मुद्दे की बात: ग्राहकों की जेब कट रही, कंपनियों की झोली भर रही, पैसा 30 दिन का तो फिर वैलिडिटी 28 दिन की क्यों

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Sat, 30 Mar 2024 12:31 PM IST
सार

पहले 30 दिनों के प्लान होते थे और अब अधिकतर मासिक प्लान 28 दिनों के हो गए हैं। आमतौर पर कोई महीना 30 दिनों या 31 दिनों का होता है, लेकिन टेलीकॉम कंपनियों के लिए महीना 28 दिनों का होता है। आइए इसके पीछे का गणित समझते हैं...

Why All telecom offering 28 days validity instead of 30 days even after recharge plan prices increased
telecom news - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    इस वक्त देश में तीन ही प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां हैं और इन सभी कंपनियों के प्लान धीरे-धीरे महंगे हो रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्लान की कीमतें तो बढ़ रही हैं, लेकिन प्लान की वैधता नहीं बढ़ रही है। पहले 30 दिनों के प्लान होते थे और अब अधिकतर मासिक प्लान 28 दिनों के हो गए हैं। आमतौर पर कोई महीना 30 दिनों या 31 दिनों का होता है, लेकिन टेलीकॉम कंपनियों के लिए महीना 28 दिनों का होता है। आइए इसके पीछे का गणित समझते हैं...

    ग्राहकों से पैसे लिए जाते हैं 30 दिनों के और रिचार्ज की वैलिडिटी होती है 28 दिनों की। ऐसे में साल में 12 महीनों के लिए ग्राहकों को 13 महीने का रिचार्ज करना पड़ता है और टेलीकॉम कंपनियों की झोली में एक महीने के रिचार्ज के पैसे मुफ्त में जाते हैं। इसकी शुरुआत 2016 हुई टेलीकॉम क्रांति के बाद से हुई थी। उससे पहले 30 दिनों की वैधता मिलती है, हालांकि बीएसएनएल के कई प्लान में अब भी 30 दिनों की वैधता मिलती है।

    यह पूरा का पूरा मार्केटिंग का तरीका है। उदाहरण के तौर पर यदि आप एक महीने में 28 दिन मान लेते हैं तो एक साल में 13 महीने हो जाएंगे। साल में 7 महीने ऐसे होते हैं जो 31 दिनों के होते हैं और चार महीने ऐसे होते हैं जो 30 दिनों के होते हैं। अब प्रति महीने का हिसाब लगाएं तो 31 दिन वाले महीने में से 28 दिनों के हिसाब से (7×3) = 21 दिन होते है। 3 दिनों वाले महीने के हिसाब से प्रति महीने (2×4) = 8 दिन हो जाएंगे। यदि फरवरी 29 दिन का है तो एक दिन और बढ़ जाता है। ऐसे में कुल मिलाकर (21+ 8 +1) = 30 दिन होते हैं और साल में 13 महीने हो जाते हैं।

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