AI टैलेंट बचाने में जुटा चीन: एक्सपर्ट्स के विदेश जाने पर लगाई पाबंदी; Meta संग अरबों डॉलर की डील भी रद्द
China New AI Policy:
चीन ने अपने एआई विशेषज्ञों के विदेश जानें पर रोक लगा दी है। इस नई नीति के तहत निजी एआई कंपनियों, स्टार्टअप्स और रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को देश छोड़ने से पहले सरकारी मंजूरी लेनी होगी। इसकी वजह चीन की अमेरिका के साथ बढ़ती टेक वॉर को बताया जा रहा है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट...

विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की रेस में आगे निकलने के लिए चीन अब अपने टैलेंट को देश से बाहर जाने से रोक रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन सरकार ने अपने एआई सेक्टर पर निगरानी बहुत ज्यादा बढ़ा दी है। अब अलीबाबा (Alibaba) और डीपसीक (DeepSeek) जैसी प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले अहम एआई पेशेवर बिना सरकारी इजाजत के विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। चीन ने अपनी तकनीकी सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया है। इससे पहले चीनी सरकार कुछ सीनियर रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और बड़े सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं को ही सीमित करती थी।
किन लोगों पर लागू होगा यह नियम?
फिलहाल सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि किस पद या अनुभव वाले लोगों पर यह ट्रैवल बैन लगेगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ किसी के जॉब टाइटल से तय नहीं होगा। अगर कोई व्यक्ति चीन के एआई मिशन के लिए जरूरी है तो उसे इस लिस्ट में शामिल कर लिया जाएगा। यह कदम सरकार के उस पुराने नियम का ही विस्तार है जिसमें कुछ एआई इंजीनियर्स को विदेश जाने से पहले अपने योजना की जानकारी देनी होती थी।
आखिर अचानक ये फैसला क्यों?
इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और चीन के बीच चल रही टैलेंट वॉर है:
मेटा (Meta) की बड़ी डील:
कुछ महीने पहले अमेरिकी कंपनी मेटा ने मानस एआई (Manus AI) नाम के स्टार्टअप को करीब 2.5 अरब डॉलर में खरीदा था।
भारी-भरकम पैकेज:
रिपोर्ट्स बताती हैं कि मेटा ने एआई टैलेंट को अपनी तरफ खींचने के लिए बड़े पैकेज दिए हैं। इनमें दूसरी कंपनियों से एक्सपर्ट्स को अपनी कंपनी में शामिल करने के लिए 100 मिलियन डॉलर तक के साइनिंग बोनस शामिल हैं।
तकनीक चोरी का डर:
चीन को डर है कि उसकी अहम तकनीक और टैलेंट कहीं अमेरिका के हाथ न लग जाए।
एआई और सेमीकंडक्टर की रेस भी है बड़ी वजह
अमेरिका और चीन के बीच एडवांस तकनीक को लेकर जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा चल रही है:
डेटा और तकनीक की सुरक्षा:
चीन नहीं चाहता कि उसके टॉप टैलेंट या तकनीक से जुड़ी कोई भी अहम जानकारी देश से बाहर जाए।
विदेशी निर्भरता कम करना:
चीन की कोशिश है कि वह विदेशी तकनीक पर अपनी निर्भरता कम करे।
स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा:
सरकार अपनी टेक कंपनियों को अमेरिकी हार्डवेयर के बजाय हुआवे (Huawei) जैसी स्वदेशी चिप कंपनियों का इस्तेमाल करने के लिए जोर दे रही है।
मानस एआई (Manus AI) डील रद्द
मेटा के जरिए मानस एआई के 2 अरब डॉलर के अधिग्रहण के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने इस डील को रद्द करने का सख्त आदेश दिया है। इसके चलते अब कंपनी के को-फाउंडर्स इसे संभालने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं।
फिलहाल, को-फाउंडर्स इस सौदे से बाहर निकलने और कंपनी का नियंत्रण वापस पाने के लिए बाहरी निवेशकों से लगभग 1 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस योजना के तहत, वे एक नए फंडिंग राउंड की तैयारी कर रहे हैं। इसका लक्ष्य वही वैल्यूएशन हासिल करना है जो मेटा ने इस अधिग्रहण के लिए तय की थी।
हालांकि, स्थिति गंभीर बनी हुई है। चीनी अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या इस सौदे के दौरान किसी निवेश नियम का उल्लंघन किया गया था। इस सरकारी जांच और दबाव के बीच, अधिकारियों ने मानस एआई के दो को-फाउंडर्स के देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी है।
पाबंदियों का हो सकता है नकारात्मक असर?
ग्लोबल मार्केट में एआई टैलेंट की भारी डिमांड है और बीजिंग की कोशिश है कि वह अपने सर्वश्रेष्ठ दिमागों को देश में ही रोके रखे। हालांकि, जानकारों का मानना है कि लंबे समय में इसका उलटा असर भी हो सकता है। मुमकिन है कि जो चीनी एक्सपर्ट्स विदेश में हैं, वे इन पाबंदियों के डर से वापस लौटना ही न चाहें। इसके अलावा, देश के युवा इंजीनियर भी भविष्य की बंदिशों से बचने के लिए अपने करियर की शुरुआत में ही देश छोड़ने का मन बना सकते हैं।
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