फोटोग्राफिक रायफल : जानिए दुनिया के पहले पोर्टेबल मोशन पिक्चर कैमरा के बारे में

क्या आप जानते हैं कि दुनिया का पहला पोर्टेबल मोशन पिक्चर कैमरा कैसा दिखता है? आप सोचते होंगे कि यह कोई भारी-भरकम खराब सा दिखने वाला मॉडल होगा! लेकिन यह आपकी सोच से कहीं ज्यादा दिलचस्प है।
यह कैमरा एक बंदूक की तरह दिखता है और इसका नाम है, फोटोग्राफी राइफल। इसी कैमरे के अविष्कार के बाद फिल्म इंडस्ट्री में एक नई क्रांति का आगाज हुआ था। फ्रेंच साइंटिस्ट इटाइने जुल्स मारे द्वारा डिजाइन किया गया यह कैमरा साल 1882 में पहली बार सामने आया था।
इस कैमरे को खासतौर पर सूक्ष्म गतिशील दृश्यों को कैमरे में कैद करने के लिए बनाया गया था। इस तरह की फोटोग्राफी को क्रोनो फोटोग्राफी कहा जाता है। साल 2013 में इसे ब्यूने स्थित जुल्स मारे के होमटाउन में इटाने जुल्स मारे म्यूजियम में प्रदर्शनी के लिए रखा गया है।
जुल्स मारे पेशे से एक फिजियोलॉजिस्ट थे। वह एक ऐसा कैमरा बनाना चाहते थे, जिससे पशु, पक्षियों और कीटों की गति का अध्ययन किया जा सके। इस फोटोग्राफिक राइफल की रिकॉर्ड फुटेज क्षमता से इस अध्ययन में काफी मदद मिलती थी।

तस्वीरों को कैद करने के लिए मारे ने बंदूक की बेलनाकार नली के सामने एक प्लेट पर 12 शटर रखे। इस डिस्क के सामने एक दूसरी अपारदर्शी डिस्क रखी गई। इसके बाद उन्होंने बंदूक के पेट पर जिलेटीन प्लेट रखी। ट्रिगर दबाते ही तीनों डिस्क में गति हुई और तसवीर कैमरे में कैद हो गई।
क्या है क्रोनोफोटोग्राफी
क्रोनोफोटोग्राफी, विक्टोरियन काल से चली आ रही फोटोग्राफी की एक तकनीक है। इसे खासतौर पर 1867 से 1868 के दौरान इस्तेमाल किया गया था। यह ऐसी पहली तकनीक थी, जिससे गतिशील तस्वीरों को कैमरे में कैद किया जा सकता था। इसे खासतौर पर गति के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए डिजाइन किया गया था।
- Samsung के इन स्मार्टफोन पर मिल रही है 14,000 रुपये तक की छूट
- WhatsApp ने कबूला, भारत के 121 लोगों को बनाया गया शिकार, 20 के फोन में घुसे हैकर्स
- टेलीग्राम के फाउंडर ने कहा- सार्वजनिक हो जाए आपकी निजी फोटो, उससे पहले WhatsApp करें डिलीट
- एक दिसंबर से कितने महंगे हो जाएंगे सभी कंपनियों के प्लान, यहां देखें संभावित कीमत