Drinik Android Trojan: बैंकिंग मैलवेयर फिर से आया वापस, बैंक अकाउंट कर रहा खाली

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Sun, 30 Oct 2022 02:03 PM IST
सार

यह वायरस स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) समेत 27 बैंकों के यूजर्स को अपना निशाना बना रहा है। ड्रिनिक वायरस का यह वर्जन यूजर्स को एक फिशिंग पेज पर ले जाता है और फिर उनका डाटा चुरा लेता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वायरस के क्रिएटर्स ने इसे फुल एंड्राइड बैंकिंग ट्रोजन के रूप में डेवलप किया है।

Drinik Android Trojan back again sbi and all Banking Customers Beware
Drinik Android Trojan - फोटो : iStock

    विस्तार

    यदि आप एंड्रॉयड यूजर्स हैं तो सावधान हो जाइये। Drinik Android ट्रोजन का एक नया वर्जन देखा गया है। यह वर्जन 18 भारतीय बैंकों के यूजर्स को टारगेट कर रहा है। यह वायरस यूजर्स का पर्सनल डाटा और महत्वपूर्ण बैंक डिटेल्स चुरा सकता है। बता दें कि ड्रिनिक ट्रोजन एक पुराना मैलवेयर है, जो 2016 से भारत में सर्कुलेट हो रहा है। इसका इस्तेमाल एसएमएस चोरी करने के लिए किया जाता था, लेकिन सितंबर 2021 में इसमें एक बैंकिंग ट्रोजन भी जोड़ा गया है। भारत सरकार ने इस ट्रोजन को लेकर पहले भी एंड्रॉइड यूजर्स को चेतावनी जारी की थी।

    यह वायरस स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) समेत 27 बैंकों के यूजर्स को अपना निशाना बना रहा है। ड्रिनिक वायरस का यह वर्जन यूजर्स को एक फिशिंग पेज पर ले जाता है और फिर उनका डाटा चुरा लेता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वायरस के क्रिएटर्स ने इसे फुल एंड्राइड बैंकिंग ट्रोजन के रूप में डेवलप किया है।

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    यूजर्स इसे आयकर विभाग के मैनेजमेंट टूल्स के रूप में भी डाउनलोड करते हैं, फिर यह मैलवेयर यूजर्स से एसएमएस पढ़ने, रिसीव करने और सेंड की अनुमति मांगता है। इसके अलावा, यह कॉल लॉग्स और एक्सटर्नल स्टोरेज को एक्सेस करने की अनुमति भी मांगता है, जो यूजर द्वारा परमिशन देते ही गूगल प्ले प्रोटेक्ट को डिसेबल कर देता है।

    ऐसा संदेह है कि ड्रिनिक मैलवेयर का यह वर्जन फिशिंग पेज के बजाय असली आयकर की साइट खोलता है, जिसके बाद यह स्क्रीन रिकॉर्डिंग के माध्यम से सभी डिटेल्स चुरा लेता है, क्योंकि यूजर्स साइट पर पर्सनल डिटेल दर्ज करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूजर्स की स्क्रीन पर एक फेक डायलॉग बॉक्स खुलता है, जिसमें यूजर्स को 57,100 रुपये का रिफंड मिलने की बात भी कही जाती है। रिफंड बटन पर क्लिक करने पर फिशिंग पेज खुल जाता है, जो सभी निजी जानकारी चुरा लेता है।

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    सिर्फ इतना ही नहीं यह वायरस यूजर्स के फोन में इंस्टॉल होने के बाद स्क्रीन रिकॉर्डिंग, की-लॉगिंग, एक्सेसिबिलिटी सर्विसेज और अन्य डिटेल भी चुरा सकता है। नया वर्जन iAssist नामक एपीके के साथ आता है। यह एंड्रॉइड यूजर्स के क्रेडिट कार्ड डिटेस, सीवीवी और पिन भी चुरा सकता है।

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