WhatsApp जासूसी कांड: आरोपी कंपनी NSO ने अपनी सफाई में क्या कहा, अबतक क्या-क्या हुआ?

प्रदीप पांडे
बीबीसी हिन्दी, अमर उजालाप्रदीप पांडे
Sat, 02 Nov 2019 05:51 PM IST
Whatsapp Spyware Attack NSO statement and all development till now details here
Whatsapp Spyware Attack - फोटो : amar ujala

    फेसबुक के स्वामित्व वाली मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सएप ने इजराइली कंपनी NSO पर आरोप लगाया है कि उसने अपने स्पाइवेयर 'पेगासस' के जरिए कई लोगों की जासूसी की है। स्पाइवेयर पेगासस के शिकार हुए लोगों में वैश्विक स्तर पर राजनयिक, राजनैतिक विरोधी, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता और वरिष्ठ सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। व्हाट्सएप ने मंगलवार को कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में इजराइल की साइबर इंटेलिजेंस कंपनी NSO ग्रुप के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया। दर्जनों भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस जासूसी के शिकार हुए हैं।

    व्हाट्सएप ने अदालत में क्या कहा?

    whatsapp
    whatsapp - फोटो : whatsapp

    व्हाट्सएप का कहना है कि NSO ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिसके जरिए अज्ञात संस्थानों ने जासूसी के लिए करीब 1,400 लोगों के फोन हैक किए। माना जा रहा है कि चार महाद्वीपों के यूजर्स इस जासूसी के शिकार बने हैं। व्हाट्सएप ने हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया है कि किसके कहने पर पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए। कंपनी ने कहा कि मई में उसे एक ऐसे साइबर हमले का पता चला जिसमें उसकी वीडियो कॉलिंग प्रणाली के जरिए ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोगों को मालवेयर (वायरस) भेजा गया।

    रविशंकर प्रसाद ने क्या कहा?

    केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद
    केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद - फोटो : ANI

    दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक बयान में कहा कि सरकार व्हाट्सएप पर नागरिकों की निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि सरकार, सभी भारतीय नागरिकों की निजता की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस मामले पर व्हाट्सएप से जवाब भी मांगा। सरकार की ओर से व्हाट्सएप से पूछा गया था कि उसने जासूसी के बारे में पहले क्यों नहीं बताया, वहीं व्हाट्सएप ने अपने जवाब में कहा है कि उसने साल 2019 की मई में ही सरकार को इसके बारे में जानकारी दी थी। व्हाट्सएप के इस जवाब में सरकार का कहना है कि मई में उसे व्हाट्सएप से जो जानकारी मिली थी, उसकी भाषा बहुत 'मुश्किल और टेक्निकल' थी।

    NSO ने जवाब में क्या कहा?

    nso group israel
    nso group israel - फोटो : haaretz

    इजराइली साइबर इंटेलिजेंस कंपनी NSO ने अपनी प्रतिक्रिया में खुद पर लगे आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि वह इन आरोपों के खिलाफ मजबूती से मुकाबला करेगी। एनएसओ की तरफ से जारी बयान में लिखा है, "हम कड़े शब्दों में आरोपों का खंडन करते हैं और इनके खिलाफ लड़ेंगे। एनएसओ का एकमात्र उद्देश्य लाइसेंस प्राप्त सरकारी खुफिया और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आतंकवाद और गंभीर अपराध से लड़ने में मदद करने के लिए टेक्नोलॉजी देना है। हमारी तकनीक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन नहीं की गई है और न ही इसकी इजाजत है हमारी तकनीक ने हाल के वर्षों में हजारों लोगों की जान बचाने में मदद की है।"

    NSO पर लोगों की मौत का भी आरोप

    pegasus
    pegasus - फोटो : kaspersky

    स्थानीय मीडिया में कई बार यह चर्चा रही है कि कुछ देशों ने NSO के स्पाइवेयर पिगासस का इस्तेमाल अपने राजनैतिक विरोधियों को मौत के घाट उतारने के लिए भी किया है। फाइनेंसियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया की रवांडा की सरकार ने भी इसका बहुत इस्तेमाल किया। NSO के कर्मचारियों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि उनकी कंपनी ऐसी तकनीक विकसित करती है जो आतंकवाद और संगठित अपराध में संदिग्ध व्यक्तियों के डाटा को इकट्ठा करती है, इसके जरिए सरकारी खुफिया एजेंसियों एजेंसियों को मदद मिलती है। बता दें कि फरवरी में यूरोप की एक प्राइवेट इक्विटी फर्म नोवाल्पिना कैपिटल एलएलपी ने NSO को 100 करोड़ डॉलर में खरीद लिया था, इस तरह NSO इजराइल में तो है लेकिन उसकी मिल्कियत यूरोपीय कंपनी की है।

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