इस खास मैसेजिंग एप का इस्तेमाल कर रहे हैं आतंकवादी, 2G नेटवर्क पर भी तेजी से करता है काम

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Mon, 25 Jan 2021 01:49 PM IST
Terror groups in Pak switch to new messaging apps Which run fast even on 2G Network
Terror groups in Pak using new messaging apps - फोटो : social media

    प्राइवेसी पॉलिसी की बहस के बीच आतंकियों ने भी व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर जैसे मैसेजिंग एप का इस्तेमाल बंद कर दिया है। खबर है कि पाकिस्तान के आतंकवादी एक नए मैसेजिंग एप का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे तुर्की की एक कंपनी ने तैयार किया है। तीन नए मैसेजिंग एप्स के नाम सामने आए हैं जिन्हें आतंकी व्हाट्सएप और मैसेंजर के तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं।

    सेना के अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के बाद जुटाए गए सबूतों और आत्मसमर्पण करने वाले आतंकवादियों द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों की ओर से कट्टरपंथी बनाए जाने की प्रक्रिया की दी गई जानकारी से तीन नए एप के नाम सामने आए हैं, हालांकि सुरक्षा कारणों से एप के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

    सबूतों के आधार पर पुष्टि हुई है कि इनमें से एक एप तुर्की का, एक एप अमेरिका का और एक एप यूरोप का है। आतंकी समूहों द्वारा सबसे ज्यादा तुर्की वाले एप का इस्तेमाल हो रहा है। आतंकियों द्वारा इस्तेमाल होने वाले एप की खासियत यह है कि इन्हें स्लो इंटरनेट पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ये एप 2जी या EDGE नेटवर्क पर आसानी से काम करते हैं। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में हाई-स्पीड 4जी इंटरनेट पर प्रतिबंध है।

    आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी एप को गूगल प्ले-स्टोर या एपल के एप स्टोर से डाउनलोड नहीं किया जा सकता है। इन एप्स की डाउनलोडिंग वेबसाइट से एपीके फाइल के रूप में हो रही है। ये सभी एप एंक्रिप्टेड हैं और इनका एंक्रिप्शन-डीक्रिप्शन डिवाइस में ही हो रहा है। ऐसे में मैसेज के लिए क्लाउड का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इन एप में एंक्रिप्शन एल्गोरिदम RSA-2048 का इस्तेमाल हो रहा जिसे सबसे अधिक सिक्योर बना जाता है।

    बता दें कि RSA एक अमेरिकन नेटवर्क सिक्योरिटी और ऑथेंटिकेशन कंपनी है जिसकी स्थापना 1982 में हुआ था। इस सिक्योरिटी एल्गोरिदम का इस्तेमाल क्रिप्टोसिस्टम में बड़े स्तर पर होता है। इनमें से एक मैसेजिंग एप ऐसा है जिसे इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी की जरूरत ही नहीं पड़ती है। ऐसे में मैसेज करने वाले को ट्रैक करना काफी मुश्किल हो जाता है। इन एप्स में वर्चुअल सिम कार्ड का इस्तेमाल होता है, हालांकि ऐसे एप्स को अब घाटी में ब्लॉक करने का काम शुरू हो गया है।

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