Tech Tips: किचन के लिए चिमनी खरीदते समय इन जरूरी बातों को न करें नजरअंदाज, वरना हो सकता है भारी नुकसान

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Sun, 29 Jun 2025 09:08 PM IST
सार

Chimney Buying Tips For Home:

अगर आप अपने मॉड्यूलर किचन के लिए चिमनी खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। गलत चॉइस न केवल पैसे की बर्बादी है, बल्कि इससे रसोई में धुएं और गंध की समस्या भी बनी रह सकती है।

chimney buying guide for Indian modular kitchen tips
मॉडुलर किचन - फोटो : AI

    विस्तार

    आजकल लोग नए घरों में मॉड्यूलर किचन बनवा रहे हैं। अब किचन मॉडुलर हो तो इमें कई एप्लाइंसेज की भी जरूरत होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए चिमनी का इस्तेमाल अब आम हो गया है। यह न केवल खाना पकाने के दौरान उठने वाले धुएं और तेल के धुएं को बाहर निकालती है, बल्कि रसोई की दीवारों और छत को भी साफ-सुथरा बनाए रखती है। लेकिन अगर इसे बिना सही जानकारी के खरीदा जाए, तो यह परेशानी का सबब भी बन सकती है। आइए जानते हैं आपको किचन के लिए चिमनी खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    रसोई के आकार के अनुसार हो चिमनी का चुनाव

    किचन के साइज के हिसाब से चिमनी की चौड़ाई तय करना बेहद जरूरी है। अगर आपकी रसोई का क्षेत्रफल 60 से 100 वर्ग फुट के बीच है, तो 60 सेंटीमीटर की चिमनी पर्याप्त रहेगी। वहीं, बड़े किचन के लिए 90 सेंटीमीटर या उससे अधिक चौड़ाई वाली चिमनी उपयुक्त रहेगी।

    सक्शन पावर से तय होती है चिमनी की क्षमता

    चिमनी कितनी तेज़ी से धुआं और तेल खींच सकती है, यह उसकी सक्शन पावर पर निर्भर करता है। भारतीय रसोई के लिए 1000 से 1200 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा की सक्शन पावर पर्याप्त मानी जाती है। अधिक तले-भुने खाने वाली किचन के लिए ज्यादा सक्शन पावर वाली चिमनी लेनी चाहिए।

    यह भी पढ़ें: Meta ने OpenAI के तीन सीनियर एक्सपर्ट्स को किया हायर, सैम ऑल्टमैन ने लगाए गंभीर आरोप

    फिल्टर का चुनाव समझदारी से करें

    चिमनियों में तीन प्रकार के फिल्टर होते हैं- बाफल, कैसिट और कार्बन। भारतीय रसोई के लिए बाफल फिल्टर सबसे उपयुक्त माने जाते हैं क्योंकि ये कम मेंटेनेंस वाले होते हैं और अधिक समय तक टिकते हैं।

    डक्टेड बनाम डक्टलेस

    डक्टेड चिमनी धुएं और गंध को पाइप के जरिए बाहर निकालती है, जबकि डक्टलेस चिमनी फिल्टर से हवा को साफ करके उसी कमरे में वापस भेज देती है। दक्षता के लिहाज से डक्टेड चिमनी बेहतर मानी जाती है।

    ऑटो-क्लीन तकनीक दे सकती है बड़ी राहत

    अब बाजार में ऐसी चिमनियां भी उपलब्ध हैं जो ऑटो-क्लीन फीचर से लैस हैं। इनमें जमा तेल खुद-ब-खुद हट जाता है, जिससे बार-बार साफ करने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, ये मॉडल थोड़े महंगे होते हैं लेकिन मेंटेनेंस में किफायती साबित होते हैं।

    यह भी पढ़ें: जुर्म करेगा कोई और… भुगतेंगे आप, ये वेबसाइट बताएगी आपके नाम पर चल रहे कितने फर्जी सिम

    ब्रांड, वारंटी और सर्विस भी हैं अहम

    Faber, Elica, Glen, Kaff और Hindware जैसे ब्रांड्स पर भरोसा करना बेहतर होता है। कम से कम एक साल की वॉरंटी और मोटर पर 5 साल की गारंटी जरूर देखें। इंस्टॉलेशन और सर्विस नेटवर्क की भी जांच कर लें।

    शोर ना बन जाए परेशानी का कारण

    चिमनी का नॉइस लेवल भी जांचना जरूरी है। 58 से 65 डेसिबल तक का शोर सामान्य माना जाता है। इससे ज्यादा आवाज़ वाली चिमनियां किचन का माहौल खराब कर सकती हैं।

    बजट का रखें संतुलन

    बुनियादी फीचर्स वाली चिमनी की कीमत जहां 5,000 से 20,000 रुपए तक होती है, वहीं ऑटो-क्लीन और एडवांस फीचर्स से लैस मॉडल्स की कीमत 25,000 से ऊपर जा सकती है। ज़रूरत और बजट को देखकर सही विकल्प चुनना ही समझदारी है।

    Login or Signup
    अपना शहर चुनें