पैठ बना ली। भाजपा प्रत्याशी उसमें सेंध लगाने में कामयाब नहीं हुए। नरेंद्र को एक लाभ और मिला कि बसपा, लोकदल और कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा।
सपा मुखिया ने शुरू में ही कह दिया था कि क्षेत्र से हार मिली तो विधायक से लेकर संगठन के पदाधिकारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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एक बार तो ऐसा लगा कि कहीं राजनीतिक करियर समाप्त ही न हो जाए, लेकिन वह इस बार सपा नेतृत्व की परीक्षा में खरे उतरे। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उन्हें बधाई भी दी है।
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गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर को मिलाकर एक विधान परिषद सीट पर 6 मार्च को हुई मतगणना में सपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह भाटी की जीत कई मायने खास रही। उनका मुकाबला सीधे भाजपा प्रत्याशी संजय शर्मा से था, चूंकि नरेंद्र को समय पर प्रत्याशी घोषित कर दिया था, उसका लाभ उन्हें प्रचार करने में मिला।
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शुरू से ही उन्होंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों में पैठ बना ली। भाजपा प्रत्याशी उसमें सेंध लगाने में कामयाब नहीं हुए। नरेंद्र को एक लाभ और मिला कि बसपा, लोकदल और कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा।
सपा मुखिया ने शुरू में ही कह दिया था कि क्षेत्र से हार मिली तो विधायक से लेकर संगठन के पदाधिकारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।