फोन को ‘स्मार्ट’ बनाने वाले सेंसर्स का मतलब क्या है? आइए जानते हैं

हर्षित कुमार 'हर्ष', नोएडा, अमर उजाला
Wed, 11 Apr 2018 04:54 PM IST
Whats is the meanings of sensor in smartphones
smartphone sensors

    आजकल स्मार्टफोन्स तरह-तरह के सेंसर्स से लैस आ रहे हैं, जो फोन में मौजूद डाटा की सुरक्षा के साथ-साथ आपको दिशा दिखाने वाले और वीडियो ऐप्स को और अधिक स्मार्ट और आधुनिक बना देते हैं। किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट में यदि कोई काम अपने आप हो जाता है, तो उसमें सेंसर का हाथ होता है। आपने गौर किया होगा कि जब आप अपने मोबाइल फोन से कॉल करने के बाद उसे अपने कान के पास ले जाते हैं, तो उसकी स्क्रीन अपने आप बंद हो जाती है। दरअसल, इसमें भी सेंसर ही काम करता है। इसी तरह, हमारे मोबाइल फोन में कई तरह के सेंसर इस्तेमाल होते हैं, जो अलग-अलग काम करते हैं। अाज स्मार्टफोन रखना लोगों के लिए आम हो गया है। स्मार्टफोन में लगे कई तरह के सेंसर्स की मदद से विभिन्न प्रकार के ऐप आसानी से काम करते हैं। कुछ महत्वपूर्ण सेंसर हैं, जो लगभग सभी तरह के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होते हैं-

    स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले सेंसर्स का मतलब

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    प्रोक्सिमिटी सेंसर-

    जब कोई वस्तु स्मार्टफोन के समीप होती है, तो यह सेंसर उसकी मौजूदगी का पता लगा लेता है। यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन के ऊपरी हिस्से में फ्रंट कैमरे के पास लगा होता है। आमतौर पर जब आप कॉल आने या कॉल करने के लिए स्मार्टफोन को कान के पास ले जाते हैं, तो यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की लाइट को स्वत: ऑफ कर देता है।

    एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर-

    यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन किस दिशा में घूमा हुआ है, उसके बारे में बताता है। जब भी हम कोई वीडियो स्मार्टफोन में देख रहे होते हैं, तो उसे पोर्ट्रेट मोड की जगह लैंडस्केप मोड में देखना पसंद करते हैं, जिससे कि वीडियो फुल स्क्रीन पर देख सकें। इसके लिए जैसे ही हम स्मार्टफोन को लैंडस्केप मोड में घुमाते हैं, फोन में चल रहे वीडियो का ओरिएंटेशन भी लैंडस्केप हो जाता है। ध्यान रहे, यह सेंसर तभी काम करता है, जब आपने फोन में ऑटो-रोटेशन इनेबल किया हो। इसे एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि स्मार्टफोन में रोटेशन के लिए दो सेंसर्स की जरूरत होती है, जिसमें एक्सीलरोमीटर इसके रेखीय त्वरण को और जाइरोस्कोप इसके घूर्णी कोण की गति को निंयत्रित करता है। एक्सीलरोमीटर सेंसर का इस्तेमाल कई स्वास्थ्य संबंधित ऐप्स के लिए भी किया जाता है।

    डिजिटल कम्पास-

    इसमें मैग्नेटोमीटर सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है, जो जमीन के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार काम करता है। इस सेंसर की मदद से स्मार्टफोन में इंस्टॉल डिजिटल कम्पास सही दिशा के बारे में जानकारी देता है।

    बैरोमीटर-

    यह सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन में इनबिल्ट जीपीएस चिप की मदद से काम करता है। इसकी मदद से ऊंचाई पर त्वरित गति से स्थान को लॉक करके डाटा इकट्ठा किया जा सकता है।

    बायोमैट्रिक सेंसर-

    इसका इस्तेमाल आजकल लगभग सभी तरह के मिड रेंज और हाई रेंज के स्मार्टफोन्स में किया जा रहा है। इसकी मदद से स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट सेंसर इसी सेंसर के जरिए काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में दर्ज किए गए अंगूठे या उंगली को स्कैन करके डाटा इकट्ठा कर लेता है। दूसरी बार, उसी अंगूठे या उंगली को इस सेंसर के पास रखा जाता है, तो वह इसकी जानकारी को इकट्ठा की गई जानकारी मे मिलाकर सही अंगूठे या उंगली की पहचान कर लेता है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की वेबसाइट पर आधार के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले डाटा के लिए बायोमैट्रिक सेंसर्स का इस्तेमाल किया जाता है। बायोमैट्रिक सेंसर में फिंगरप्रिंट के अलावा रेटिना स्कैनर भी आता है, जो फ्रंट कैमरे के साथ जुड़ा होता है। इसकी मदद से स्मार्टफोन के लॉक को रेटिना के स्कैन की मदद से भी लॉक-अनलॉक किया जा सकता है। इसके अलावा, इस सेंसर की मदद से हार्ट रेट को भी मापा जा सकता है, जो कई तरह के हार्ट रेट मापने वाले ऐप के साथ काम करता है।

    एंबिएंट लाइट सेंसर-

    यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की ब्राइटनेस को रोशनी के हिसाब से एडजस्ट तो करता ही है साथ ही डिस्प्ले की ब्राइटनेस को स्वत: कम या ज्यादा करने में भी मदद करता है।

    वर्चुअल रियलिटी सेंसर- वर्चुअल रियलिटी सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन के कैमरे के साथ मिलकर रियलिटी ऐप्स के साथ काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में कैमरा ऐप्स की मदद से एनिमेटेड तस्वीर भी निकाल सकता है, जैसा कि आजकल युवाओं में विभिन्न तरह के एनिमेटेड फेस वाली तस्वीर निकालने का प्रचलन है। यह सेंसर कई तरह के मोबाइल गेम्स खेलने में भी मददगार है।

    जीपीएस सेंसर-

    यह सेंसर आमतौर पर सभी स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाने वाला सेंसर है। जीपीएस का मतलब होता है, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली। इस सेंसर की मदद से डिवाइस की लोकेशन पता करने में मदद मिलती है। यह सेंसर कई तरह के सैटेलाइट के साथ जुड़कर यह बता सकता है कि आप इस समय कहां हैं? यह सेंसर उस समय काम नहीं करता है, जब आप इनडोर या बेसमेंट में हों या फिर आसमान में घने बादल हों, क्योंकि इसे सैटेलाइट से जुड़ने में ये लेयर्स मुश्किलें पैदा करती हैं। साथ ही जीपीएस सेंसर स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी होने पर ही काम करता है यानी अगर आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डाटा बंद होता है, तो यह सेंसर काम नहीं करेगा। जीपीएस सेंसर इंटरनेट डाटा पर काम करता है। यह स्मार्टफोन की बैटरी को जल्दी डिस्चार्ज कर देता है, लेकिन इस सेंसर की मदद से ही कई तरह के मैप्स आपके स्मार्टफोन में काम करते हैं। अगर आपका स्मार्टफोन कहीं गुम हो जाता है, तो जीपीएस ट्रैकर की मदद से ही आपके स्मार्टफोन को तलाशने में मदद मिलती है।

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