एक महीने में दूरसंचार कंपनियों को दूर करनी होगी ग्राहकों की शिकायतें, मंत्रालय ने जारी किए निर्देश

टेक डेस्क, अमर उजाला
Tue, 24 Jul 2018 04:58 PM IST
Telecom company to solve Complaints of customers in one months says trai
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    दूरसंचार ग्राहकों को अब अपनी शिकायतों के निपटारे के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि सरकार ने इसके लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी है। दूरसंचार कंपनियों को एक माह के भीतर कॉलड्रॉप, बिल, नेटवर्क सहित विभिन्न स्तर की दिक्कतों पर की गई शिकायतों का निपटारा करना होगा। निर्धारित समय में शिकायतों का निपटारा नहीं करने पर कंपनियों को दूरसंचार विभाग के समक्ष लिखित में कारण स्पष्ट करना होगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूरसंचार मंत्रालय को शिकायतों के जल्द निपटारे के सिलसिले में निर्देश दिए थे, जिसके मद्देनजर, मंत्रालय का यह दिशा-निर्देश सामने आया है। मौजूदा समय में शिकायतों का निपटारा करने में कंपनियां दो से छह माह तक का समय लेती हैं और कई बार इससे भी ज्यादा वक्त लगा देती हैं।

    लंबी हो रही शिकायतों की फेहरिस्त

    केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली पर बड़ी तादाद में उपभोक्ताओं की शिकायतें 2-3 महीने से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। इनमें ज्यादातर शिकायतें बिल की कमियां, कॉलड्रॉप या नेटवर्क से संबंधित थीं। इनका निपटारा करने में सेवा प्रदाता कंपनियां लंबा वक्त लेती हैं, ताकि थक-हारकर उपभोक्ता कदम पीछे खींच ले या फिर आगे अपील करे।

    देश में वर्तमान में 121 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं, जबकि लगभग 50 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं। ऐसे में कंपनियों की लापरवाही के चलते शिकायतों की फेहरिस्त लंबी होती चली जाती है। विभाग या फिर दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के पास भी कुछ शिकायतें पहुंचती हैं।

    बढ़ेगी ग्राहकों की सहूलियत

    दूरसंचार विशेषज्ञ बीके सिंघल के मुताबिक, ऐसे में निर्धारित समय में शिकायत के निपटारे का निर्देश ग्राहकों के लिए बहुत सहायक होगा। हर तिमाही एक करोड़ शिकायतें की जाती हैं। इसकी वजह दूरसंचार कंपनियों द्वारा हर वक्त ग्राहकों की तादाद बढ़ाने पर जोर देना है। लुभावने ऑफर देकर वे ग्राहकों से बिल में अनापशनाप पैसा वसूलती हैं। इससे आम उपभोक्ता परेशान हैं और कंपनियां उपभोक्ताओं की शिकायतें सुनने को तैयार नहीं हैं।

    उन्होंने कहा कि कई कंपनियों के ग्राहक सेवा केंद्रों पर फोन करने से पता चलता है कि ग्राहकों की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। सिर्फ रिकॉर्डेड आवाजें आती हैं और ग्राहक सेवा के निस्तारण के लिए अधिकृत व्यक्ति तक साधारण उपभोक्ता पहुंच ही नहीं पाता। ऐसे में एक महीने में शिकायतों के निपटारे का निर्देश मील का पत्थर साबित होगा। जबकि ऐसा नहीं होने पर लिखित में वाजिब कारण स्पष्ट करना होगा।

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