डोपिंग में फंसे पहलवान नरसिंह यादव, बंद नहीं हुए रियो ओलंपिक के दरवाजे
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हालांकि नरसिंह ने नाडा के समक्ष चल रही सुनवाई में खुद को साजिश के तहत फंसाने की बात कही है। नरसिंह कैंप से यह भी कहा जा रहा है कि यदि नाडा की सुनवाई में उन्हें राहत नहीं मिलती है तो वह पुलिस में आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज करा सकते हैं। सिर्फ नरसिंह ही नहीं उनके स्थान पर सुशील कुमार को रियो में भेजे जाने की उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं।
साई के महानिदेशक इंजेती श्रीनिवास ने साफ कर दिया है कि नरसिंह यादव का ओलंपिक में भाग लेना अब मुमकिन नहीं है। साथ ही उनके स्थान पर सुशील को भी ओलंपिक में नहीं भेजा जा सकता है क्योंकि 18 जुलाई को ओलंपिक के लिए एंट्री भेजे जाने की आखिरी तारीख गुजर चुकी है।
सुनवाई के दौरान अगर नरसिंह अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर पाए तो उन पर चार साल का प्रतिबंध लगना तय है। हालांकि एक सच्चाई यह भी है कि नरसिंह सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ की गई साजिश को साबित भी कर देते हैं तब भी उन्हें वाडा नियमों के तहत राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
दरअसल, वाडा कोड में षड्यंत्र के चलते डोप में फंसने को स्थान नहीं दिया गया है। इसलिए नाडा का डिसिपलिनरी पैनल उनकी सजा तो कम कर सकता है लेकिन उन्हें बरी किया जाना बेहद मुश्किल है। वहीं कुश्ती संघ भी नरसिंह के पक्ष में खड़ी हो गई है। उसकी ओर से भी इस मामले पर अंदरूनी जांच कराई जा सकती है।
डोप रिपोर्ट पहले मिली तो क्यों नहीं बदली गई एंट्री?
सूत्र बताते हैं कि नरसिंह की डोप पॉजीटिव रिपोर्ट बीते शनिवार को ही सामने आ गई थी। ऐसे में 18 जुलाई को भेजी जाने वाली एंट्री में नाम बदला जा सकता था। लेकिन नरसिंह का ही नाम आईओसी को भेजा गया। हालांकि कुश्ती संघ के पदाधिकारी का दावा है कि उन्हें रिपोर्ट 19 जुलाई को मिली है जबकि उनसे पहले नरसिंह को रिपोर्ट दी गई थी।
रिपोर्ट में पाया गया स्टेरॉयड 15 दिनों में होता है साफ
नरसिंह यादव के सैंपल में मैथेंडाइन नाम का जो स्टेरॉयड पाया गया है वह विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक है और 15 दिनों के अंतराल में ही शरीर से साफ हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब नाडा ने प्री डिपार्चर टेस्ट भी बंद कर दिए हैं। ऐसे में खिलाड़ी 15 दिन के अंदर शरीर से साफ होने वाले स्टेरॉयड लेने का जोखिम ले सकते हैं।