Laptop Import Ban: सरकार ने लैपटॉप के आयात पर लाइसेंसिंग नीति में किया बदलाव, नया ऑनलाइन सिस्टम भी बनाया
सरकार की इस घोषणा से भारत में आईटी कंपनियों को राहत मिलने की संभावना है क्योंकि उन्होंने आयातकों के लिए सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू करने पर चिंता जताई थी। बाजार में बिकने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक ब्रांडों में एचसीएल, सैमसंग, डेल, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, एसर, एप्पल, लेनोवो और एचपी शामिल हैं।

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सरकार ने गुरुवार को लैपटॉप और कंप्यूटर के आयात पर प्रतिबंधों में बदलाव करने की घोषणा की। सरकार का कहना है कि नई आयात प्रबंधन प्रणाली (इंपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) का उद्देश्य बाजार की आपूर्ति को नुकसान पहुंचाए बिना और बोझिल लाइसेंसिंग व्यवस्था बनाए बिना देश में लैपटॉप, टैबलेट और कंप्यूटर के शिपमेंट की निगरानी करना है। बता दें कि सरकार ने अगस्त के अपने आदेश में लैपटॉप आयात पर बैन लगाने की बात कही थी।
सरकार का उद्देश्य आयात की निगरानी करना- डीजीएफटी
विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) संतोष कुमार सरनागी ने कहा कि नई लाइसेंसिंग या आयात प्राधिकरण/प्रबंधन प्रणाली, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगी, का उद्देश्य मुख्य रूप से इन उत्पादों के आयात की निगरानी करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे विश्वसनीय सोर्स से आ रहे हैं। इसके लिए आयात करने वाली कंपनियों को मात्रा और मूल्य की जानकारी देने के बाद केवल 'प्राधिकरण' पर विदेशों से आईटी हार्डवेयर की खेप लाने की अनुमति दी गई है।
बता दें कि विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से अगस्त में एक अधिसूचना जारी की गई थी जिसमें कहा गया है कि लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर और अल्ट्रा-स्मॉल कंप्यूटर और सर्वर के आयात को 31 अक्तूबर से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। यानी 31 अक्तूबर तक दूसरे देश से भारत में लैपटॉप, कंप्यूटर आदि को मंगाया जा सकता है लेकिन उसके बाद नहीं।
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