बाइंग गाइड: प्रिंटर खरीदने का है प्लान? ये तीन चीजें चेक नहीं की तो हो गाएगी भारी गड़बड़, जान लें ये सीक्रेट्स
Printer buying Guide: डिजिटल दौर में भी हर घर में प्रिंटर की जरूरत पड़ती है, चाहे बच्चों का स्कूल प्रोजेक्ट हो या ऑफिस का कोई जरूरी डॉक्यूमेंट। लेकिन बाजार में सस्ते दाम के चक्कर में लोग अक्सर गलत प्रिंटर खरीद लेते हैं, जिसकी इंक और मेंटेनेंस बाद में जेब पर भारी पड़ती है। अगर आप भी नया प्रिंटर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो पैसे बर्बाद होने से बचाने के लिए ये 3 बातें जरूर जान लें।

विस्तार
आज की दुनिया चाहे कितनी भी डिजिटल क्यों न हो गई हो, लेकिन कागज और प्रिंटआउट की अहमियत कम नहीं हुई है। घर में बच्चों के स्कूल असाइनमेंट से लेकर, ऑफिस की रिपोर्ट्स और सरकारी फॉर्म्स तक प्रिंटर हर घर की जरूरत बन चुका है। बार-बार बाहर जाकर प्रिंट निकलवाना न सिर्फ समय की बर्बादी है, बल्कि लंबे समय में यह जेब पर भी भारी पड़ता है। यही वजह है कि अब लोग घर पर ही प्रिंटर रखना प्रिफर कर रहे हैं।
लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है, जब हम बाजार या ऑनलाइन स्टोर्स पर अनगिनत मॉडल्स देखते हैं। अक्सर लोग सिर्फ 'सस्ता दाम' देखकर प्रिंटर घर ले आते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों में उसकी इंक (स्याही) और मेंटेनेंस का खर्च सिरदर्द बन जाता है। कई बार तो एक पेज की छपाई बाजार रेट से भी महंगी पड़ने लगती है। अगर आप भी नया प्रिंटर खरीदने जा रहे हैं, तो ये 3 बातें जरूर चेक कर लें ताकि आपको बाद में पछताना न पड़े।
1. इंकजेट, इंक टैंक या लेजर: आपकी जरूरत क्या है?
प्रिंटर खरीदते समय सबसे बड़ी गलती उसकी टेक्नोलॉजी को न समझना है। बाजार में मुख्य रूप से तीन तरह के प्रिंटर आते हैं-
कार्ट्रिज वाला इंकजेट प्रिंटर: अगर आपको महीने में बमुश्किल 10-15 पेज ही निकालने होते हैं, तो यह सस्ता प्रिंटर ठीक है। लेकिन इसकी कार्ट्रिज बहुत महंगी आती है और जल्दी खत्म होती है। ज्यादा दिन इस्तेमाल न करने पर इंक सूखने का भी डर रहता है।
इंक टैंक प्रिंटर: अगर घर में कलर और ब्लैक-एंड-व्हाइट दोनों तरह के ढेरों प्रिंट्स (जैसे स्कूल प्रोजेक्ट्स) निकलते हैं, तो इंक टैंक सबसे बेस्ट है। इसमें स्याही की बोतलें डलती हैं, जो काफी सस्ती आती हैं। एक बार रिफिल करने पर आप हजारों पेज आसानी से निकाल सकते हैं।
लेजर प्रिंटर: अगर आपका काम सिर्फ ब्लैक-एंड-व्हाइट डॉक्यूमेंट्स तेजी से प्रिंट करने का है, तो लेजर प्रिंटर से बेहतर और किफायती कुछ नहीं।
2. वायरलेस कनेक्टिविटी (Wi-Fi और मोबाइल प्रिंटिंग)
आजकल हम केबल्स और तारों के झंझट से दूर भागते हैं। ज्यादातर पीडीएफ (PDF), फोटोज और डॉक्यूमेंट्स हमें व्हाट्सएप या ईमेल पर सीधे स्मार्टफोन में मिलते हैं। ऐसे में बिना वायरलेस फीचर वाला प्रिंटर खरीदना समझदारी नहीं है।
नया प्रिंटर लेते समय हमेशा चेक करें कि उसमें इन-बिल्ट वाई-फाई (Wi-Fi), 'वाई-फाई डायरेक्ट' और क्लाउड प्रिंटिंग का सपोर्ट हो। इस फीचर की मदद से आप घर के किसी भी कोने से अपने फोन के जरिए एक क्लिक में प्रिंट कमांड दे सकते हैं। 'वाई-फाई डायरेक्ट' का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर घर में राउटर या इंटरनेट नहीं भी है, तब भी आपका फोन सीधे प्रिंटर से कनेक्ट होकर प्रिंट निकाल सकता है।
3. ऑल-इन-वन फंक्शन और ऑटो-डुप्लेक्स फीचर
प्रिंटर की कीमत से ज्यादा उसकी 'रनिंग कॉस्ट' (प्रति पेज छपाई का खर्च) मायने रखती है। खरीदने से पहले पूछें कि इंक बॉटल कितने की आएगी और उससे कितने पेज छपेंगे। इसके साथ ही, सिर्फ प्रिंट करने वाली मशीन के बजाय ऑल-इन-वन प्रिंटर लें। इसमें प्रिंट, स्कैन और फोटोकॉपी तीनों सुविधाएं होती हैं, जिससे आप घर बैठे ही आधार या पैन कार्ड की कॉपी निकाल सकते हैं।
एक और स्मार्ट फीचर जो आपको जरूर देखना चाहिए, वह है ऑटो-डुप्लेक्स। यह फीचर कागज के दोनों तरफ अपने आप प्रिंट कर देता है। आपको मशीन के पास खड़े होकर पन्ना पलटने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे आपके समय के साथ-साथ 50% कागज की भी बचत होती है।
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