बच्चों के डेटा से खिलवाड़ पड़ेगा भारी: एनएचआरसी ने मेटा-व्हाट्सएप को थमाया नोटिस; 15 दिनों में मांगा जवाब
DPDP Act Violation:
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाते हुए मेटा, व्हाट्सएप और कई एआई प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया है। डेटा प्रोटेक्शन कानून (DPDP Act) के उल्लंघन और बच्चों के डेटा की असुरक्षित हैंडलिंग पर आयोग ने सरकार से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

विस्तार
देश में डिजिटल डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। यह कदम डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटक्शन एक्ट (DPDP Act) के कथित उल्लंघनों को लेकर उठाया गया है। यह मामला खासतौर पर बच्चों के डेटा की सुरक्षा से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया है कि कई प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के डेटा ट्रांसफर को ट्रैक करने और शिकायतों के निपटारे के लिए जरूरी सिस्टम मौजूद नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला?
आज के दौर में बच्चे पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक के लिए इंटरनेट और एआई (AI) एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या उनका डेटा सुरक्षित है। एएसआईए (ASIA) नाम के एक थिंक टैंक की एक रिपोर्ट ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया, एआई और एडटेक प्लेटफॉर्म्स बच्चों के डेटा की ट्रैकिंग और उनकी शिकायतों को सुनने के मामले में लापरवाही बरत रहे हैं।
इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अगुवाई वाली बेंच ने मोर्चा खोल दिया है। आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY), शिक्षा मंत्रालय और संचार मंत्रालय को नोटिस जारी कर सफाई मांगी है।

कटघरे में दिग्गज कंपनियां
मानवाधिकार आयोग ने अपनी जांच में पाया कि कई बड़े प्लेटफॉर्म्स 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटक्शन एक्ट' (DPDP Act) के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं। इनमें मेटा और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जेमिनी, ग्रोक और परप्लेक्सिटी जैसे एआई प्लेटफॉर्म्स और खान एकेडमी और माइक्रोसॉफ्ट मैथ सॉल्वर जैसे एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं।
बच्चों के सिम कार्ड पर भी सवाल
आयोग ने यह भी पूछा है कि बच्चों को मोबाइल सिम जारी करने की प्रक्रिया क्या है। देश में नाबालिगों के नाम पर सिम पंजीकरण को लेकर स्पष्ट नियमों और जानकारी की कमी सामने आई है, जिसे लेकर आयोग ने चिंता जताई है। फिलहाल बच्चों के नाम पर सिम कार्ड रजिस्ट्रेशन की जानकारी स्पष्ट नहीं है, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा लूपहोल हो सकता है।
15 दिन में जवाब देने का आदेश
आयोग ने इन कमियों को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए संबंधित संस्थाओं को 15 दिनों के भीतर जवाब देने और सुधार की जानकारी देने का निर्देश दिया है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा को लेकर भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
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क्या कहता है कानून?
भारत में 2023 में डीपीडीपी एक्ट बनाया गया था, जिसके नियम 2025 के अंत में लागू हुए। इसका उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों जैसे संवेदनशील वर्गों को ऑनलाइन खतरों से बचाना है। इस कानून के तहत कुछ प्रावधानों के पालन के लिए समय दिया गया है, लेकिन डेटा निगरानी, सर्वर सुरक्षा और शिकायत निवारण जैसे नियमों को तुरंत लागू करना अनिवार्य है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की बात करें तो यह एक स्वतंत्र संस्था है जिसके पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां होती हैं। इसके सदस्यों का दर्जा सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर होता है।
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